क्या इस ब्रह्मांड का कोई अंत है? यदि हम सौरमंडल की सीमाओं को पार कर जाएं, तो आगे क्या मिलेगा?' इन अंतहीन सवालों के जवाब तलाशने के लिए इंसान दशकों से अंतरिक्ष के सीने को चीर रहा है। असीम रहस्यों की खोज के इसी सिलसिले का सबसे बड़ा प्रतीक है नासा (NASA) का रोबोटिक अंतरिक्ष यान वॉयेजर-1 (Voyager 1)। साल 1977 में यानी आज से करीब 49 साल पहले पृथ्वी से रवाना हुआ यह यान इंसानी इतिहास के सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए सुदूर अंतरिक्ष (Deep Space) में लगातार आगे बढ़ रहा है।
रफ्तार ऐसी कि बंदूक की गोली भी शरमा जाए
इंसान ने आज तक वॉयेजर-1 से तेज गति से चलने वाली कोई दूसरी मशीन नहीं बनाई है। यह स्पेसक्राफ्ट आज भी 17 किलोमीटर प्रति सेकंड की हैरतअंगेज रफ्तार से दौड़ रहा है, जो किसी राइफल की बुलेट और ध्वनि की गति (343 मीटर प्रति सेकंड) से भी कई गुना तेज है।
इस अविश्वसनीय गति के बावजूद, ब्रह्मांड की विशालता के आगे यह रफ्तार भी बौनी साबित होती है। आधी सदी का सफर तय करने के बाद भी वॉयेजर-1 'एक प्रकाश वर्ष' (Light Year) के 300वें हिस्से (0.003 प्रकाश वर्ष) तक ही पहुंच सका है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह यान अभी सौरमंडल के मुहाने पर ही खड़ा है, जहां से गहरे अंतरिक्ष के रहस्य शुरू होते हैं।
2500 करोड़ किलोमीटर दूर और नवंबर 2026 का महा-मील का पत्थर
वर्ष 1980 में शनि ग्रह के करीब से गुजरने वाला वॉयेजर-1 इस समय सूर्य से पृथ्वी की दूरी के मुकाबले 170 गुना से भी ज्यादा दूर निकल चुका है। नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) के अनुसार, यह अब सूर्य से लगभग 2500 करोड़ किलोमीटर दूर है। साल 2012 में इसने 'हेलियोपॉज' (Heliopause) को पार किया था, जहां सूर्य से निकलने वाले कणों का प्रभाव खत्म हो जाता है।
एक सबसे बड़ा मील का पत्थर आगामी नवंबर 2026 में आने वाला है, जब वॉयेजर-1 पृथ्वी से 'एक प्रकाश दिन' (One Light Day) की दूरी पर पहुंच जाएगा। इस दूरी पर जाने के बाद पृथ्वी से भेजे गए किसी रेडियो सिग्नल को यान तक पहुंचने में पूरा 1 दिन लगेगा और वहां से जवाब आने में भी 1 दिन का समय लगेगा।
क्या होता है प्रकाश वर्ष (Light Year)?प्रकाश (Light) की गति करीब 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड होती है। इस गति से प्रकाश एक साल में जितनी दूरी तय करता है, उसे 'एक प्रकाश वर्ष' कहते हैं, जो लगभग 9.5 लाख करोड़ किलोमीटर होता है। वॉयेजर-1 की वर्तमान रफ्तार से उसे केवल 1 प्रकाश वर्ष की दूरी तय करने में ही 17 हजार साल लग जाएंगे।
खत्म हो रही है प्लूटोनियम की ताकत, गहरा रहा है सन्नाटा
वॉयेजर-1 को ऊर्जा प्लूटोनियम के थर्मल पावर से मिलती है, जो अब हर साल 4 वाट की दर से कम हो रही है। लॉन्चिंग के समय इसमें 470 वाट की शक्ति थी। बिजली बचाने के लिए नासा के वैज्ञानिक एक-एक करके इसके वैज्ञानिक उपकरणों को बंद कर रहे हैं।
जनवरी 2025: 'कॉस्मिक रे सबसिस्टम' को बंद किया गया।
अप्रैल 2026: 'लो-एनर्जी चार्ज्ड पार्टिकल' सिस्टम को भी ऑफ कर दिया गया।
वर्तमान में इसके केवल दो उपकरण काम कर रहे हैं, जो चुंबकीय क्षेत्र और प्लाज्मा तरंगों की निगरानी कर रहे हैं।
खामोश होकर भी नहीं थमेगा वॉयेजर
आने वाले एक साल में इसकी बची-कुची ऊर्जा भी समाप्त हो जाएगी और इसके सभी उपकरण पूरी तरह डेड हो जाएंगे। इसके बाद यह यान पृथ्वी पर कोई रेडियो सिग्नल नहीं भेज पाएगा। लेकिन, यह थमेगा नहीं। वॉयेजर-1 अनंत अंतरिक्ष के अंधेरे सन्नाटे में 17 किलोमीटर प्रति सेकंड की अपनी तय रफ्तार से आगे बढ़ता रहेगा।
अगले 40 हजार वर्षों में यह 'ग्लिस 445' (Gliese 445) नामक तारे के पास से गुजरेगा। वैज्ञानिकों के पास तब केवल गणितीय आंकड़े (Calculations) होंगे, क्योंकि हमारा यह सबसे पुराना दूत हमेशा के लिए मौन होकर असीम ब्रह्मांड की अनंत यात्रा पर जा चुका होगा।