सिलीगुड़ी/कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद सुवेंदु अधिकारी आज, बुधवार को अपने पहले उत्तर बंगाल दौरे पर जा रहे हैं। इस दौरे को लेकर पूरे उत्तर बंगाल में राजनीतिक और प्रशासनिक सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री आज सिलीगुड़ी स्थित राज्य सचिवालय 'उत्तरकन्या' (Uttarkanya) में पांच जिलों के विधायकों, पुलिस कप्तानों और प्रशासनिक आलाधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल प्रशासनिक बैठक करेंगे। इस बैठक में उनके साथ राज्य के खेल और उत्तर बंगाल विकास मंत्री निशीथ प्रमाणिक भी मौजूद रहेंगे।
इस बैठक की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि सुवेंदु सरकार ने 'विपक्ष के बहिष्कार' की पुरानी राजनीतिक संस्कृति को तोड़ते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायकों को भी इस सरकारी प्रशासनिक बैठक में शामिल होने का न्यौता भेजा है। इसमें सिताई से टीएमसी विधायक संगीता रॉय का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। गौरतलब है कि टीएमसी के पिछले 15 साल के शासनकाल में भाजपा के किसी भी विधायक को ऐसी बैठकों में नहीं बुलाया जाता था, लेकिन सत्ता बदलते ही यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।
क्या रहेगा मुख्यमंत्री का आज का शेड्यूल?
प्रशासनिक और पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार:
मुख्यमंत्री सुबह 10 बजे बागडोगरा हवाई अड्डे पर उतरेंगे।
वहां से वे सीधे भाजपा के जिला कार्यालय जा सकते हैं, जिसके बाद वे उत्तरकन्या के लिए रवाना होंगे।
उत्तरकन्या में मैराथन प्रशासनिक बैठक करने के बाद, वे दोपहर 2 बजे बागडोगरा के रास्ते कोलकाता लौट आएंगे।
इस व्यस्त दौरे के दौरान मुख्यमंत्री सिलीगुड़ी शहर के बर्दवान रोड पर बने नए फ्लाईओवर (उड़ान पुल) का उद्घाटन भी करेंगे।
बैठक के मुख्य एजेंडे: आपदा प्रबंधन और 'जीरो टॉलरेंस'
सामने मानसून (बरसात) का सीजन होने के कारण इस बैठक में उत्तर बंगाल की भौगोलिक समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
1. प्राकृतिक आपदाएं: बाढ़, अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड), भूस्खलन (लैंडस्लाइड) और नदियों के कटाव से निपटने के लिए ब्लूप्रिंट तैयार किया जाएगा।
2. माफिया राज पर लगाम: अवैध निर्माण, सरकारी जमीनों पर कब्जा और बालू-पत्थर माफियाओं के खिलाफ सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति पर सख्त निर्देश दिए जाएंगे।
3. रुके हुए प्रोजेक्ट्स: पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के समय से लटकी हुई उत्तर बंगाल की विकास परियोजनाओं और चाय बागानों की समस्याओं पर मुख्यमंत्री विशेष दिशा-निर्देश दे सकते हैं।
4. भ्रष्टाचार पर वार: एसजेडीए (SJDA), जीटीए (GTA), जिला परिषदों और ग्राम पंचायतों में फैले कथित भ्रष्टाचार और गतिरोध को दूर करना सरकार की प्राथमिकताओं में रहेगा।
भगवा लहर के बाद उम्मीदों का भारी दबाव
हालिया विधानसभा चुनावों में उत्तर बंगाल से टीएमसी का सूपड़ा पूरी तरह साफ हो गया है। जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और दार्जिलिंग जैसे जिलों में ममता बनर्जी की पार्टी खाता तक नहीं खोल सकी और जनता ने भाजपा को एकतरफा वोट दिया है। यही वजह है कि नई सुवेंदु सरकार पर उत्तर बंगाल के लोगों की उम्मीदों का भारी दबाव है।
पिछले शासनकाल के दौरान चाय बागानों की जमीनों को प्रमोटरों को सौंपने, संरक्षित जंगलों में अवैध रिसॉर्ट बनाने और सिंडिकेट राज को लेकर स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा था। अब जनता इन सब मामलों की कानूनी जांच और कार्रवाई चाहती है।
पीएम मोदी और शाह के वादे: लोकसभा और विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर बंगाल के कायाकल्प का वादा किया था। इसमें आईआईटी (IIT), एम्स (AIIMS) जैसी संस्थाएं, कैंसर अस्पताल का निर्माण, संवैधानिक ढांचे के तहत पहाड़ों की समस्या का स्थायी समाधान और कामतापुरी भाषा को संवैधानिक मान्यता देना शामिल है। ऐसे में मुख्यमंत्री के रूप में सुवेंदु अधिकारी के इस पहले दौरे पर पूरे उत्तर बंगाल की निगाहें टिकी हैं।