नई दिल्ली। भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान को तकनीकी मदद दिए जाने की खबरों पर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सामने आई रिपोर्ट्स पहले से ज्ञात तथ्यों की पुष्टि करती हैं। साथ ही भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवादी ढांचे की रक्षा करने वालों का समर्थन किसी भी देश की अंतरराष्ट्रीय साख को नुकसान पहुंचा सकता है।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि चीन के सरकारी मीडिया में आई रिपोर्ट्स को भारत ने गंभीरता से देखा है। इन रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि मई 2025 में भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव के दौरान चीन ने पाकिस्तान को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई थी। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई एक सटीक और लक्षित कार्रवाई थी, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान समर्थित आतंकी ढांचे को खत्म करना था।
‘जिम्मेदार देशों को सोचना चाहिए’
रणधीर जायसवाल ने कहा कि जो देश खुद को जिम्मेदार वैश्विक शक्ति मानते हैं, उन्हें यह जरूर सोचना चाहिए कि आतंकवादी ढांचे को बचाने वाले प्रयासों का समर्थन उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि और विश्वसनीयता पर क्या असर डालता है। भारत के इस बयान को चीन के लिए एक सख्त कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है।
चीन के सरकारी मीडिया में क्या दावा हुआ?
चीनी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन ने पहली बार स्वीकार किया है कि उसने भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को तकनीकी सहायता दी थी। चीन के सरकारी प्रसारक CCTV ने चीन के विमानन उद्योग निगम AVIC के चेंगदू विमान डिजाइन एवं अनुसंधान संस्थान के इंजीनियर झांग हेंग का इंटरव्यू प्रसारित किया।
AVIC इंजीनियर ने क्या कहा?
हॉन्गकॉन्ग के अखबार South China Morning Post की रिपोर्ट के मुताबिक, झांग हेंग ने बताया कि पिछले साल मई में चार दिन तक चले सैन्य तनाव के दौरान पाकिस्तान को तकनीकी सहायता प्रदान की गई थी। यह संस्थान चीन के आधुनिक लड़ाकू विमानों और ड्रोन तकनीक के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।