कोलकाता: पश्चिम बंगाल में गुरुवार, 14 अगस्त को पहली बार राज्य सरकार के आधिकारिक आयोजन के तहत मौलाली युवा केंद्र में 'विभाजन विभीषिका स्मरण दिवस' मनाया गया। स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 1947 के देशभाग, विस्थापन के दर्द और 1946 के 'ग्रेट कलकत्ता किलिंग' के दौरान हुए हिंदू नरसंहार के इतिहास को याद करते हुए जनता को एकजुट रहने का संदेश दिया।
"गोपाल पांठा की वजह से बची कोलकाता में हिंदुओं की मौजूदगी"
मुख्यमंत्री ने 1946 के दंगों के दौरान आम लोगों की रक्षा करने वाले गोपाल मुखोपाध्याय (गोपाल पांठा) के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि यदि उस समय गोपाल मुखोपाध्याय डटकर खड़े न होते, तो इस भूभाग में हिंदुओं का अस्तित्व समाप्त हो जाता। उत्तर कोलकाता में इस कार्यक्रम के आयोजन का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि विभाजन के समय इस क्षेत्र को सबसे अधिक तबाही झेलनी पड़ी थी।
सहरावर्दी रोड का नाम बदलकर 'गोपाल मुखर्जी एवेन्यू' करने पर कसा तंज
कोलकाता में सड़कों के नामकरण पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने 'सहरावर्दी' नाम की सड़क का नाम बदलकर 'गोपाल मुखर्जी एवेन्यू' कर दिया है। उन्होंने इस फैसले पर आपत्ति जताने वाले बुद्धिजीवियों और शोधकर्ताओं पर तंज कसते हुए कहा कि नाम बदलते ही कई तरह के तर्क और शोध सामने आने लगे थे।
राजभवन के प्रस्ताव पर आयोजित हुआ पहली बार सरकारी कार्यक्रम
उल्लेखनीय है कि राज्यपाल आर एन रवि के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार ने इस वर्ष सरकारी स्तर पर विभाजन विभीषिका स्मरण दिवस मनाने का निर्णय लिया था। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना की साजिश और द्वि-राष्ट्र सिद्धांत के कारण देश का बंटवारा हुआ। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश अस्थायी राजनीतिक सीमाओं से विभाजित हुआ हो सकता है, लेकिन भारत की आत्मा सदैव अखंड रही है।