अगस्त को आमतौर पर भारत के मानसूनी मौसम का सबसे नम और अपेक्षाकृत ठंडा महीना माना जाता है, लेकिन वर्ष 2026 में मौसम का मिजाज इससे बिल्कुल अलग रहा। भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार अगस्त के दौरान देश का औसत तापमान 28.01 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से लगभग 0.67 डिग्री अधिक है। बारिश की अपेक्षाकृत कमी और मानसून की कमजोर गतिविधियों के बीच तापमान में यह बढ़ोतरी देखने को मिली। अगस्त का औसत अधिकतम तापमान 31.66 डिग्री सेल्सियस रहा, जो वर्ष 1901 के बाद उपलब्ध रिकॉर्ड में चौथा सबसे अधिक है। इस तरह अगस्त की गर्मी ने देश में लंबे समय से चले आ रहे मौसम के पैटर्न में एक असामान्य बदलाव को रेखांकित किया है।
दिन से ज्यादा रात का तापमान बढ़ा
अगस्त की गर्मी की सबसे चिंताजनक बात केवल दिन का बढ़ता तापमान नहीं, बल्कि रातों का असामान्य रूप से गर्म रहना रहा। मौसम विभाग के अनुसार अगस्त 2026 में औसत न्यूनतम तापमान 24.36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो वर्ष 1901 के बाद अगस्त महीने का सबसे अधिक न्यूनतम तापमान है। सामान्य परिस्थितियों में रात के समय तापमान में गिरावट शरीर और पर्यावरण दोनों को गर्मी से राहत देती है, लेकिन जब रातें भी लगातार गर्म रहने लगें तो गर्मी का असर लंबे समय तक बना रहता है। पूर्वी भारत, बंगाल, झारखंड और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में रात के तापमान में विशेष रूप से बढ़ोतरी दर्ज की गई। यही कारण है कि इस बार अगस्त की गर्मी का अनुभव सामान्य से कहीं अधिक परेशान करने वाला रहा।
अल नीनो और कमजोर मानसून का असर
मौसम के इस असामान्य बदलाव के पीछे कमजोर मानसून और वैश्विक समुद्री-वायुमंडलीय परिस्थितियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कम बारिश का सीधा असर जमीन के तापमान पर पड़ता है, क्योंकि लगातार बादल और वर्षा न होने से सतह ज्यादा गर्म होती है। वहीं वातावरण में नमी और बादलों के वितरण में बदलाव रात के समय धरातल से निकलने वाली गर्मी को प्रभावित कर सकता है। अल नीनो जैसी वैश्विक जलवायु घटनाएं भी मानसूनी परिसंचरण और वर्षा के वितरण को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि किसी एक महीने की गर्मी को केवल एक कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा, लेकिन कमजोर मानसून, वर्षा की कमी और व्यापक जलवायु परिस्थितियों ने इस बार तापमान को असामान्य रूप से ऊंचा बनाए रखने में भूमिका निभाई है।
सितंबर में भी बारिश से राहत के आसार कम
अगस्त की गर्मी के बाद अब सितंबर के मौसम पर नजरें टिक गई हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार सितंबर 2026 में भी पूरे देश में मानसूनी गतिविधियां सामान्य से कमजोर रहने की संभावना है। महीने के दौरान देशभर में वर्षा सामान्य से कम रहने का अनुमान है और मौसमी वर्षा का स्तर दीर्घकालिक औसत के लगभग 91% के आसपास रह सकता है। इस साल 4 जून से 31 अगस्त 2026 के बीच देश में औसत से करीब 14% कम बारिश दर्ज की गई है। यदि सितंबर में भी बारिश अपेक्षा के अनुरूप नहीं होती है, तो मानसून के कमजोर प्रदर्शन का असर जल संसाधनों, कृषि गतिविधियों और तापमान के सामान्य होने की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।
अगस्त में बारिश 16% से ज्यादा कम रही
