कोलकाता: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल उल्लंघन के मामले में राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सिलीगुड़ी के तत्कालीन पुलिस आयुक्त सी. सुधाकर और दार्जिलिंग के जिलाधिकारी मनीष मिश्रा को राज्य सरकार ने ‘रिलीव’ कर दिया है। नवान्न के एक विशेष सूत्र के अनुसार, रविवार को छुट्टी के दिन ही दोनों अधिकारियों को रिलीव ऑर्डर थमा दिया गया। इसके चलते अब उन्हें अनिवार्य रूप से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना होगा।
राष्ट्रपति दौरे में प्रोटोकॉल उल्लंघन का आरोप
चुनाव से पहले, मार्च की शुरुआत में सिलीगुड़ी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संताल काउंसिल सम्मेलन में भाग लेने राष्ट्रपति आई थीं। लेकिन प्रोटोकॉल के अनुसार राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए राज्य के कोई मंत्री उपस्थित नहीं थे। यहां तक कि उनकी सुरक्षा के लिए वीवीआईपी स्तर पर केवल कुछ सिविक वॉलंटियर्स तैनात किए जाने के आरोप भी लगे थे।
केंद्र ने पहले ही किया था तलब
इसके बाद केंद्र सरकार ने सी. सुधाकर और मनीष मिश्रा को दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तलब किया था। लेकिन उस समय राज्य की तत्कालीन तृणमूल सरकार ने दोनों अधिकारियों को रिलीव नहीं किया, जिसके कारण उनका दिल्ली में जॉइन करना अस्थायी रूप से अटक गया था। सत्ता परिवर्तन के बाद अब राज्य के कई आईपीएस अधिकारियों के अनिवार्य केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।
रविवार के आदेश से बढ़ी हलचल
रविवार का यह रिलीव ऑर्डर उसी अटकल को और हवा देता है। गृह विभाग के एक सूत्र ने यह भी बताया कि असम, बिहार और ओडिशा के तीन आईपीएस अधिकारी पश्चिम बंगाल में प्रतिनियुक्ति पर आ रहे हैं। इनमें हिमांशु लाल, चरण सिंह मीणा और अनुप गर्ग शामिल हैं।
डीजी से संपर्क की कोशिश
इस पर प्रतिक्रिया के लिए राज्य पुलिस के डीजी सिद्धिनाथ गुप्ता से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।