कोलकाता: पश्चिम बंगाल में 1 जुलाई 2026 से नई न्यूनतम वेतन व्यवस्था लागू कर दी गई है। राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार उद्योग, सेवा क्षेत्र और विभिन्न अनुसूचित रोजगारों में कार्यरत श्रमिकों के लिए संशोधित वेतन दरें लागू होंगी। इस संशोधन का उद्देश्य श्रमिकों की आय बढ़ाना, महंगाई के प्रभाव को कम करना और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना है।
दो ज़ोन में लागू होगी नई वेतन व्यवस्था
नई वेतन संरचना को दो श्रेणियों ज़ोन 'ए' और ज़ोन 'बी' में लागू किया गया है। ज़ोन 'ए' में नगर निगम, नगर पालिका, अधिसूचित क्षेत्र, विकास प्राधिकरण और ताप विद्युत परियोजनाओं से जुड़े टाउनशिप शामिल हैं। वहीं, ज़ोन 'बी' में राज्य के शेष सभी क्षेत्र शामिल किए गए हैं।
नई न्यूनतम मजदूरी कितनी होगी?
नई न्यूनतम वेतन संरचना के तहत श्रमिकों की श्रेणी और कार्य क्षेत्र (ज़ोन) के अनुसार वेतन तय किया गया है। ज़ोन 'ए' में कार्यरत अकुशल श्रमिकों को ₹10,558 प्रतिमाह (₹406 प्रतिदिन), अर्धकुशल श्रमिकों को ₹11,615 प्रतिमाह, कुशल श्रमिकों को ₹12,777 प्रतिमाह और अत्यंत कुशल श्रमिकों को ₹14,054 प्रतिमाह न्यूनतम वेतन मिलेगा।
वहीं, ज़ोन 'बी' में अकुशल श्रमिकों के लिए ₹9,760 प्रतिमाह (₹375 प्रतिदिन), अर्धकुशल श्रमिकों के लिए ₹10,733 प्रतिमाह, कुशल श्रमिकों के लिए ₹11,807 प्रतिमाह और अत्यंत कुशल श्रमिकों के लिए ₹12,990 प्रतिमाह न्यूनतम वेतन निर्धारित किया गया है। सरकार का कहना है कि इस संशोधित वेतन संरचना का उद्देश्य श्रमिकों की आय में वृद्धि के साथ उनकी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को और मजबूत करना है।
लाखों श्रमिकों को मिलेगा फायदा
नई वेतन व्यवस्था से उद्योग, दुकानों, प्रतिष्ठानों और सेवा क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यूनतम मजदूरी बढ़ने से श्रमिकों की क्रय शक्ति मजबूत होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।