भारतीय शादियों में संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि रस्मों और रिश्तों की भावनाओं को अभिव्यक्त करने का एक खास तरीका भी है। हल्दी और मेहंदी जैसे समारोहों में ऐसे गीतों की मांग हमेशा रहती है, जिनकी धुन पर परिवार और दोस्तों का समूह आसानी से थिरक सके। वर्ष 2005 में आई फिल्म ‘बरसात’ का ‘साजन साजन साजन’ इसी श्रेणी में शामिल हो चुका है। गीत में प्रेम, सजने-संवरने और दुल्हन बनने की उमंग का ऐसा मेल है, जो इसे शादी के माहौल के लिए स्वाभाविक रूप से उपयुक्त बनाता है।
दो दशक से अधिक समय गुजरने के बावजूद इस गीत की लोकप्रियता का बने रहना हिंदी फिल्म संगीत की उस खास ताकत को दिखाता है, जिसमें कोई गीत केवल फिल्म की कहानी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों की निजी यादों और पारिवारिक समारोहों का हिस्सा बन जाता है। इसकी धुन बजते ही शादी के माहौल में उत्साह बढ़ता है और खासकर युवतियों के समूह नृत्य के लिए यह गीत आज भी पसंद किया जाता है। यही निरंतर लोकप्रियता इसे अपने दौर के उन यादगार शादी गीतों में शामिल करती है, जिनकी उम्र उनकी रिलीज से कहीं ज्यादा हो जाती है।
प्रियंका चोपड़ा, बिपाशा बसु और बॉबी देओल पर हुआ था फिल्मांकन
‘साजन साजन साजन’ को फिल्म ‘बरसात’ में प्रियंका चोपड़ा, बिपाशा बसु और बॉबी देओल पर फिल्माया गया था। उस दौर में प्रियंका चोपड़ा हिंदी सिनेमा में तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रही थीं और यह गीत उनके शुरुआती फिल्मी सफर के चर्चित गीतों में शामिल रहा। गीत के दृश्यांकन में प्रेम और उत्सव का माहौल दिखाई देता है, जिसके कारण इसकी प्रस्तुति शादी समारोहों के लिए भी बेहद सहज लगती है।
फिल्म के कलाकारों की मौजूदगी ने गीत को लोकप्रिय बनाने में अपनी भूमिका निभाई, लेकिन इसकी वास्तविक ताकत इसकी धुन और उत्सवी भाव में रही। गीत में जिस तरह दुल्हन के श्रृंगार, प्रेम और विवाह की प्रतीक्षा जैसे भावों को संगीत के साथ पिरोया गया, उसने इसे सामान्य प्रेम गीत से अलग पहचान दी। यही वजह है कि समय बीतने के साथ यह गीत फिल्म के एक दृश्य से निकलकर वास्तविक जीवन के विवाह समारोहों की धुन बन गया।
अलका याज्ञनिक की आवाज ने दिया खास रंग
इस गीत की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी गायकी भी शामिल है। अलका याज्ञनिक की आवाज ने गीत को वह भावनात्मक और मधुर रंग दिया, जो शादी के उत्सव और प्रेम दोनों को साथ लेकर चलता है। उनके साथ प्रियंका चोपड़ा की आवाज भी गीत में सुनाई देती है, जबकि अंतिम हिस्से में कैलाश खेर की आवाज की उपस्थिति इसे एक अलग संगीतात्मक रंग प्रदान करती है। अलग-अलग आवाजों का यह संयोजन गीत को सामान्य फिल्मी गीत की तुलना में अधिक विशिष्ट बनाता है।
गीत के बोल समीर ने लिखे थे और संगीत नदीम-श्रवण की जोड़ी ने तैयार किया था। उस समय हिंदी फिल्म संगीत में मधुर धुन, सरल शब्द और आसानी से याद रह जाने वाला मुखड़ा लोकप्रियता की बड़ी वजह हुआ करते थे। ‘साजन साजन साजन’ में भी यही गुण दिखाई देते हैं। इसकी धुन ऐसी है जिसे पहली बार सुनने वाला भी आसानी से पकड़ सकता है और यही बात इसे सामूहिक समारोहों, खासकर शादी के कार्यक्रमों के लिए बेहद उपयोगी बनाती है।
हल्दी और मेहंदी में क्यों जमता है इसका रंग
शादी के कार्यक्रमों के लिए किसी गीत की लोकप्रियता केवल उसकी धुन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके शब्द और भाव भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। ‘साजन साजन साजन’ में दुल्हन बनने, सजने-संवरने और प्रियतम के प्रति प्रेम जैसे भाव मौजूद हैं। यही विषय हल्दी और मेहंदी की रस्मों से स्वाभाविक रूप से जुड़ जाता है। जब घर की लड़कियां और सहेलियां समूह में नृत्य करती हैं तो गीत के बोल और उसकी उत्सवी लय समारोह के वातावरण के साथ सहज रूप से मेल खाते हैं।
