कोलकाता/उत्तर दिनाजपुर: पश्चिम बंगाल में कथित ISI जासूसी नेटवर्क के खिलाफ राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की कार्रवाई जारी है। इसी कड़ी में उत्तर दिनाजपुर से फ़ज़ले रब्बी को गिरफ्तार किया गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसी को कथित जासूसी नेटवर्क से जुड़े पहले गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान रब्बी के बारे में जानकारी मिली थी। रब्बी, इस्लामपुर के तृणमूल कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष जाकिर हुसैन का भाई बताया जा रहा है। गिरफ्तारी के बाद मामले ने राजनीतिक और सुरक्षा, दोनों स्तरों पर हलचल बढ़ा दी है।
पहले गिरफ्तार आरोपियों से मिला सुराग
STF के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस से पहले जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किए गए मोहम्मद शफीकुल इस्लाम, नूर नासिरुद्दीन अली और रशीदुल हक से पूछताछ के दौरान फ़ज़ले रब्बी का नाम सामने आया। बताया जा रहा है कि इसी इनपुट के आधार पर STF की टीम ने उत्तर दिनाजपुर में कार्रवाई की और रब्बी को हिरासत में लेकर पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया।
पाकिस्तानी नागरिक से कथित कनेक्शन की जांच
जांच एजेंसी अब रब्बी के कथित संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है। STF को शक है कि उसका संपर्क हाल में उत्तर 24 परगना के हाबरा से गिरफ्तार किए गए पाकिस्तानी नागरिक राणा रऊफ उर्फ वहाब आलम से था। राणा रऊफ पर कथित तौर पर फर्जी पहचान के जरिए कोलकाता में रहने और एक जासूसी मॉड्यूल से जुड़े होने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
बंगाल में कथित जासूसी नेटवर्क पर STF की कार्रवाई
पिछले कुछ समय में पश्चिम बंगाल STF ने कथित ISI नेटवर्क से जुड़े कई मामलों में कार्रवाई की है। इनमें सिलीगुड़ी के सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रदीप बासु समेत कई संदिग्धों की गिरफ्तारी शामिल है। जांच एजेंसियां कथित तौर पर हवाला लेनदेन, फर्जी भारतीय मुद्रा, सिम कार्ड की सप्लाई और रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा किए जाने के आरोपों की भी पड़ताल कर रही हैं।
परिवार ने आरोपों को बताया राजनीतिक साजिश
दूसरी ओर, फ़ज़ले रब्बी की पत्नी नूर नेहार बेगम ने आरोपों को खारिज किया है। उनका दावा है कि उनके पति को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है। परिवार का कहना है कि रब्बी को केवल इसलिए मामले में फंसाया गया क्योंकि वह एक वरिष्ठ TMC नेता के रिश्तेदार हैं। हालांकि, पुलिस का पक्ष है कि गिरफ्तारी जांच के दौरान सामने आए कथित साक्ष्यों और पूछताछ से मिले इनपुट के आधार पर की गई है। अब STF रब्बी से कथित ISI संपर्क, संभावित नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन को लेकर पूछताछ कर रही है। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस मामले में और कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं।