कोलकाता: कृष्णनगर से तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) अपने तीखे तेवरों के लिए जानी जाती हैं। मंगलवार को उन्होंने एक बार फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पश्चिम बंगाल की नई सरकार और पुलिस प्रशासन पर चौतरफा हमला बोला। महुआ ने आरोप लगाया कि राज्य में पूरी तरह से तानाशाही चल रही है और बंगाल अब व्यावहारिक रूप से एक 'पुलिस स्टेट' (Police State) में तब्दील हो चुका है।
"भाजपा के पास कैडर नहीं, पुलिस ही चला रही है पार्टी"
राज्य की नई प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए महुआ मोइत्रा ने कहा, "लूट कर हो या जैसे भी—आप चुनाव जीत गए हैं, अच्छी बात है। हम इसे जनता का जनादेश मान लेते हैं। लेकिन अगर वाकई जनता ने आपको वोट दिया है, तो आपके अंदर इतना डर क्यों है? आपके पार्टी कैडर मैदान में क्यों नहीं दिख रहे हैं?"
सांसद ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के नेता केवल उकसाने वाले बयान देते हैं और बाकी का सारा काम प्रशासन से करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "जिलों के एसपी (SP) अब व्यावहारिक रूप से भाजपा के जिला अध्यक्ष की तरह काम कर रहे हैं। मुझे अपनी पार्टी के जिला अध्यक्ष का नाम पता है, लेकिन भाजपा के अध्यक्ष का नहीं, क्योंकि उनका काम तो एसपी साहब ही कर दे रहे हैं। हर ब्लॉक में ओसी (OC) पर्दे के पीछे से भाजपा के ब्लॉक अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे हैं।"
धर्मतला फीता-विवाद और धारा 144 पर उठाए सवाल
रविवार को धर्मतला में विक्टोरिया हाउस के सामने 21 जुलाई की रैली के लिए टीएमसी नेताओं द्वारा सड़क और मंच की नापजोख किए जाने पर पुलिस द्वारा कानूनी नोटिस भेजे जाने की महुआ ने कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, "दुनिया या भारत के लोकतंत्र के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ। कूणाल घोष (Kunal Ghosh) और कुछ विधायकों ने छुट्टी के दिन खाली सड़क की सिर्फ नापजोख की थी। वहां कोई मंच या भीड़ नहीं थी। अब पुलिस स्वतः संज्ञान (Cognizance) लेकर उन्हें कानूनी नोटिस भेज रही है! सड़क मापना कौन सा अपराध है?"
कोलकाता पुलिस द्वारा पूरे मध्य कोलकाता में आगामी 31 अगस्त तक (लगभग दो महीने के लिए) धारा 144 लागू करने के फैसले पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, "कोलकाता पुलिस कमिश्नर को 21 जुलाई की जनसभा से इतना डर क्यों है? यह किस तरह का लोकतांत्रिक अधिकार है जहां पांच से ज्यादा लोग एक साथ बैठक नहीं कर सकते?"
'डिम थेरेपी' नहीं, यह भाजपा की गुंडागर्दी है
विपक्षी कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमलों और सत्तारूढ़ दल द्वारा दी जा रही 'डिम थेरेपी' (अंडा थेरेपी) के सिद्धांत को महुआ ने पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि जिसे पहले महीने 'जन आक्रोश' बताकर पेश करने की कोशिश की गई, वह असल में भाजपा की सरेआम गुंडागर्दी थी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि इस मामले में कोर्ट ने पहले ही राज्य के डीजीपी (DGP) को थानों के लिए सख्त गाइडलाइन जारी करने का निर्देश दिया है।
"पुलिस कह रही है- वारंट सिर्फ हिंदी फिल्मों में होता है"
पुलिसिया उत्पीड़न का ब्योरा देते हुए कृष्णनगर की सांसद ने एक चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा, "जब हमारी पार्टी के लोग पुलिस से तलाशी का वारंट मांगते हैं, तो एसडीपीओ (SDPO) मुंह पर कहते हैं कि 'वारंट-वारंट सिर्फ हिंदी फिल्मों में होता है, हम ऐसे ही तलाशी लेंगे!' बिना किसी वारंट के लोगों के घरों में छापेमारी की जा रही है।"
महुआ मोइत्रा ने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि यह तानाशाही ज्यादा दिन नहीं चलेगी। देश की न्यायपालिका अभी जिंदा है और हमें अदालत से न्याय जरूर मिलेगा। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने इस अराजकता को देखने के लिए वोट नहीं दिया था।