लखनऊ। Yogi Adityanath सरकार के हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद सोमवार को योगी कैबिनेट की पहली आधिकारिक बैठक होने जा रही है। इस अहम बैठक में प्रदेश के विकास, कानून-व्यवस्था और जनहित से जुड़े कई बड़े प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है। बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya और Brajesh Pathak समेत सभी वरिष्ठ मंत्री और हाल ही में शामिल किए गए नए चेहरे मौजूद रहेंगे।
कई बड़े फैसलों की संभावना
सूत्रों के मुताबिक, योगी सरकार इस बैठक में विकास परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे, रोजगार और जनकल्याण योजनाओं से जुड़े कई अहम फैसले ले सकती है। इसके अलावा आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए कुछ लोक-लुभावन घोषणाएं भी कर सकती है। माना जा रहा है कि कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों पर भी विशेष फोकस रहेगा।
नए मंत्रियों के विभागों पर होगी चर्चा
हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नए मंत्रियों के विभागों के बंटवारे और उनकी जिम्मेदारियों को लेकर भी बैठक में चर्चा हो सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नए मंत्रियों को शासन की प्राथमिकताओं और कार्यशैली को लेकर दिशा-निर्देश दे सकते हैं। साथ ही आगामी महीनों में सरकार किन मुद्दों पर फोकस करेगी, इसका रोडमैप भी सामने आ सकता है।
सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
योगी सरकार ने हालिया कैबिनेट विस्तार के जरिए प्रदेश के विभिन्न सामाजिक वर्गों को साधने का प्रयास किया है। मंत्रिमंडल में ब्राह्मण, ओबीसी और दलित समुदायों के प्रतिनिधित्व को संतुलित करने की रणनीति दिखाई दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी कैबिनेट फैसलों में भी इसी सामाजिक संतुलन की झलक देखने को मिल सकती है।
इन नेताओं को मिली टीम योगी में जगह
हालिया विस्तार में कई नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। Bhupendra Singh Chaudhary और Manoj Kumar Pandey को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। वहीं अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर को प्रमोट कर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर, कैलाश सिंह राजपूत और हंसराज विश्वकर्मा को राज्य मंत्री के रूप में टीम योगी में शामिल किया गया है।
बैठक पर पूरे प्रदेश की नजर
कैबिनेट विस्तार के बाद होने वाली इस पहली बैठक को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बैठक के जरिए सरकार अपनी आगामी रणनीति, प्रशासनिक प्राथमिकताओं और चुनावी तैयारियों का स्पष्ट संकेत दे सकती है।