कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नवगठित भाजपा सरकार, जिसका नेतृत्व शुभेंदु अधिकारी कर रहे हैं, ने राज्य में बढ़ते कथित संस्थागत भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार के मामलों की जांच के लिए दो विशेष जांच आयोगों के गठन को मंजूरी दे दी है। सरकार का मानना है कि इन संवेदनशील मामलों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच आवश्यक है ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जा सके।
महिलाओं के खिलाफ अत्याचार जांच आयोग का गठन
महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों की जांच के लिए बनाए गए इस आयोग की अध्यक्षता कलकत्ता उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति समापति चटर्जी को सौंपी गई है। वहीं वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन को इस आयोग का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। इस आयोग का कार्यक्षेत्र संदेशखाली और हांसखाली जैसे क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में हुए कथित अपराधों के साथ-साथ वर्ष 2021 के बाद हुई चुनावोत्तर हिंसा से जुड़ी शिकायतों की विस्तृत जांच करना होगा।
संस्थागत भ्रष्टाचार जांच आयोग की जिम्मेदारी
दूसरे आयोग का गठन राज्य में विभिन्न सरकारी योजनाओं में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच के उद्देश्य से किया गया है। इस आयोग की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति विश्वजीत बसु को दी गई है, जबकि वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी जयरामन को सदस्य सचिव बनाया गया है। यह आयोग विशेष रूप से अम्फान राहत, मिड-डे मील योजना, मनरेगा और आवास योजना जैसी प्रमुख सामाजिक योजनाओं में हुए कथित अनियमितताओं की जांच करेगा।
आयोगों के कार्य शुरू होने की तारीख
सरकारी जानकारी के अनुसार दोनों जांच आयोग आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 1 जून से आधिकारिक रूप से अपना कार्य शुरू करेंगे। सरकार का दावा है कि इन आयोगों के गठन से राज्य में पारदर्शिता बढ़ेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।