आईपीएल के नए सीजन का आगाज चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने उसी अंदाज में किया है, जहां उन्होंने पिछला सीजन छोड़ा था। शनिवार को खेले गए रोमांचक मुकाबले में बेंगलुरु ने हैदराबाद को 6 विकेट से शिकस्त देकर टूर्नामेंट में अपना विजयी खाता खोल दिया है। लेकिन इस जीत के बीच सबसे ज्यादा चर्चा आरसीबी के नए खिलाड़ी मंगेश यादव की हो रही है, जिनका सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।
मैच का हाल: कोहली-पडिक्कल का तूफान
हैदराबाद ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 201/9 का विशाल स्कोर खड़ा किया था। लक्ष्य का पीछा करने उतरी बेंगलुरु की टीम ने विराट कोहली और देवदत्त पडिक्कल के अर्धशतकों और कप्तान रजत पाटीदार की धुआंधार पारी की बदौलत केवल 4 विकेट खोकर जीत हासिल कर ली।
संघर्ष की मिसाल: 5.2 करोड़ का गेंदबाज और ट्रक ड्राइवर पिता
भले ही मंगेश को शनिवार के मैच में प्लेइंग इलेवन में मौका न मिला हो, लेकिन आरसीबी कैंप में उनकी चर्चा हर तरफ है। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के रहने वाले बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मंगेश यादव को आरसीबी ने मिनी-नीलामी में 5.2 करोड़ रुपये में खरीदा है।
पिता ने ट्रक चलाकर सींचा सपना: मंगेश के पिता रामअवध यादव एक ट्रक ड्राइवर हैं। परिवार को पालने और बेटे के क्रिकेट के खर्चों को पूरा करने के लिए वह हर रोज सुबह ३ बजे उठकर खतरनाक रास्तों पर ट्रक लेकर निकल जाते थे। बेटे की कोचिंग और किट के लिए उन्होंने कर्ज तक लिया था।
"पैसों के लिए मैंने बहुत संघर्ष किया। कई रातें सो नहीं पाया, बस यही सोचता था कि बेटे के लिए पैसे कहाँ से आएंगे। एक ट्रक ड्राइवर की जिंदगी कोई जिंदगी नहीं होती, न खाने का वक्त, न नहाने का।" — रामअवध यादव, मंगेश के पिता (RCB बोल्ड डायरीज में)
ट्रेन के जनरल डिब्बे से IPL के लग्जरी रूम तक
मंगेश का खुद का सफर भी कांटों भरा रहा है:
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टेनिस बॉल क्रिकेट: पेशेवर क्रिकेट से पहले मंगेश यूपी, एमपी और छत्तीसगढ़ के गांवों में टेनिस बॉल टूर्नामेंट खेलने जाते थे।
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असुरक्षित सफर: पैसे बचाने के लिए वह अक्सर ट्रेनों के जनरल डिब्बे और सरकारी बसों में धक्के खाकर मैच खेलने पहुँचते थे।
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कोच का साथ: नोएडा के वंडर क्रिकेट क्लब के कोच फूलचंद शर्मा ने मंगेश की प्रतिभा पहचानी और ३ साल तक उनकी हॉस्टल फीस माफ कर दी।
दिनेश कार्तिक ने लिया था 'कड़ा टेस्ट'
ट्रायल के दौरान आरसीबी के दिग्गज दिनेश कार्तिक ने मंगेश की काबिलियत को परखा था। कार्तिक ने उनसे नई गेंद से लेकर डेथ ओवर्स तक, हर परिस्थिति में गेंदबाजी कराई। मंगेश की गति और सटीक यॉर्कर ने उन्हें आरसीबी का टिकट दिलाया।