आज के दौर में शादी के संगीत का स्वरूप काफी बदल चुका है। पारंपरिक गीतों के साथ नए फिल्मी गीत, स्वतंत्र संगीत और इंटरनेट पर लोकप्रिय धुनें भी विवाह समारोहों का हिस्सा बनती हैं। इसके बावजूद कुछ पुराने गीत लगातार अपनी जगह बनाए हुए हैं, क्योंकि उनके साथ लोगों की व्यक्तिगत और पारिवारिक यादें जुड़ चुकी होती हैं। ‘साजन साजन साजन’ भी इसी कारण नई पीढ़ी की शादी की प्लेलिस्ट में पुराने दौर के गीत के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे उत्सवी गीत के रूप में मौजूद रहता है जिसे सभी उम्र के लोग आसानी से अपना लेते हैं।
21 साल बाद भी नहीं फीका पड़ा आकर्षण
‘बरसात’ को रिलीज हुए लगभग 21 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन इस गीत की मांग शादी समारोहों में अभी भी दिखाई देती है। यह किसी गीत की असाधारण दीर्घायु का उदाहरण है। आम तौर पर फिल्मी गीतों की लोकप्रियता समय के साथ कम होती जाती है और नई पीढ़ी के संगीत के बीच पुराने गीत पीछे छूट जाते हैं। लेकिन जिन गीतों में विवाह, प्रेम, परिवार और उत्सव जैसे सार्वभौमिक भाव जुड़े होते हैं, वे अक्सर इस बदलाव से बच जाते हैं।
‘साजन साजन साजन’ की लोकप्रियता को इसी संदर्भ में समझा जा सकता है। यह केवल एक फिल्मी गीत नहीं रह गया, बल्कि कई परिवारों की शादी की यादों का हिस्सा बन गया है। किसी विवाह समारोह में इसकी धुन सुनाई पड़ते ही पुराने कार्यक्रमों, दोस्तों के साथ किए गए नृत्य और परिवार के साथ बिताए पलों की याद ताजा हो सकती है। यही भावनात्मक जुड़ाव किसी गीत को महज लोकप्रिय से यादगार बनाता है।
नई पीढ़ी की प्लेलिस्ट में भी बना हुआ है स्थान
संगीत की दुनिया में किसी गीत की सबसे बड़ी सफलता यही मानी जा सकती है कि वह अपने समय से आगे निकलकर अगली पीढ़ी तक पहुंच जाए। ‘साजन साजन साजन’ के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। वर्ष 2005 में जिस गीत को दर्शकों ने फिल्म के संदर्भ में सुना था, वही आज शादी समारोहों में स्वतंत्र रूप से बजता है। कई बार गीत सुनने वाले लोगों को फिल्म का पूरा संदर्भ याद न हो, लेकिन इसकी धुन और मुखड़ा शादी के माहौल से तुरंत जुड़ जाता है।
सोशल मीडिया और विवाह समारोहों में तैयार किए जाने वाले नृत्य कार्यक्रमों ने भी पुराने गीतों को नई जिंदगी दी है। समूह नृत्य के लिए ऐसे गीतों की जरूरत होती है जिनमें स्पष्ट लय, पहचानने योग्य मुखड़ा और उत्सवी भाव हो। ‘साजन साजन साजन’ इन तीनों कसौटियों पर खरा उतरता है। इसलिए नई पीढ़ी के विवाह समारोहों में भी यह गीत अपने पुराने दौर की पहचान के साथ नहीं, बल्कि एक सदाबहार शादी गीत के रूप में सुनाई देता है।
फिल्मी गीत से शादी की परंपरा तक का सफर
हिंदी सिनेमा के कई गीत ऐसे रहे हैं जिन्होंने फिल्मों से निकलकर सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में अपनी अलग जगह बनाई। ‘साजन साजन साजन’ भी इसी परंपरा का हिस्सा है। इसकी लोकप्रियता यह बताती है कि जब किसी गीत में प्रेम और उत्सव की भावनाएं सरल भाषा तथा याद रह जाने वाली धुन के साथ मिलती हैं, तो उसका जीवन फिल्म की रिलीज के साथ समाप्त नहीं होता। वह लोगों के निजी समारोहों और सामूहिक स्मृतियों में शामिल हो जाता है।
प्रियंका चोपड़ा, बिपाशा बसु और बॉबी देओल पर फिल्माया गया यह गीत आज भी हल्दी और मेहंदी की महफिलों में सुनाई देता है तो इसकी वजह केवल पुरानी यादें नहीं हैं। इसके पीछे गीत का उत्सवी स्वभाव, मधुर संगीत, लोकप्रिय गायकी और विवाह से जुड़े भावों का सहज मेल है। यही कारण है कि 21 वर्ष बाद भी ‘साजन साजन साजन’ की धुन शादी के जश्न में सुनाई पड़ते ही माहौल में नाचने और मुस्कुराने की वजह बन जाती है।