केंद्र सरकार ने देश में “असामान्य जनसंख्या परिवर्तन” को लेकर बड़ा कदम उठाया है। इस मुद्दे की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति (High-Level Committee) का गठन किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। सरकार का कहना है कि अवैध घुसपैठ और अन्य कारणों से कुछ क्षेत्रों में जनसंख्या संतुलन प्रभावित हो रहा है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाश नवलकर होंगे अध्यक्ष
इस समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाश प्रभाकर नवलकर को सौंपी गई है। समिति में जनगणना आयुक्त, पूर्व आईएएस अधिकारी दुर्गाशंकर मिश्रा, पूर्व आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और अर्थशास्त्री शमिका रवि को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा गृह मंत्रालय के फॉरेनर्स-1 विभाग के संयुक्त सचिव को सदस्य सचिव बनाया गया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन पर फोकस
सरकार के अनुसार यह मुद्दा केवल जनसंख्या परिवर्तन का नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, सामाजिक ढांचा और सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है। सरकार का मानना है कि कुछ क्षेत्रों में हो रहे बदलावों का दीर्घकालिक प्रभाव देश की एकता और संतुलन पर पड़ सकता है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति पर नजर
केंद्र सरकार का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में अवैध घुसपैठ के कारण जनसंख्या संतुलन प्रभावित हो रहा है। इसी वजह से समिति को विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों की स्थिति का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।
पीएम मोदी की घोषणा के बाद लिया गया कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने संबोधन में “डेमोग्राफिक चेंज मिशन” का उल्लेख किया था। उसी घोषणा को आगे बढ़ाते हुए अब इस हाई-लेवल कमेटी का औपचारिक गठन किया गया है।
समिति का काम क्या होगा?
यह समिति देशभर में जनसंख्या परिवर्तन के पैटर्न का अध्ययन करेगी और विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इसके आधार पर भविष्य में आवश्यक नीतिगत निर्णय लिए जाने की संभावना है।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश की सुरक्षा, सामाजिक संतुलन और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है, ताकि किसी भी प्रकार का जनसंख्या असंतुलन भविष्य में गंभीर समस्या न बने।