प्रयागराज: प्रयागराज में होने वाले माघ मेला 2027 को लेकर प्रशासन और परिवहन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मेले में देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए इस बार यातायात और बस संचालन की व्यवस्था में कई अहम बदलाव किए गए हैं। सबसे बड़ा फैसला फाफामऊ के बेला कछार में अस्थायी बस अड्डा नहीं बनाने का है। इसका उद्देश्य मेला क्षेत्र के मुहाने पर लगने वाले जाम को कम करना और श्रद्धालुओं को लंबी दूरी तक पैदल चलने से राहत देना है।
बेला कछार में नहीं बनेगा अस्थायी बस अड्डा
माघ मेले के दौरान फाफामऊ का बेला कछार क्षेत्र श्रद्धालुओं और वाहनों की भारी भीड़ का सामना करता रहा है। अस्थायी बस अड्डा बनने के कारण यहां बड़ी संख्या में बसों के पहुंचने से यातायात का दबाव बढ़ जाता था। इसके बाद श्रद्धालुओं को कई किलोमीटर पैदल चलकर मेला क्षेत्र तक पहुंचना पड़ता था। इस बार परिवहन विभाग ने इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए बेला कछार में अस्थायी बस अड्डा नहीं बनाने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि इससे फाफामऊ और मेला क्षेत्र के प्रवेश मार्गों पर वाहनों का दबाव कम होगा। खासतौर पर कल्पवासियों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को इसका फायदा मिल सकता है। बसों को ऐसे स्थानों तक पहुंचाने की योजना है, जहां से श्रद्धालु कम दूरी तय करके मेला क्षेत्र तक पहुंच सकें।
स्काउट एंड गाइड कॉलेज बनेगा प्रमुख बस केंद्र
लखनऊ और अयोध्या की तरफ से प्रयागराज आने वाली उत्तर प्रदेश रोडवेज की बसों के संचालन को लेकर भी नई व्यवस्था तैयार की गई है। इन मार्गों से आने वाली बसें नए सिक्स लेन पुल के जरिए सीधे प्रयागराज शहर की सीमा में प्रवेश करेंगी। इसके बाद इन बसों को भारत स्काउट एंड गाइड कॉलेज परिसर तक लाया जाएगा। यहां श्रद्धालुओं को बस से उतरने की सुविधा मिलेगी। इस व्यवस्था का मकसद बसों को मेला क्षेत्र के बेहद करीब ले जाने के बजाय शहर के ऐसे हिस्से तक पहुंचाना है, जहां से आगे श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित तरीके से नियंत्रित किया जा सके। इससे एक तरफ मेला क्षेत्र के आसपास बसों की भीड़ कम करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ बाहर से आने वाले यात्रियों को शहर के अंदर अपेक्षाकृत सुविधाजनक स्थान पर उतारा जा सकेगा। परिवहन विभाग का फोकस इस बार बसों के संचालन के साथ-साथ श्रद्धालुओं की पैदल आवाजाही को भी आसान बनाने पर है।
मौनी अमावस्या पर चलेंगी 2800 बसें
माघ मेले के सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। इसे देखते हुए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने बड़े स्तर पर बसों की व्यवस्था करने की योजना बनाई है। मौनी अमावस्या के दौरान करीब 2800 बसों का संचालन किया जाएगा। इन बसों के जरिए अलग-अलग जिलों और प्रमुख शहरों से आने वाले श्रद्धालुओं को प्रयागराज तक पहुंचाने और स्नान के बाद वापस उनके गंतव्य तक भेजने की व्यवस्था की जाएगी। भीड़ अचानक बढ़ने की स्थिति से निपटने के लिए परिवहन विभाग करीब 10 प्रतिशत अतिरिक्त बसों को बैकअप के तौर पर तैयार रखेगा। यानी जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बसों को तत्काल सेवा में लगाया जा सकेगा। इससे प्रमुख स्नान पर्व के दौरान बसों की कमी की स्थिति से निपटने में मदद मिलेगी।
शहर में सात स्थानों पर अस्थायी बस अड्डे
