कोलकाता/वाराणसी: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के पूर्व आप्त सहायक (PA) और बेहद करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की सनसनीखेज हत्या के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को एक और बड़ी सफलता मिली है। सीबीआई ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी (बनारस) से इस हत्याकांड के एक और आरोपी विनय राय को गिरफ्तार किया है। इससे ठीक एक दिन पहले सोमवार को जांच एजेंसी ने इस मामले के मुख्य आरोपियों में से एक राजकुमार सिंह उर्फ राज सिंह को यूपी के ही मुजफ्फरनगर से दबोचा था।
इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में अब तक कुल 5 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। शुरुआती जांच राज्य पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने की थी, जिसने 3 आरोपियों को पकड़ा था, जबकि केस हाथ में लेने के बाद सीबीआई अब तक 2 और आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा चुकी है। चौंकाने वाली बात यह है कि पकड़े गए 5 आरोपियों में से 4 उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं।
सरेराह गोलियों से भून दिया था
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के ठीक दो दिन बाद, 6 मई की रात को मध्यमग्राम की एक व्यस्त सड़क पर चंद्रनाथ रथ की गाड़ी रोककर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी। बदमाशों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाईं, जिसमें चंद्रनाथ के सीने और पेट में गोलियां लगीं, जिससे उनके दिल में छेद हो गया था। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हमले में उनका ड्राइवर बुद्धदेव बेरा भी गंभीर रूप से घायल हो गया था।
यूपी के पेशेवर शूटरों को दी गई थी सुपारी
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार राजकुमार सिंह यूपी के बलिया जिले के रसड़ा थाना अंतर्गत रतनपुर का निवासी है और लंबे समय से एक पेशेवर शूटर (Professional Shooter) के रूप में काम कर रहा है। एसआईटी द्वारा पूर्व में बिहार के बक्सर से पकड़े गए एक आरोपी के भी शार्प शूटर होने का संदेह है। इन आरोपियों से पूछताछ के बाद ही विनय राय का नाम सामने आया, जिसे वाराणसी में घेराबंदी कर दबोच लिया गया। जांचकर्ताओं का मानना है कि स्थानीय अपराधियों की मदद से यूपी-बिहार के पेशेवर गैंग को चंद्रनाथ की हत्या की सुपारी दी गई थी।
सबूत मिटाने की शातिर साजिश: चेसिस नंबर तक मिटाए
इस हत्याकांड को बेहद शातिर और योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया था, जिसका खुलासा पुलिस और सीबीआई की जांच में हुआ है:
नंबर प्लेट और गाड़ियां: वारदात में दो कारों और दो मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस ने एक संदिग्ध लाल रंग की निसान माइक्रा कार और बाइक बरामद की हैं, जिन पर फर्जी नंबर प्लेट लगी थीं।
मिटाए गए सुराग: पकड़ी गई कार और पहली बाइक के इंजन नंबर और चेसिस नंबर को रेती से पूरी तरह घिसकर मिटा दिया गया था। यहाँ तक कि कार के रेडिएटर के पास लगे स्टीकर को भी खुरच दिया गया था ताकि गाड़ी की पहचान न हो सके। कार पर उंगलियों के निशान (Fingerprints) भी नहीं मिले।
चोरी की बाइक का इस्तेमाल: हालांकि, तकनीकी जांच के जरिए पुलिस को पता चला कि वारदात में इस्तेमाल पहली बाइक दमदम के एक निवासी की थी, जो करीब ढाई महीने पहले चोरी हो गई थी। चोरों ने उसी चोरी की बाइक का इस्तेमाल इस मर्डर में किया।
इस मामले में अभी भी 2 से 3 आरोपी फरार बताए जा रहे हैं, क्योंकि जांच के मुताबिक इस पूरी वारदात में 7 से 8 लोग शामिल थे। सीबीआई अब विनय राय और राजकुमार को रिमांड पर लेकर इस कत्ल के पीछे के असली मास्टरमाइंड और राजनीतिक व आपराधिक ताने-बाने को खंगालने में जुट गई है।