नई दिल्ली: प्रशांत महासागर में बन रहे मजबूत एल नीनो (El Niño) को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चिंता जताई है। ब्रिटेन के Met Office और अमेरिकी NOAA के पूर्वानुमानों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियां एक बेहद शक्तिशाली एल नीनो की ओर इशारा कर रही हैं। इसके चलते भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों का तापमान सामान्य से लगभग 3°C से 3.9°C तक अधिक हो सकता है। वैज्ञानिक आकलनों के मुताबिक, यदि यह स्थिति बनी रहती है तो वैश्विक तापमान में एक और बड़ी छलांग देखने को मिल सकती है और 2027 के सबसे गर्म वर्षों में शामिल होने की आशंका बढ़ सकती है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
एल नीनो का असर भारत के मानसून और कृषि व्यवस्था पर पड़ सकता है। मौसम में बदलाव के कारण जलाशयों, मिट्टी की नमी और फसल उत्पादन पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
रबी फसलों पर असर
कमजोर मानसून की स्थिति में जलाशयों में उपलब्ध पानी और मिट्टी की नमी घट सकती है। इसका असर गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों की बुआई और उत्पादन पर पड़ने की आशंका है।
2027 की गर्मी में हीटवेव का खतरा
अगर एल नीनो का प्रभाव लंबे समय तक बना रहा तो 2027 के वसंत और गर्मियों में भारत के कई हिस्सों में अत्यधिक गर्मी और लू की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे पानी की मांग बढ़ने के साथ कृषि उत्पादन पर भी दबाव पड़ सकता है।
खाद्य महंगाई का भी खतरा
जलवायु में बड़े बदलाव का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रह सकता। चीनी, खाद्य तेल और अनाज जैसी जरूरी वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने पर कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। भारत जैसे बड़े कृषि-निर्भर देश के लिए कमजोर मानसून, कम जल उपलब्धता और बढ़ते तापमान का एक साथ सामना करना खाद्य सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है।
2015-16 के रिकॉर्ड से भी आगे जाने की आशंका
रिपोर्ट में ब्रिटेन के Met Office के जलवायु विशेषज्ञ एडम स्केफ के हवाले से बताया गया है कि 2015-16 का एल नीनो अब तक की सबसे मजबूत घटनाओं में से एक था। उस दौरान समुद्र की सतह के तापमान में लगभग 3°C तक की असामान्य वृद्धि दर्ज की गई थी। मौजूदा पूर्वानुमानों में नवंबर 2026 के आसपास तापमान असामान्यता 3.9°C तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। हालांकि, ऐसे दीर्घकालिक पूर्वानुमानों में अनिश्चितता रहती है और आने वाले महीनों के नए मौसम संबंधी आंकड़े तस्वीर को बदल सकते हैं।
आने वाले महीने होंगे अहम
विशेषज्ञों के मुताबिक, अब निगाहें प्रशांत महासागर के तापमान, मानसूनी गतिविधियों, जलाशयों के स्तर और कृषि परिस्थितियों पर रहेंगी। इन संकेतकों से ही स्पष्ट होगा कि संभावित एल नीनो का भारत की रबी और खरीफ फसलों, खाद्य कीमतों और गर्मी पर वास्तविक असर कितना गंभीर होगा।