कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम निवासी और नरेंद्रपुर रामकृष्ण मिशन के कक्षा 12 के छात्र दीप्तांशु महात की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से पूरे इलाके में शोक का माहौल है। परिवार का आरोप है कि समय पर उचित चिकित्सा नहीं मिलने के कारण यह दुखद घटना हुई। पिता मनोरंजन महात, जो पेशे से कलकत्ता हाई कोर्ट के वकील हैं, पोस्टमार्टम के बाद बेटे का शव घर लाने के लिए कोलकाता में मौजूद रहे।
परिवार ने मिशन प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
दीप्तांशु की बड़ी बहन मंजिमा महात ने आरोप लगाया कि चाय पीने के बाद उनके भाई की तबीयत बिगड़ गई थी। उनका दावा है कि मिशन प्रशासन ने तत्काल इलाज की व्यवस्था करने के बजाय परिवार के आने का इंतजार किया। बाद में उसे डॉक्टर के पास भेजा गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। परिवार पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
फुटबॉल का दीवाना था दीप्तांशु
दीप्तांशु ब्राजील फुटबॉल टीम का समर्थक और नेमार का बड़ा प्रशंसक था। 3 जुलाई को छुट्टी लेकर घर आने और परिवार के साथ फुटबॉल विश्व कप के बाकी मुकाबले देखने की उसकी योजना थी। पिता के मोबाइल पर उसने अपने पसंदीदा मैच भी देखे, लेकिन कुछ देर बाद उसकी तबीयत फिर बिगड़ गई और उसने पिता की गोद में अंतिम सांस ली।
तीन साल पहले मां को खोया, अब बेटे की मौत से टूटा परिवार
परिवार के लिए यह दूसरा बड़ा सदमा है। तीन वर्ष पहले दीप्तांशु की मां का निधन हो चुका था। पढ़ाई में होनहार दीप्तांशु इस वर्ष उच्च माध्यमिक परीक्षा देने वाला था। बहन मंजिमा की पढ़ाई पूरी हो चुकी है। परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि एक उज्ज्वल भविष्य रखने वाले छात्र की मौत की सच्चाई सामने आनी चाहिए।
इलाके में न्याय की मांग
दीप्तांशु की मौत के बाद मध्यमग्राम में शोक और आक्रोश दोनों का माहौल है। स्थानीय लोग और परिजन मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फिलहाल मौत के कारणों का आधिकारिक खुलासा होना बाकी है।