लखनऊ। Uttar Pradesh में 2026 के प्रस्तावित पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने त्रिस्तरीय पंचायत निकायों में पिछड़ा वर्ग आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद पंचायत चुनाव में देरी की चर्चाओं ने भी जोर पकड़ लिया है। कैबिनेट बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में यह आयोग गठित किया जाएगा। आयोग राज्य के ग्रामीण निकायों में पिछड़े वर्गों की सामाजिक और जनसंख्या स्थिति का अध्ययन करेगा और उसी आधार पर आरक्षण की सिफारिश करेगा।
पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण का रास्ता साफ करने की तैयारी
सरकार के मुताबिक आयोग त्रिस्तरीय पंचायतों में पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की प्रकृति, प्रभाव और अनुपात का समकालीन अध्ययन करेगा। इसके बाद पंचायतवार आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की उस व्यवस्था के तहत लिया गया है, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों में OBC आरक्षण लागू करने से पहले ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया पूरी करना जरूरी बताया गया था।
3000 ग्रामीण निकायों में होगा अध्ययन
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि आयोग प्रदेश के करीब 3000 ग्रामीण स्थानीय निकायों में सर्वे और अध्ययन करेगा। इसके तहत पंचायत अध्यक्ष और सदस्य पदों पर आरक्षण का नया निर्धारण किया जाएगा। सरकार ने कहा कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 और उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम 1961 के प्रावधानों के तहत यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
OBC आरक्षण 27% से ज्यादा नहीं
सरकारी नियमों के अनुसार पंचायतों में पिछड़ा वर्ग आरक्षण कुल सीटों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। यदि पिछड़े वर्गों की जनसंख्या के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे, तो आयोग सर्वे के जरिए डेटा तैयार करेगा।
पंचायत चुनाव में देरी की अटकलें तेज
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आयोग गठन और सर्वे प्रक्रिया में समय लग सकता है। ऐसे में 2026 में प्रस्तावित पंचायत चुनाव की तारीख आगे बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि सरकार की ओर से अभी चुनाव टालने को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार सक्रिय
दरअसल, सुप्रीम Court ने स्थानीय निकाय चुनावों में OBC आरक्षण लागू करने के लिए ट्रिपल टेस्ट अनिवार्य किया था। इसके तहत:
समर्पित आयोग का गठन
पिछड़ेपन का अध्ययन
आंकड़ों के आधार पर आरक्षण तय करना
जरूरी माना गया है। योगी सरकार अब इसी प्रक्रिया को पूरा करने की तैयारी में जुट गई है।