16 मई 1996 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और देश के लोकप्रिय राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत के 13वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। यह पहली बार था जब भारतीय जनता पार्टी केंद्र की सत्ता तक पहुंची थी। हालांकि यह सरकार केवल 13 दिनों तक ही चल सकी और भारतीय राजनीति में एक अनोखा अध्याय बनकर दर्ज हो गई।
1996 के चुनाव में नहीं मिला किसी दल को बहुमत
अप्रैल और मई 1996 में हुए लोकसभा चुनावों में देश की जनता ने किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया था। भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसने 161 सीटों पर जीत दर्ज की। दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी को केवल 140 सीटों से संतोष करना पड़ा। इस चुनाव में क्षेत्रीय दलों का प्रभाव भी काफी बढ़कर सामने आया और लोकसभा की बड़ी संख्या में सीटों पर क्षेत्रीय दलों ने जीत हासिल की।
पहली बार कांग्रेस से आगे निकली बीजेपी
1996 का आम चुनाव भारतीय राजनीति के लिए इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस से ज्यादा सीटें जीतकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इससे पहले लंबे समय तक कांग्रेस देश की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति बनी हुई थी। भाजपा की इस सफलता ने देश की राजनीति में सत्ता संतुलन को पूरी तरह बदल दिया।
बहुमत का आंकड़ा जुटाना बना सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई, लेकिन उसके पास सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत का आंकड़ा नहीं था। उस समय लोकसभा में बहुमत के लिए 272 सांसदों का समर्थन आवश्यक था। भाजपा के लिए यह समर्थन जुटाना आसान नहीं था क्योंकि कई क्षेत्रीय दल उसके साथ आने को तैयार नहीं थे। इसी वजह से राजनीतिक अस्थिरता और जोड़तोड़ की चर्चाएं तेज हो गई थीं।
कांग्रेस में टूट का भी दिखा असर
1996 के चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी को कई बड़े नेताओं के अलग होने का नुकसान उठाना पड़ा। नारायण दत्त तिवारी ने ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी) का गठन किया, जबकि माधवराव सिंधिया ने मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस बनाई। वहीं जी.के. मूपनार ने तमिल मनीला कांग्रेस की स्थापना कर ली थी। इन राजनीतिक विभाजनों का सीधा असर कांग्रेस के प्रदर्शन पर पड़ा और पार्टी कमजोर होती चली गई।
राष्ट्रपति ने बीजेपी को दिया सरकार बनाने का न्योता
चूंकि भारतीय जनता पार्टी लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी, इसलिए तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। इसके बाद 16 मई 1996 को अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। देशभर में इसे भारतीय राजनीति के नए दौर की शुरुआत माना गया।
सिर्फ 13 दिन में गिर गई सरकार
प्रधानमंत्री बनने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी बहुमत साबित करने की कोशिशों में जुटे रहे, लेकिन पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका। अंततः उन्हें संसद में बहुमत साबित करने से पहले ही इस्तीफा देना पड़ा। उनकी सरकार केवल 13 दिनों तक चली। हालांकि यह कार्यकाल छोटा था, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी की ओजस्वी छवि और संसदीय मर्यादा ने उन्हें देश के सबसे सम्मानित प्रधानमंत्रियों में शामिल कर दिया।
भारतीय राजनीति में स्थायी छाप छोड़ गए वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी का यह 13 दिन का कार्यकाल भले ही छोटा रहा हो, लेकिन इसने भारतीय जनता पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में स्थायी पहचान दिलाई। बाद के वर्षों में वाजपेयी दोबारा प्रधानमंत्री बने और उन्होंने गठबंधन राजनीति के नए दौर को मजबूत किया। आज भी 16 मई 1996 को भारतीय लोकतंत्र के एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में याद किया जाता है।