पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब नैहाटी के प्रसिद्ध बड़ा मां मंदिर की संचालन कमेटी को भंग कर दिया गया है। नैहाटी के नवनिर्वाचित विधायक सुमित्र चट्टोपाध्याय ने साफ तौर पर कहा है कि अब मंदिर संचालन में किसी भी राजनीतिक व्यक्ति की भूमिका नहीं होगी। मंदिर की व्यवस्था केवल सेवादारों द्वारा संचालित की जाएगी। विधायक ने मंदिर परिसर में चल रहे ‘वीआईपी कल्चर’ को भी पूरी तरह खत्म करने का निर्देश दिया है। जब तक नई कमेटी का गठन नहीं हो जाता, तब तक पुरानी कमेटी के संपादक तापस भट्टाचार्य दैनिक कामकाज संभालेंगे।
राजनीतिक हस्तक्षेप खत्म करने की तैयारी
अब तक मंदिर कमेटी के अध्यक्ष नैहाटी नगर पालिका के चेयरमैन अशोक चट्टोपाध्याय थे। इसके अलावा निवर्तमान विधायक सनत दे और स्थानीय पार्षद के बेटे अरीत्र बंद्योपाध्याय समेत कई प्रभावशाली लोग कमेटी में शामिल थे। भाजपा लगातार आरोप लगाती रही थी कि मंदिर प्रबंधन में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ गया है। इसी बीच गत गुरुवार को ट्रस्टी बोर्ड की बैठक बुलाई गई, जिसमें कमेटी को भंग करने का निर्णय लिया गया। विधायक सुमित्र चट्टोपाध्याय के निर्देश पर यह बड़ा कदम उठाया गया।
‘लाइन में लगेंगे सभी’, VIP व्यवस्था पर सख्ती
विधायक सुमित्र चट्टोपाध्याय ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को छोड़कर बाकी सभी को आम भक्तों की तरह लाइन में खड़े होकर दर्शन करने होंगे उन्होंने कहा कि बड़ा मां किसी राजनीतिक दल की नहीं हैं और मंदिर को राजनीति से दूर रखा जाएगा। नई कमेटी में स्थानीय विधायक चेयरमैन होंगे, जबकि नैहाटी के प्रतिष्ठित शिक्षक, डॉक्टर और प्रसिद्ध गायक राघव चट्टोपाध्याय जैसी विशिष्ट हस्तियों को शामिल किया जाएगा।
स्थानीय लोगों को मिलेगी विशेष सुविधा
कमेटी के संपादक तापस भट्टाचार्य ने बताया कि विधायक के सभी निर्देशों का पालन किया जा रहा है। हालांकि, नैहाटी के स्थानीय निवासियों के लिए पहले से लागू विशेष नियम जारी रहेगा। स्थानीय लोग पहचान पत्र दिखाकर पहले पूजा-अर्चना करने की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इससे स्थानीय श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी और व्यवस्था भी बेहतर होगी।