दत्तपुकुर/कोलकाता: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के दत्तपुकुर थाना क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक पूर्व पार्टी कार्यालय की अलमारी से भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों के वोटर कार्ड, आधार कार्ड और 'बांग्ला आवास योजना' (सरकारी आवास योजना) के लाभार्थियों की सूची बरामद की गई है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। स्थानीय निवासियों और भाजपा (BJP) कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि टीएमसी नेताओं ने ग्रामीणों को डराने और सरकारी सुविधाओं से वंचित रखने के लिए उनके मूल दस्तावेज जबरन अपने कब्जे में रख छोड़े थे।
यह घटना दत्तपुकुर थाना अंतर्गत जॉयपुर के गंगानंदपल्ली इलाके में मंगलवार को घटी। खबर मिलते ही दत्तपुकुर थाने की पुलिस और केंद्रीय बल (Central Forces) के जवान मौके पर पहुंचे और सभी दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया।
सत्ता बदलते ही दफ्तर बन गया मंदिर का कार्यालय
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, चुनाव परिणामों में टीएमसी की हार के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस पार्टी कार्यालय पर कब्जा कर लिया था और इसे भगवा रंग में रंग दिया था। राजनीतिक दफ्तर के बजाय अब इसे स्थानीय 'शीतला मंदिर' के प्रशासनिक कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। मंगलवार को जब मंदिर समिति के सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने दफ्तर के भीतर रखी एक पुरानी अलमारी को खोला, तो उनके होश उड़ गए। अलमारी के अंदर गुच्छों में लोगों के पहचान पत्र और सरकारी आवास योजनाओं की लिस्ट भरी हुई थी।
"मेरा घर किसी और को दे दिया"— पीड़ित ग्रामीण का दर्द
इस बरामदगी के बाद टीएमसी के खिलाफ स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। इलाके की निवासी मौमिता कुंडू ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई:
"बांग्ला आवास योजना की सूची में मेरा नाम स्वीकृत था। सरकारी अधिकारियों ने आकर मेरे पुराने घर की तस्वीरें भी खींची थीं। लेकिन मुझे आज तक पक्का मकान नहीं मिला। अब समझ आया कि टीएमसी के नेताओं ने मेरे दस्तावेज दबाकर रखे थे और मेरे नाम का घर किसी और के नाम पर ट्रांसफर कर दिया।"
वहीँ, भाजपा की स्थानीय पंचायत सदस्य मौमिता चौधरी ने कहा कि यह टीएमसी का पुराना सिंडिकेट राज है। गरीब ग्रामीणों को सरकारी लाभों से वंचित करने और उन पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए ही उनके जरूरी कागजात पार्टी दफ्तर में छुपाकर रखे गए थे। भाजपा ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
टीएमसी ने आरोपों को नकारा
दूसरी तरफ, स्थानीय टीएमसी नेतृत्व ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। टीएमसी नेता बापी बाग ने सफाई देते हुए कहा, "साल 2022 से ही इस पार्टी दफ्तर और अलमारी पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं था। वह अलमारी लंबे समय से बंद पड़ी थी और उसकी चाबी भी हमारे पास नहीं थी। यह हमें फंसाने की राजनीतिक साजिश है।"
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और बरामद किए गए सभी वोटर व आधार कार्ड्स के मालिकों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि असली दस्तावेज उनके सही मालिकों तक पहुंचाए जा सकें। इस घटना के बाद इलाके में सुरक्षा के लिहाज से केंद्रीय बलों की गश्त बढ़ा दी गई है।