कोलकाता: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर पश्चिम बंगाल सरकार ने उनकी स्मृति को भव्य रूप देने की तैयारी शुरू कर दी है। हुगली के जिराट स्थित पैतृक क्षेत्र में उनकी 125 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
प्रतिमा के साथ बनेगा आधुनिक म्यूज़ियम
यह परियोजना केवल प्रतिमा तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार डॉ. मुखर्जी के जीवन, विचारों और योगदान को प्रदर्शित करने के लिए अत्याधुनिक म्यूज़ियम भी विकसित करेगी। इसके साथ ही ऑडिटोरियम और आधुनिक सुविधाओं से युक्त लाइब्रेरी का निर्माण और पुराने शैक्षणिक संस्थानों के उन्नयन की भी योजना है।
ऐतिहासिक इमारतों को मिलेगा नया स्वरूप
योजना के तहत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के भाई बामाप्रसाद मुखर्जी के घर को म्यूज़ियम में बदला जाएगा। इसके अलावा उनके परिवार से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की तैयारी की जा रही है। जिराट अस्पताल के नाम परिवर्तन का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।
परिवार ने दिया पूरा सहयोग का भरोसा
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के परिवार ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया है। परिवार के सदस्यों ने कहा कि यदि विरासत को संरक्षित करने के लिए पैतृक संपत्ति का अधिग्रहण किया जाता है तो वे हरसंभव सहयोग करेंगे। उनका मानना है कि इससे इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी।
जिराट को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान
सरकार का उद्देश्य जिराट को पश्चिम बंगाल के प्रमुख ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों में शामिल करना है। विशाल प्रतिमा, म्यूज़ियम और अन्य विकास कार्य पूरे होने के बाद इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।
वादा पूरा करने की दिशा में कदम
विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए विकास संबंधी वादों के अनुरूप अब इस परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रशासन ने संभावित स्थानों का निरीक्षण शुरू कर दिया है और संबंधित विभागों के साथ योजना के क्रियान्वयन पर काम तेज कर दिया गया है।