कोलकाता: नई राज्य सरकार ने 'मा आहार' योजना के तहत प्रति भोजन मिलने वाली सब्सिडी को 10 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपये कर दिया है। इसके साथ ही लाभार्थियों की थाली में अब मछली-भात के अलावा दाल, सब्जी और अन्य व्यंजन भी शामिल किए जाएंगे। बढ़ी हुई सब्सिडी से कैंटीन का संचालन करने वाले स्वयं सहायता समूहों को भी बड़ी राहत मिली है।
शहरी विकास विभाग ने जारी की अधिसूचना
राज्य के शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है, जो आरामबाग नगरपालिका को भी प्राप्त हो चुकी है। 'मा आहार' के प्रभारी अधिकारी प्रशांत मुखोपाध्याय ने बताया कि प्रति भोजन अतिरिक्त 10 रुपये की सब्सिडी देने का निर्देश मिल गया है। उन्होंने कहा कि भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने और साफ-सफाई के साथ भोजन परोसने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार की घोषणा के अनुसार सप्ताह में दो दिन पहले से ही मछली-भात परोसा जा रहा है।
स्वयं सहायता समूहों में खुशी की लहर
'मा आहार' कैंटीन का संचालन कर रहे स्वयं सहायता समूह की प्रमुख रोजिना बेगम ने कहा कि लंबे समय से सब्सिडी बढ़ाने की मांग की जा रही थी। सरकार के इस फैसले से कैंटीन संचालन आसान होगा। उन्होंने बताया कि उनके समूह द्वारा संचालित दो कैंटीनों में प्रतिदिन लगभग 700 लोग भोजन करते हैं। पहले मिलने वाली 10 रुपये की सब्सिडी से बहुत कम पारिश्रमिक मिल पाता था।
भाजपा विधायक बोले- गरीबों को मिलेगा सीधा लाभ
पुरशुरा से भाजपा विधायक विमान घोष ने कहा कि पिछली सरकार योजनाओं में भ्रष्टाचार करती थी, जबकि वर्तमान सरकार जनता के हित में योजनाओं का बजट बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि सब्सिडी बढ़ने से भोजन की गुणवत्ता बेहतर होगी और गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
अब बदलेगा 'मा आहार' का मेन्यू
पहले 'मा कैंटीन' में 5 रुपये में केवल अंडा-भात उपलब्ध कराया जाता था। नई भाजपा सरकार ने इसे 'मा आहार' नाम देकर मछली-भात शामिल करने की घोषणा की थी। नगरपालिका के अनुसार अब सप्ताह में दो दिन मछली-भात के साथ दाल और सब्जी, दो दिन अंडा-भात के साथ दाल और सब्जी तथा बाकी दो दिन शाकाहारी भोजन में भात, दाल, सब्जी के साथ चटनी और पापड़ भी परोसे जाएंगे।
अस्पताल परिसर में सबसे अधिक भीड़
आरामबाग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर और भवघुरे भवन के पास संचालित 'मा आहार' कैंटीनों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज, उनके परिजन और जरूरतमंद लोग भोजन करते हैं। दोपहर का भोजन प्राप्त करने के लिए लोगों को सुबह 5 रुपये देकर कूपन लेना होता है। नई गाइडलाइन में सरकार ने भोजन की पोषण गुणवत्ता, स्वाद और स्वच्छता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया है।