कमजोर मानसून का असर अगस्त की वर्षा पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। महीने के दौरान देशभर में मानसूनी बारिश में 16% से अधिक की कमी दर्ज की गई। हालांकि पूरे देश का औसत आंकड़ा अलग तस्वीर पेश करता है, लेकिन अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में वर्षा का वितरण काफी असमान रहा। कुछ इलाकों में सामान्य से अच्छी बारिश हुई, जबकि कई क्षेत्रों में बारिश की कमी बनी रही। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तुलना में अवध और पूर्वांचल के कुछ हिस्सों में बेहतर वर्षा देखने को मिली। दिल्ली में अगस्त के दौरान बारिश संतोषजनक रही, जबकि हरियाणा के कई हिस्सों में अपेक्षाकृत कम वर्षा हुई। राजस्थान में बारिश की कमी विशेष चिंता का विषय बनी रही, क्योंकि वहां मानसूनी वर्षा का जल संसाधनों और कृषि पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
मौसम का असमान वितरण भी बढ़ा रहा चिंता
इस मानसून की एक प्रमुख विशेषता केवल कम बारिश नहीं, बल्कि वर्षा का असमान वितरण भी रहा है। एक ही राज्य या क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की मात्रा में बड़ा अंतर देखने को मिला। कहीं कुछ ही घंटों में तेज बारिश से जलभराव की स्थिति बनी, तो कहीं लंबे समय तक पर्याप्त वर्षा नहीं हुई। ऐसी परिस्थितियां कृषि योजना और जल प्रबंधन दोनों को कठिन बनाती हैं। जिन इलाकों में लगातार कम बारिश हुई है, वहां मिट्टी की नमी और जल स्रोतों पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि अत्यधिक बारिश वाले इलाकों में अचानक बाढ़ और जलभराव का खतरा पैदा होता है। इसलिए मानसून का आकलन केवल कुल वर्षा के आंकड़े से नहीं, बल्कि उसके समय, तीव्रता और क्षेत्रीय वितरण से करना भी जरूरी हो गया है।
गर्म रातों का बढ़ना क्यों है बड़ी चेतावनी
रात के तापमान में लगातार वृद्धि को मौसम वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए विशेष चिंता का विषय माना जाता है। दिन में अत्यधिक गर्मी के बाद यदि रात को तापमान पर्याप्त नीचे नहीं जाता, तो शरीर को गर्मी से उबरने का अवसर कम मिलता है। इसका असर खास तौर पर बुजुर्गों, बच्चों, खुले में काम करने वाले लोगों और गर्मी के प्रति संवेदनशील आबादी पर अधिक पड़ सकता है। शहरी क्षेत्रों में कंक्रीट और निर्मित सतहों के कारण रात में गर्मी लंबे समय तक बनी रहने की समस्या और गंभीर हो सकती है। अगस्त 2026 के आंकड़े इसलिए केवल एक गर्म महीने की कहानी नहीं हैं, बल्कि बदलते मौसम और बढ़ते रात्रिकालीन तापमान की उस प्रवृत्ति की ओर भी संकेत करते हैं, जिस पर भविष्य की जलवायु और शहरी नियोजन नीतियों में गंभीरता से ध्यान देना होगा।
सितंबर का मौसम तय करेगा आगे की तस्वीर
अगस्त के असामान्य तापमान और कमजोर बारिश के बाद सितंबर मानसून के लिए महत्वपूर्ण महीना साबित हो सकता है। यदि महीने के दौरान बारिश में सुधार होता है तो तापमान और मिट्टी की नमी की स्थिति में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन सामान्य से कम वर्षा का अनुमान मानसून की विदाई से पहले चिंता बनाए हुए है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मानसून का प्रदर्शन केवल मौसम का विषय नहीं है, बल्कि इसका असर खेती, जलाशयों, बिजली उत्पादन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य कीमतों तक दिखाई देता है। इसलिए अगस्त 2026 में दर्ज गर्मी और बारिश की कमी को एक व्यापक मौसम संकेत के रूप में देखना जरूरी है। आने वाले सप्ताहों में वर्षा और तापमान का वास्तविक रुझान यह तय करेगा कि इस असामान्य मानसूनी मौसम का प्रभाव कितना व्यापक और दीर्घकालिक रहता है।