प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में आयोजित एक रैली के दौरान देशवासियों से अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अपनी उपभोग आदतों में बदलाव लाने की अपील की। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अगले एक वर्ष तक शादी और अन्य समारोहों में सोने की खरीदारी से बचने का प्रयास करें। प्रधानमंत्री की इस अपील के सामने आते ही देशभर के सर्राफा बाजार और ज्वेलरी उद्योग में हलचल तेज हो गई। कारोबारियों का मानना है कि यदि लोगों ने इस अपील को गंभीरता से लिया तो देश के विशाल वेडिंग ज्वेलरी बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
शादी-ब्याह पर टिका है देश का बड़ा गोल्ड कारोबार
भारत में सोने की खरीद केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और पारंपरिक संस्कृति का अहम हिस्सा मानी जाती है। हर वर्ष देश में लगभग 40 से 50 लाख शादियां होती हैं और इनमें बड़े स्तर पर सोने के आभूषण खरीदे जाते हैं। आमतौर पर एक शादी में 50 से 100 ग्राम तक सोने के गहनों की खरीदारी होती है। यही कारण है कि देश की कुल सोना बिक्री का लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा विवाह सीजन के दौरान होता है। उद्योग से जुड़े संगठनों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में केवल वेडिंग ज्वेलरी कारोबार का आकार 2 से 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
सर्राफा कारोबारियों में बढ़ी चिंता और अनिश्चितता
प्रधानमंत्री की अपील के बाद ज्वेलरी उद्योग से जुड़े कारोबारियों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि यदि लोग सोने की खरीदारी टालने लगते हैं तो बाजार में मांग कमजोर हो सकती है, जिससे छोटे और मध्यम स्तर के ज्वेलर्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। कई कारोबारियों का मानना है कि भारत में सोना केवल विलासिता का प्रतीक नहीं बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक परंपरा से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए बाजार पर इसके प्रभाव का आकलन आने वाले महीनों में अधिक स्पष्ट हो सकेगा।
शेयर बाजार में भी दिखा असर, ज्वेलरी स्टॉक्स में गिरावट
प्रधानमंत्री की अपील का असर केवल सर्राफा बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शेयर बाजार में भी इसकी तेज प्रतिक्रिया देखने को मिली। सोमवार सुबह कारोबार शुरू होते ही ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। टाइटन कंपनी, सेनको गोल्ड और अन्य प्रमुख गोल्ड कंपनियों के शेयरों में लगभग 10 प्रतिशत तक की कमजोरी देखी गई। निवेशकों को आशंका है कि यदि सोने की मांग घटती है तो इसका सीधा असर ज्वेलरी कंपनियों की आय और मुनाफे पर पड़ सकता है।
सरकार की चिंता के केंद्र में विदेशी मुद्रा और आयात बिल
सरकार की इस अपील के पीछे मुख्य वजह बढ़ता आयात बिल और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ता दबाव माना जा रहा है। भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत से अधिक सोना विदेशों से आयात करता है और इसके लिए डॉलर में भुगतान किया जाता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की महंगी कीमतों के कारण देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। ऐसे में सरकार आयात कम करके विदेशी मुद्रा की बचत करना चाहती है ताकि आर्थिक संतुलन बनाए रखा जा सके।
दुनिया के बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है भारत
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश माना जाता है। देश में हर साल लगभग 700 से 800 टन सोने की खपत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन बेहद सीमित है और केवल 1 से 2 टन के आसपास रहता है। बढ़ती कीमतों के बावजूद भारतीय बाजार में विशेष रूप से शादी के मौसम में सोने की मांग मजबूत बनी रहती है। अब बाजार और उद्योग जगत की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रधानमंत्री की अपील का लोगों के व्यवहार पर कितना असर पड़ता है और आने वाले महीनों में ज्वेलरी कारोबार किस दिशा में जाता है।