नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9 और 10 की भाषा शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। बोर्ड ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से नई भाषा व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है। CBSE द्वारा 15 मई 2026 को जारी सर्कुलर के मुताबिक यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा पाठ्यक्रम (NCF-SE) 2023 के तहत किए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 और 10 के सभी छात्रों के लिए तीन भाषाओं-R1, R2 और R3-का अध्ययन अनिवार्य होगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होना जरूरी होंगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप किया गया बदलाव
CBSE ने कहा कि नई भाषा प्रणाली को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसका मकसद छात्रों में भाषाई विविधता को बढ़ावा देना और भारतीय भाषाओं के प्रति समझ विकसित करना है। बोर्ड के अनुसार नई व्यवस्था छात्रों को बहुभाषी शिक्षा से जोड़ने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं के करीब लाने में भी मदद करेगी।
तीन भाषाओं का अध्ययन होगा अनिवार्य
नई नीति के तहत छात्रों को तीन अलग-अलग भाषाओं का अध्ययन करना होगा। इनमें R1, R2 और R3 श्रेणी की भाषाएं शामिल रहेंगी। CBSE ने यह भी स्पष्ट किया है कि तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य रहेगा। यानी छात्रों को विदेशी भाषा चुनने की स्थिति में भी दो भारतीय भाषाएं पढ़नी होंगी।
स्कूलों को जारी किए जाएंगे विस्तृत दिशा-निर्देश
बोर्ड जल्द ही स्कूलों के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगा, जिसमें विषय चयन, परीक्षा प्रणाली और भाषा विकल्पों को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जाएगी। स्कूलों को छात्रों और अभिभावकों को नई व्यवस्था के बारे में जागरूक करने के निर्देश भी दिए जाएंगे, ताकि आगामी सत्र में बदलाव को आसानी से लागू किया जा सके।
छात्रों की भाषाई क्षमता बढ़ाने पर फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि बहुभाषी शिक्षा छात्रों की समझ, संचार क्षमता और बौद्धिक विकास को बेहतर बनाने में मदद करती है। नई नीति के जरिए छात्रों को केवल एक भाषा तक सीमित न रखते हुए उन्हें भारतीय भाषाओं की समृद्ध विरासत से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
जुलाई 2026 से लागू होगी नई व्यवस्था
CBSE के मुताबिक संशोधित भाषा संरचना 1 जुलाई 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। इसके बाद कक्षा 9 और 10 में पढ़ने वाले सभी छात्रों को नई प्रणाली के अनुसार भाषा विषयों का चयन करना होगा। बोर्ड का कहना है कि यह बदलाव शिक्षा व्यवस्था को अधिक लचीला, समावेशी और भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।