वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू के प्रदर्शन का श्रेय अपने समर्थन को दिया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर संदेश साझा कर दावा किया कि उनके नेतन्याहू का समर्थन करने के बाद चुनावी माहौल बदल गया। उन्होंने इसे नेतन्याहू की संभावित बड़ी हार से उबरकर मुकाबले में लौटने या जीत की स्थिति से जोड़कर पेश किया। यह संदेश ट्रंप के 18 अक्टूबर को नेतन्याहू के पक्ष में खुलकर समर्थन जताने के नौ दिन बाद आया। ट्रंप ने नेतन्याहू को मजबूत नेता और ईरान के खिलाफ अभियान में अमेरिका का अहम सहयोगी बताया था।
शुरुआती नतीजों में नेतन्याहू की बढ़त
इजरायल में मंगलवार 27 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनाव के शुरुआती नतीजों में नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को बढ़त मिली है। बुधवार सुबह करीब 55.4 प्रतिशत मतों की गिनती के बाद उनके समर्थक गठबंधन को 56 सीटें मिलने का अनुमान था। विपक्षी गठबंधन 49 सीटों पर आगे था जबकि अरब दलों को 15 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया। नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है। शुरुआती बढ़त के बावजूद नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से पांच सीट दूर था।
चुनाव से पहले के सर्वेक्षण और वास्तविकता
चुनाव से पहले आए प्रमुख सर्वेक्षणों में नेतन्याहू के गठबंधन को 61 सीटों के बहुमत से दूर रहने का अनुमान लगाया गया था। ऐसे में शुरुआती नतीजे उनके लिए अपेक्षा से बेहतर जरूर थे। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि ट्रंप के समर्थन के कारण ही उनके प्रदर्शन में सुधार हुआ। इजरायल में मतदाता सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं करते बल्कि राजनीतिक दलों को वोट देते हैं। इसके बाद दलों के बीच गठबंधन बनाकर सरकार तैयार होती है। सबसे बड़ा समूह बनना और सरकार बना लेना दो अलग-अलग बातें हैं।
ट्रंप का लगातार समर्थन
ट्रंप ने 18 अक्टूबर को नेतन्याहू के पक्ष में खुलकर समर्थन जताया था। उन्होंने इजरायल के मतदाताओं से नेतन्याहू को दोबारा चुनने की अपील की थी। 25 अक्टूबर को भी उन्होंने नेतन्याहू के समर्थन में संदेश जारी किया। दोनों देशों के बीच ईरान को लेकर जारी अभियान को आगे बढ़ाने के लिए नेतन्याहू की वापसी को जरूरी बताया था। ट्रंप का दावा है कि उनके इन बयानों के बाद चुनावी रुख बदला। हालांकि विशेषज्ञ कहते हैं कि कई घरेलू और क्षेत्रीय कारक भी नतीजों को प्रभावित करते हैं।
सरकार बनाने की चुनौती
शुरुआती आंकड़ों से किसी भी गठबंधन की सरकार बनाने की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई थी। नेतन्याहू का गठबंधन 56 सीटों पर था जो बहुमत से कम है। विपक्षी गठबंधन भी 49 सीटों के साथ अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं दिख रहा था। अरब दलों की 15 सीटें दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं। अंतिम नतीजे आने के बाद गठबंधन की जटिल प्रक्रिया शुरू होगी। नेतन्याहू के लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तर पर ये चुनाव महत्वपूर्ण हैं।
ट्रंप के दावे और हकीकत का अंतर
ट्रंप ने अपने समर्थन को नेतन्याहू की वापसी का कारण बताया लेकिन इजरायली राजनीति में कई आंतरिक कारक भी भूमिका निभाते हैं। युद्ध, सुरक्षा और घरेलू मुद्दे मतदाताओं के फैसले को प्रभावित करते हैं। शुरुआती नतीजे अपेक्षा से बेहतर जरूर हैं लेकिन बहुमत अभी दूर है। ट्रंप का श्रेय लेने वाला बयान राजनीतिक संदेश की तरह है। अंतिम नतीजे और गठबंधन समीकरण तय करेंगे कि नेतन्याहू सरकार बनाने में सफल होते हैं या नहीं। इजरायल की जनता का फैसला ही निर्णायक होगा।