सनातन धर्म में प्रत्येक महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती है। यह तिथि देवी शक्ति की आराधना और मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद पवित्र मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और साधक को भय, नकारात्मक ऊर्जा तथा शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। अधिक मास में पड़ने वाली दुर्गाष्टमी का महत्व और भी अधिक माना जाता है, क्योंकि अधिक मास स्वयं भगवान विष्णु और देवी उपासना के लिए अत्यंत पुण्यदायी काल माना गया है।
जानिए कब मनाई जाएगी अधिक मास की दुर्गाष्टमी
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 23 मई को सुबह 5 बजकर 4 मिनट पर होगा। वहीं इस तिथि का समापन 24 मई को सुबह 4 बजकर 27 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर अधिक मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत और पूजन 23 मई को किया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन ब्रह्म मुहूर्त से लेकर दिनभर देवी पूजा का विशेष महत्व रहेगा।
व्रत और पूजा का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत रखने से साधक को मानसिक शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा से व्रत रखकर मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करता है, उसके जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं। विशेष रूप से अधिक मास में किए गए जप, तप और पूजा का फल कई गुना अधिक माना जाता है। इसी कारण देवी भक्त इस दिन उपवास रखकर मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करते हैं।
ऐसे करें मां दुर्गा की पूजा
अधिक मासिक दुर्गाष्टमी के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थल में मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए। मां को लाल पुष्प, सिंदूर, अक्षत, नारियल और श्रृंगार सामग्री अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा और देवी मंत्रों का पाठ विशेष फलदायी माना गया है। भक्त मां दुर्गा के बीज मंत्रों और उनके 108 नामों का जाप भी कर सकते हैं।
मंत्र जाप से दूर होती है नकारात्मक ऊर्जा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा के मंत्रों का जाप विशेष प्रभावशाली माना जाता है। इस दिन “ॐ दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का श्रद्धा से जाप करने पर भय, तनाव और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है। कई श्रद्धालु इस दिन कन्या पूजन और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने का भी संकल्प लेते हैं। ऐसा करने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
अधिक मास में पूजा का बढ़ जाता है महत्व
अधिक मास को सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी समय माना गया है। इस दौरान की गई पूजा, दान और साधना का फल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक मिलता है। इसलिए ज्येष्ठ अधिक मास की दुर्गाष्टमी देवी उपासना के लिए अत्यंत शुभ अवसर मानी जा रही है। श्रद्धालु इस दिन पूरे विधि-विधान से मां दुर्गा की आराधना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।