छतरपुर के ढोडन बांध क्षेत्र में केन-बेतवा परियोजना के विरोध में चल रहा आंदोलन अब राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बन गया है। उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर धरने पर बैठे आदिवासियों और किसानों से मिलने पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Jitu Patwari के दौरे के बाद कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बैरिकेड तोड़कर आंदोलन स्थल तक पहुंचे कांग्रेस नेताओं के खिलाफ क्या वन विभाग और प्रशासन कोई कदम उठाएगा, इसे लेकर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ढोडन बांध पहुंचे जीतू पटवारी, आंदोलनकारियों से की मुलाकात
छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर बुंदेलखंड में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। परियोजना से प्रभावित आदिवासी, किसान और ग्रामीण उचित मुआवजे तथा पुनर्वास की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। सोमवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Jitu Patwari छतरपुर जिले के ढोडन बांध क्षेत्र पहुंचे और आंदोलनकारियों से मुलाकात की। उनके साथ छतरपुर कांग्रेस विधायक Alok Chaturvedi भी मौजूद रहे। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण चिता पर लेटकर प्रतीकात्मक प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार उनकी जमीनें अधिग्रहित कर रही है, लेकिन बदले में उचित मुआवजा और पुनर्वास की स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई है। इस दौरान जीतू पटवारी ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कांग्रेस उनके संघर्ष में साथ खड़ी है।
बैरिकेड तोड़कर प्रवेश पर उठे सवाल अमित भटनागर मामले के बाद अब कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज
जानकारी के अनुसार कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भुसौर गेट पर लगाए गए बैरिकेड और बेरिकेट पार कर आंदोलन स्थल तक पहुंच बनाई। इसके बाद पूरे घटनाक्रम ने नई चर्चा को जन्म दे दिया है। क्षेत्र में लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब समाजसेवी अमित भटनागर पर कोर एरिया में बिना अनुमति प्रवेश को लेकर मामला दर्ज किया गया था, तो क्या अब इसी तरह की कार्रवाई कांग्रेस नेताओं पर भी होगी। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज है कि क्या पन्ना टाइगर रिजर्व और वन विभाग नियमों को सभी पर समान रूप से लागू करेगा या बड़े नेताओं को राहत मिलेगी। फिलहाल प्रशासन और वन विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन लोगों की नजरें अब अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।