क्रेडिट स्कोर को लेकर सबसे आम भ्रम यह है कि अगर कोई व्यक्ति बार-बार अपना क्रेडिट स्कोर या क्रेडिट रिपोर्ट चेक करता है, तो उसका स्कोर कम हो जाता है। वास्तव में अपनी क्रेडिट जानकारी को खुद देखना आम तौर पर सॉफ्ट इन्क्वायरी के तौर पर माना जाता है और इसका क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक असर नहीं पड़ता। समस्या तब अलग हो सकती है जब कोई व्यक्ति लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करता है और बैंक या वित्तीय संस्था उसकी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करती है। ऐसी जांच हार्ड इन्क्वायरी हो सकती है और कम समय में कई हार्ड इन्क्वायरी होने पर क्रेडिट प्रोफाइल पर असर पड़ सकता है। इसलिए अपनी रिपोर्ट नियमित रूप से देखना नुकसानदायक नहीं, बल्कि गलत जानकारी या संदिग्ध गतिविधि की पहचान के लिए उपयोगी आदत हो सकती है।
अच्छा क्रेडिट स्कोर होने पर लोन पक्का नहीं
एक मजबूत क्रेडिट स्कोर निश्चित रूप से लोन या क्रेडिट कार्ड हासिल करने की संभावना बेहतर कर सकता है, लेकिन इसे मंजूरी की गारंटी समझना सही नहीं है। बैंक और वित्तीय संस्थान किसी आवेदन का मूल्यांकन करते समय केवल क्रेडिट स्कोर पर निर्भर नहीं रहते। आवेदक की आय, मौजूदा कर्ज, रोजगार या कारोबार की स्थिरता, पहले से चल रही ईएमआई, मांगी गई ऋण राशि और संबंधित संस्था की आंतरिक नीतियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। किसी व्यक्ति का क्रेडिट स्कोर अच्छा होने के बावजूद यदि उसकी मौजूदा देनदारियां अधिक हैं या आय के मुकाबले मांगी गई ऋण राशि ज्यादा है, तो आवेदन पर अलग फैसला हो सकता है। इसलिए बेहतर क्रेडिट स्कोर को वित्तीय मजबूती का एक महत्वपूर्ण संकेत मानना चाहिए, लेकिन इसे अकेला निर्णायक कारक नहीं समझना चाहिए।
कभी लोन नहीं लिया तो स्कोर अपने आप अच्छा नहीं
कई लोगों को लगता है कि उन्होंने कभी लोन या क्रेडिट कार्ड नहीं लिया है, इसलिए उनका क्रेडिट स्कोर निश्चित रूप से अच्छा होगा। असल में ऐसी स्थिति में संभव है कि व्यक्ति की क्रेडिट हिस्ट्री बहुत सीमित हो या उसके बारे में पर्याप्त क्रेडिट जानकारी उपलब्ध ही न हो। जब किसी व्यक्ति ने पहले उधार लेकर उसका भुगतान नहीं किया है, तो वित्तीय संस्था के पास उसके पुराने भुगतान व्यवहार का आकलन करने के लिए पर्याप्त रिकॉर्ड नहीं होता। ऐसे मामलों में कुछ लेंडर अतिरिक्त सावधानी बरत सकते हैं। इसलिए क्रेडिट हिस्ट्री का न होना और बेहतरीन क्रेडिट स्कोर होना एक ही बात नहीं है। क्रेडिट प्रोफाइल को समझते समय यह देखना जरूरी है कि उपलब्ध क्रेडिट रिकॉर्ड कितना पुराना, नियमित और भरोसेमंद है।
पुराना क्रेडिट कार्ड बंद करना हमेशा फायदेमंद नहीं
पुराना क्रेडिट कार्ड बंद करने को भी कई लोग क्रेडिट स्कोर सुधारने का आसान तरीका मानते हैं, जबकि इसका प्रभाव परिस्थितियों पर निर्भर करता है। यदि किसी कार्ड का इस्तेमाल लंबे समय तक जिम्मेदारी से किया गया है और उसके भुगतान नियमित रहे हैं, तो वह क्रेडिट हिस्ट्री की लंबाई में योगदान कर सकता है। कार्ड बंद करने के बाद आपकी कुल उपलब्ध क्रेडिट सीमा भी घट सकती है। यदि इसके साथ आपके खर्च में कोई खास कमी नहीं आती है, तो कुल उपलब्ध सीमा की तुलना में इस्तेमाल की गई क्रेडिट बढ़ सकती है और क्रेडिट उपयोग अनुपात यानी क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो पर दबाव पड़ सकता है। इसलिए किसी पुराने कार्ड को बंद करने से पहले उसकी उम्र, क्रेडिट सीमा, वार्षिक शुल्क और आपके वित्तीय उपयोग को ध्यान में रखना बेहतर है।
क्रेडिट स्कोर सुधारने में भुगतान व्यवहार सबसे अहम
क्रेडिट स्कोर को लेकर किसी भी रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा नियमित और समय पर भुगतान है। लोन की ईएमआई या क्रेडिट कार्ड बिल में देरी आपकी क्रेडिट प्रोफाइल पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, इसलिए निर्धारित तारीख से पहले भुगतान करना बेहतर रहता है। इसके साथ उपलब्ध क्रेडिट सीमा का अत्यधिक इस्तेमाल करने से बचना और जरूरत से ज्यादा नए ऋण या कार्ड के लिए लगातार आवेदन न करना भी समझदारी है। अपनी क्रेडिट रिपोर्ट समय-समय पर जांचने से किसी गलत प्रविष्टि या अनधिकृत गतिविधि का पता समय रहते लगाया जा सकता है। आखिरकार, क्रेडिट स्कोर किसी एक फैसले से नहीं बल्कि लंबे समय के वित्तीय व्यवहार से बनता है, इसलिए मिथकों के बजाय वास्तविक क्रेडिट आदतों पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।