श्रद्धालुओं की संख्या को अलग-अलग मार्गों पर बांटने के लिए शहर में सात स्थानों पर अस्थायी बस अड्डे बनाए जाएंगे। अलग-अलग दिशाओं से आने वाली बसों को निर्धारित बस पड़ावों पर भेजने की योजना है। इस व्यवस्था से सभी बसों का दबाव एक ही जगह पर आने से रोका जा सकेगा। अलग-अलग रूट के यात्रियों के लिए बसों की आवाजाही को व्यवस्थित करने में भी मदद मिलेगी। परिवहन विभाग इन बस अड्डों पर यात्री सुविधाओं, बस संचालन और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था तैयार करेगा। स्नान पर्व के दौरान भीड़ बढ़ने पर बसों की संख्या और उनके रूट में जरूरत के अनुसार बदलाव भी किया जा सकेगा। इसके लिए परिवहन विभाग और जिला प्रशासन के बीच समन्वय बनाए रखने की योजना है।
रूट डायवर्जन से नियंत्रित होगा ट्रैफिक
माघ मेले के दौरान प्रयागराज में बाहर से आने वाले वाहनों की संख्या काफी बढ़ जाती है। ऐसे में शहर के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ने की संभावना रहती है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग विशेष रूट डायवर्जन प्लान तैयार करेंगे। अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों को उनकी मंजिल और भीड़ की स्थिति के अनुसार निर्धारित मार्गों पर भेजा जाएगा। मेला क्षेत्र के आसपास अनावश्यक वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर कुछ मार्गों पर यातायात की दिशा भी बदली जा सकती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बसों, निजी वाहनों और पैदल श्रद्धालुओं की आवाजाही एक-दूसरे में बाधा न बने। प्रमुख स्नान पर्वों पर ट्रैफिक व्यवस्था को और सख्त रखने की तैयारी है।
सीसीटीवी और ट्रैफिक मॉनिटरिंग से होगी निगरानी
माघ मेले की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। मेला क्षेत्र और प्रमुख मार्गों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए लगातार निगरानी रखने की व्यवस्था की जाएगी। ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से भीड़ और वाहनों की स्थिति पर नजर रखी जाएगी। किसी मार्ग पर अचानक भीड़ बढ़ने या जाम की स्थिति बनने पर संबंधित विभागों को इसकी जानकारी मिल सकेगी। इसके आधार पर ट्रैफिक को दूसरे मार्गों की ओर डायवर्ट किया जा सकेगा। इसके अलावा मेला क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार तैनात रहेंगी। भीड़ प्रबंधन के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
जगह-जगह बनाए जाएंगे सहायता केंद्र
बड़ी संख्या में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को रास्तों की जानकारी देने के लिए मेला क्षेत्र और बस पड़ावों के आसपास सहायता केंद्र बनाए जाएंगे। यहां यात्रियों को बस अड्डे, स्नान घाट, मेला क्षेत्र और अन्य प्रमुख स्थानों तक पहुंचने की जानकारी दी जाएगी। सही दिशा बताने के लिए प्रमुख स्थानों पर संकेतक और सूचना बोर्ड भी लगाए जाएंगे। इससे पहली बार प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं को रास्ता खोजने में आसानी होगी। खासतौर पर बुजुर्गों, महिलाओं और परिवार के साथ आने वाले यात्रियों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।
श्रद्धालुओं की सुविधा पर रहेगा पूरा फोकस
माघ मेला 2027 की तैयारियों में इस बार परिवहन व्यवस्था को लेकर मुख्य जोर भीड़ को एक जगह जमा होने से रोकने, बसों की आवाजाही व्यवस्थित करने और श्रद्धालुओं की पैदल दूरी कम करने पर है। बेला कछार में बस अड्डा नहीं बनाने और शहर के अलग-अलग हिस्सों में बस पड़ाव तैयार करने की योजना इसी दिशा में उठाया गया कदम है। मौनी अमावस्या जैसे बड़े स्नान पर्व पर 2800 बसों और अतिरिक्त बैकअप बसों की व्यवस्था से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को परिवहन सुविधा देने की तैयारी है। वहीं रूट डायवर्जन, सीसीटीवी, ट्रैफिक मॉनिटरिंग और सहायता केंद्रों के जरिए प्रशासन मेले के दौरान यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने की तैयारी कर रहा है।