यूरोप के अधिकांश हिस्से इन दिनों अभूतपूर्व हीटवेव की चपेट में हैं। फ्रांस, स्पेन, इटली, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, नीदरलैंड, बेल्जियम, पोलैंड, क्रोएशिया और हंगरी सहित अनेक देशों में तापमान सामान्य से कहीं अधिक दर्ज किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार 800 से अधिक यूरोपीय शहरों के मौसम संबंधी आंकड़ों का अध्ययन किया गया, जिनमें लगभग 45 प्रतिशत शहरों में जून के अंतिम सप्ताह के दौरान अत्यधिक गर्मी दर्ज की गई या उसके रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की संभावना व्यक्त की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति केवल अस्थायी मौसमी घटना नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक जलवायु संतुलन का गंभीर संकेत है, जिसका प्रभाव अब पहले से अधिक व्यापक और तीव्र रूप में दिखाई देने लगा है।
जलवायु परिवर्तन बना भीषण गर्मी का सबसे बड़ा कारण
वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्तमान हीटवेव के पीछे सबसे प्रमुख कारण जलवायु परिवर्तन है। यद्यपि अल-नीनो जैसी प्राकृतिक मौसमी घटनाएं वैश्विक तापमान को प्रभावित करती हैं, लेकिन इस बार यूरोप में देखने को मिल रही रिकॉर्ड गर्मी के लिए मुख्य रूप से ग्रीनहाउस गैसों के लगातार बढ़ते उत्सर्जन को जिम्मेदार माना जा रहा है। कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग से पृथ्वी का औसत तापमान औद्योगिक युग से पहले की तुलना में लगभग 1.4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार इसी दीर्घकालिक ताप वृद्धि ने अत्यधिक गर्मी, सूखा, जंगलों में आग और अन्य चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति तथा तीव्रता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
रात में भी नहीं मिल रही राहत, स्वास्थ्य पर बढ़ा गंभीर खतरा
इस बार की हीटवेव की सबसे चिंताजनक विशेषता यह है कि रात के समय भी तापमान सामान्य स्तर तक नहीं उतर रहा है। सामान्य परिस्थितियों में रात्रिकालीन ठंडक मानव शरीर को दिनभर की गर्मी से उबरने का अवसर देती है, लेकिन फ्रांस सहित कई क्षेत्रों में लगातार एक सप्ताह से अधिक समय तक रात का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहा, जबकि कुछ स्थानों पर यह 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी परिस्थितियों में शरीर पसीने के माध्यम से स्वयं को प्रभावी ढंग से ठंडा नहीं रख पाता, जिससे हीट स्ट्रेस, हीट स्ट्रोक, निर्जलीकरण, हृदय संबंधी समस्याएं तथा श्वसन संबंधी जटिलताओं का जोखिम तेजी से बढ़ जाता है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति अत्यंत खतरनाक मानी जा रही है।
अनेक देशों में रेड और ऑरेंज अलर्ट, जनजीवन पर व्यापक असर
यूरोप के कई देशों ने बढ़ते तापमान को देखते हुए उच्च स्तर की चेतावनी जारी कर दी है। फ्रांस के आधे से अधिक हिस्से में रेड हीट अलर्ट लागू किया गया है, जबकि नीदरलैंड के कई क्षेत्रों में ऑरेंज अलर्ट जारी है। जर्मनी में सप्ताहांत तक तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका व्यक्त की गई है। पोलैंड, क्रोएशिया और हंगरी सहित कई देशों में भी नागरिकों को अत्यधिक गर्मी से बचाव के लिए विशेष परामर्श जारी किए गए हैं। कई स्थानों पर खुले क्षेत्रों में कार्य करने के समय में बदलाव किया गया है, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं तथा स्थानीय प्रशासन लगातार लोगों से पर्याप्त पानी पीने, दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने और संवेदनशील वर्गों की विशेष देखभाल करने की अपील कर रहा है।
फ्रांस में मौतों का आंकड़ा बढ़ा, बिजली और शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित
फ्रांस में पिछले सप्ताह से जारी भीषण गर्मी के कारण कम से कम 40 लोगों की मृत्यु की सूचना सामने आई है। वहीं यूनाइटेड किंगडम में अत्यधिक तापमान के कारण कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है तथा कई विद्यालयों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी केवल स्वास्थ्य संकट तक सीमित नहीं रहती, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति, जल संसाधनों, कृषि उत्पादन, परिवहन और शहरी जीवन पर भी व्यापक प्रभाव डालती है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण शीतलन उपकरणों की मांग बढ़ने से विद्युत तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, जबकि सूखे की स्थिति जल प्रबंधन को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना रही है।
भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी, उत्सर्जन नियंत्रण पर बढ़ा जोर
जलवायु वैज्ञानिकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को प्रभावी ढंग से नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में ऐसी भीषण हीटवेव अधिक बार और अधिक तीव्र रूप में सामने आ सकती हैं। उन्होंने स्मरण कराया कि वर्ष 2022 में यूरोप में अत्यधिक गर्मी के कारण 60 हजार से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना, हरित अवसंरचना विकसित करना, शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाना तथा जलवायु अनुकूल नीतियों को तेजी से लागू करना अब केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ी वैश्विक प्राथमिकता बन चुकी है। वर्तमान हीटवेव एक बार फिर यह संकेत दे रही है कि जलवायु परिवर्तन भविष्य की नहीं, बल्कि वर्तमान की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती बन चुका है।