हावड़ा. पश्चिम बंगाल के हावड़ा में आयोजित हनुमंत कथा के दूसरे दिन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने जौहर को लेकर चल रही बहस पर अपनी बात रखी। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना अभिनेत्री स्वरा भास्कर की कथित टिप्पणी का संदर्भ दिया और जौहर की ऐतिहासिक व्याख्या को लेकर असहमति जताई। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भारतीय इतिहास और परंपराओं से जुड़े प्रसंगों को समझे बिना उन पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने जौहर को कायरता मानने वाली सोच पर सवाल उठाते हुए इसे अपने दृष्टिकोण से वीरता, समर्पण और सम्मान से जुड़ा प्रसंग बताया। उनका यह बयान कथा स्थल के साथ-साथ सामाजिक माध्यमों पर भी चर्चा का विषय बन गया।
‘तुम क्या जानो जौहर क्या होता है’
अपने संबोधन में धीरेंद्र शास्त्री ने जौहर और रानी पद्मावती से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को भारतीय इतिहास, संस्कृति और उस दौर की परिस्थितियों की जानकारी नहीं है, वे जौहर की भावना को कैसे समझ सकते हैं। उन्होंने कथित टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जौहर को कायरता कहना उचित नहीं है और उनके अनुसार इसके पीछे वीरता, त्याग तथा सम्मान की भावना को देखा जाना चाहिए। हालांकि जौहर की ऐतिहासिक व्याख्या को लेकर इतिहासकारों और समाज में अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं। ऐसे में धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी ने इस पुराने ऐतिहासिक प्रसंग को एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
संस्कृति को समझने के बाद टिप्पणी की दी नसीहत
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति और परंपराओं की समझ को लेकर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी परंपरा या ऐतिहासिक घटना का मूल्यांकन उसके तत्कालीन सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ को जाने बिना नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, वर्तमान समय के नजरिए से अतीत की घटनाओं को देखने के कारण कई बार उनके मूल संदर्भ और भाव को समझने में कठिनाई होती है। उन्होंने संकेत दिया कि लोग उनकी बात से असहमत हो सकते हैं, लेकिन वे अपनी समझ के अनुसार अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेंगे। इस दौरान उनका जोर सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और ऐतिहासिक स्मृतियों को सम्मान देने पर रहा।
नवरात्रि में मांसाहारी खाद्य पदार्थों को लेकर अपील
हनुमंत कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने नवरात्रि पर्व को लेकर भी लोगों से अपील की। उन्होंने कहा कि देवी आराधना के इस पर्व के दौरान देवी प्रतिमाओं के आसपास मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इसे धार्मिक भावनाओं और सामाजिक सौहार्द से जोड़ते हुए लोगों से संवेदनशीलता बरतने का आग्रह किया। उनके अनुसार, त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान का अवसर नहीं होते, बल्कि समाज में आपसी सम्मान और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम भी होते हैं। इसलिए सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक आयोजनों के दौरान लोगों की आस्था और भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
‘प्रतिमा में ही नहीं, प्रत्येक मां में मां के दर्शन करें’
धीरेंद्र शास्त्री ने नवरात्रि के धार्मिक और सामाजिक संदेश को मातृशक्ति के सम्मान से जोड़ते हुए श्रद्धालुओं को विशेष संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देवी की प्रतिमा में मां के दर्शन करने के साथ समाज की प्रत्येक मां में भी उसी श्रद्धा और सम्मान की भावना देखी जानी चाहिए। उनके इस संदेश का केंद्र केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि महिलाओं और मातृशक्ति के प्रति सम्मान का व्यापक भाव रहा। उन्होंने नवरात्रि को आत्मचिंतन और सामाजिक व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर बताया। कथा में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच इस संदेश को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आया संबोधन
हनुमंत कथा के दौरान दिए गए धीरेंद्र शास्त्री के संबोधन का वीडियो सामाजिक माध्यमों पर तेजी से प्रसारित होने लगा है। जौहर को लेकर उनकी टिप्पणी के साथ नवरात्रि से जुड़ी अपील पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। समर्थक उनके बयान को भारतीय संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं के पक्ष में दिया गया वक्तव्य बता रहे हैं, जबकि इस मुद्दे पर असहमति रखने वाले लोग जौहर की ऐतिहासिक और नैतिक व्याख्या को अलग नजरिए से देखते हैं। इस तरह एक धार्मिक कथा के मंच से दिया गया बयान इतिहास, संस्कृति और सार्वजनिक विमर्श से जुड़े व्यापक सवालों को फिर चर्चा में ले आया है। फिलहाल जौहर पर धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी सामाजिक माध्यमों पर बहस का प्रमुख विषय बनी हुई है।