कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही सुवेंदु अधिकारी ने 'भ्रष्टाचार मुक्त बंगाल' का जो वादा किया था, उस पर सरकार ने बेहद आक्रामक तरीके से काम करना शुरू कर दिया है। सत्ता संभालने के महज 11 दिनों के भीतर सुवेंदु सरकार ने भ्रष्टाचार की जड़ों पर कड़ा प्रहार किया है। राज्य पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED-CBI) के संयुक्त एक्शन के कारण पूर्व मंत्रियों से लेकर ब्लॉक स्तर के नेताओं तक, किसी को भी बख्शा नहीं जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, सरकार गठन के शुरुआती 11 दिनों में ही अलग-अलग घोटालों और मामलों में कुल 13 रसूखदार लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।
यहाँ देखें इन 11 दिनों में हुई बड़ी गिरफ्तारियों का पूरा ब्योरा:
1. देवराज चक्रवर्ती (गिरफ्तारी: 19.05.2026)
उत्तर 24 परगना के कद्दावर नेता और राजारहाट-गोपालपुर की पूर्व विधायक अदिति मुंशी के पति देवराज चक्रवर्ती को मंगलवार को एक गुप्त ठिकाने से हिरासत में लिया गया। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले देवराज पर चुनाव बाद हुई हिंसा, हत्या और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। चुनाव नतीजे आने के बाद से ही वे फरार चल रहे थे।
2. 'सोनू पप्पू' और राजू अहलूवालिया (गिरफ्तारी: 18.05.2026)
जमीन घोटाले और धोखाधड़ी के आरोपी सोनू पप्पू उर्फ बिस्वजीत पोद्दार ने सोमवार को साल्टलेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में ईडी के सामने सरेंडर किया था, जिसके बाद देर रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसी दिन आसनसोल से टीएमसी के ब्लॉक अध्यक्ष राजू अहलूवालिया को भी रंगदारी (तोलाबाजी) के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
3. एक ही दिन में 5 गिरफ्तारियां (17.05.2026)
रविवार को जांच एजेंसियों ने एक साथ 5 लोगों को दबोचा। इनमें रंगदारी के आरोप में नदिया के कृष्णनगर-1 पंचायत समिति के कर्माध्यक्ष स्मरजीत विश्वास और पैसों के बदले बिल्डिंग प्लान पास करने के आरोप में दिनहाटा के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष गौरीशंकर माहेश्वरी और नगरपालिका कर्मी मौमिता भट्टाचार्य शामिल हैं। इनके अलावा दो अन्य पुलिस की गिरफ्त में आए।
4. पूर्व डीसी शांतनु सिंह विश्वास (गिरफ्तारी: 14.05.2026)
ममता बनर्जी के बेहद भरोसेमंद माने जाने वाले पूर्व डीसी शांतनु सिंह विश्वास का नाम सोनू पप्पू मामले में सामने आया था। लुकआउट नोटिस जारी होने और हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद 14 मई को उन्होंने ईडी दफ्तर में हाजिरी दी, जहां मैराथन पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
5. सुजीत बसु और अन्य (11.05.2026 से 13.05.2026)
काउंसिलर शांतनु मजूमदार (13 मई): बहरामपुर (मुर्शिदाबाद) में लंबे समय से रंगदारी वसूलने के आरोप में गिरफ्तार। इसी दिन भर्ती घोटाले में सीबीआई ने दो और लोगों को दबोचा।
पूर्व मंत्री सुजीत बसु (11 मई): बंगाल की राजनीति का यह बड़ा चेहरा नगर पालिका भर्ती घोटाले में फंसा है। आरोप है कि उन्होंने पैसों के बदले 150 लोगों के नामों की सिफारिश की थी। ईडी की लंबी पूछताछ के बाद वे फिलहाल केंद्रीय एजेंसी की हिरासत में हैं।
नया संदेश: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया है कि बंगाल की प्रशासनिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं होगी, चाहे आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।