कोलकाता: पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ अब टॉलीवुड (बंगाली फिल्म इंडस्ट्री) में भी बड़े बदलाव की बयार बहने लगी है। राज्य में 15 साल पुराने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 'हरे गढ़' के ढहने और बीजेपी की नई सरकार के आने के बाद से कलाकार खुलकर अपनी राय रख रहे हैं। इसी कड़ी में अपने बेबाक अंदाज के लिए मशहूर गायक और नवनिर्वाचित विधायक सिलाजीत मजूमदार ने पूर्ववर्ती सरकार की 'पोस्टर संस्कृति' (होर्डिंग कल्चर) के खिलाफ तीखा आक्रोश व्यक्त किया है।रविवार दोपहर कोलकाता के सांस्कृतिक केंद्र 'नंदन' में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिलाजीत ने बीजेपी की दो स्टार विधायकों— रूपा गांगुली और रुद्रनील घोष की मौजूदगी में टीएमसी शासनकाल के दौरान हुए आत्मप्रचार पर जमकर निशाना साधा।
'ईएम बायपास पर नेताओं की तस्वीरें देखकर छाती में दर्द होता था'
सिलाजीत मजूमदार ने बिना किसी का नाम लिए अतीत का दर्द बयां करते हुए कहा, "जब मैं ईएम बायपास (EM Bypass) से गुजरता था, तो सड़कों पर कतार से लगी उन तस्वीरों (नेताओं की) को देखकर मुझे बेहद असहजता होती थी। मेरी छाती में दर्द होने लगता था। हर इलाके के काउंसिलर और छोटे-बड़े नेताओं की तस्वीरें जबरन थोप दी जाती थीं। मैंने जब पहले इस वीभत्स पोस्टर संस्कृति के खिलाफ आवाज उठाई थी, तो मुझे नंदन में बुलाना बंद कर दिया गया और कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (KIFF) से भी मेरा पत्ता काट दिया गया था।"
रूपा गांगुली ने गिनाए एक ही रास्ते पर 32 पोस्टर
सिलाजीत की बात का समर्थन करते हुए पास बैठीं अभिनेत्री और बीजेपी विधायक रूपा गांगुली अपनी हंसी नहीं रोक पाईं। उन्होंने एक पुराना किस्सा साझा करते हुए कहा, "एक दिन मैं गाड़ी से कहीं जा रही थी, तो रास्ते में होर्डिंग्स की कतार देखकर मैंने गाड़ी रुकवाई और खुद उतरी। जब मैंने गिनना शुरू किया, तो देखा कि एक ही नेता की कुल 32 तस्वीरें लगी हुई थीं।"
'अपनी पार्टी से भी कहो, ये चेहरे देखना असहज करता है'
हमेशा स्पष्ट बोलने वाले सिलाजीत ने इस दौरान अपनी ही पार्टी के सहयोगियों को नसीहत देने में भी संकोच नहीं किया। उन्होंने रूपा गांगुली और रुद्रनील घोष की तरफ देखते हुए कहा, "मैं तुम लोगों से भी अनुरोध करता हूं कि प्लीज अपनी पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व से भी कहना कि ये सब हमारे समय में बंद होना चाहिए। सड़कों पर इस तरह के चेहरे देखना बेहद असहज करने वाला है।"
इसके बाद उन्होंने अपने जूनियर और अभिनेता रुद्रनील घोष से चुटकी लेते हुए मजाकिया लहजे में चेतावनी दी, "रुद्रनील, सुन ले! अगर किसी दिन मुझे सड़कों पर हाथ जोड़े हुए तेरी तस्वीरों वाली होर्डिंग्स कतार से लगी दिखीं, तो मैं उस दिन भी इसी तरह खुलकर विरोध दर्ज कराऊंगा।"
नंदन जैसे सांस्कृतिक मंचों का राजनीतिकरण हुआ: रुद्रनील
इस मुद्दे पर विधायक रुद्रनील घोष ने भी सहमति जताते हुए कहा, "नंदन जैसी पवित्र सांस्कृतिक और सिनेमाई जगह को भी पिछली सरकार ने राजनीतिक अखाड़ा बना दिया था। वहां कुछ चुनिंदा चेहरों की अनगिनत तस्वीरें और पोस्टर लगा दिए जाते थे, जबकि असली निर्देशकों की फिल्मों को रिलीज होने के लिए थियेटर तक नसीब नहीं होते थे।" गौरतलब है कि साल 2018 में फिल्म निर्देशक अनीक दत्त ने भी नंदन में नेताओं के पोस्टर लगाने का विरोध किया था, जिसके बाद उनकी फिल्म 'भविष्यतेर भूत' को रिलीज के समय भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।