प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने अपने आरक्षित भंडार को बाजार में उतारना शुरू कर दिया है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार, हस्तक्षेप शुरू होने के शुरुआती 10 दिनों में 17 शहरों में करीब 4,000 टन आरक्षित प्याज बेचा गया। सरकार का उद्देश्य उन प्रमुख उपभोग केंद्रों में आपूर्ति बढ़ाना है, जहां मांग और कीमतों में तेजी देखी जा रही है। हालांकि, शुरुआती सरकारी हस्तक्षेप के बावजूद देशभर में औसत खुदरा कीमतों में अभी अपेक्षित गिरावट नहीं आई है।
1.21 लाख टन प्याज का सरकारी भंडार तैयार
सरकार ने 2026-27 के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत प्याज का बड़ा आरक्षित भंडार तैयार किया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक करीब 1.21 लाख टन प्याज की खरीद की जा चुकी है, जबकि चालू वर्ष के लिए कुल खरीद का लक्ष्य 2.00 लाख टन रखा गया है। इस भंडार का इस्तेमाल बाजार में अचानक होने वाली कमी और मौसमी तेजी के समय आपूर्ति बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि पर्याप्त उत्पादन और आरक्षित भंडार के कारण आने वाले महीनों में घरेलू मांग पूरी करने के लिए प्याज की उपलब्धता बनी रहने की उम्मीद है।
35 रुपये किलो में उपभोक्ताओं को प्याज
सरकारी आरक्षित भंडार से निकाले जा रहे प्याज की खुदरा बिक्री 35 रुपये प्रति किलो की दर से की जा रही है। राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ के माध्यम से खुदरा केंद्रों तथा चलित वाहनों पर इसकी बिक्री की जा रही है। दिल्ली-एनसीआर में इसके अलावा केंद्रीय भंडार के माध्यम से भी उपभोक्ताओं तक प्याज पहुंचाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य यह है कि बाजार में सस्ती सरकारी आपूर्ति उपलब्ध होने से निजी कारोबारियों पर भी कीमतें नियंत्रित रखने का दबाव बने।
सड़क और रेल दोनों से तेज हो रही आपूर्ति
आरक्षित प्याज को उत्पादक क्षेत्रों से बड़े उपभोग केंद्रों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने सड़क और रेल, दोनों माध्यमों का इस्तेमाल बढ़ाया है। नासिक से दिल्ली के लिए विशेष मालगाड़ी ‘कांदा एक्सप्रेस’ चलाई गई, जिसके पहले चरण में करीब 453.65 टन प्याज 21 डिब्बों के जरिए राष्ट्रीय राजधानी पहुंचा। इसके बाद चेन्नई, मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी जैसे शहरों के लिए भी रेल मार्ग से आपूर्ति की योजना बनाई गई। सरकार का कहना है कि परिवहन की यह व्यवस्था बाजार की जरूरत के अनुसार तेजी से प्याज पहुंचाने में मदद करेगी।
17 शहरों से बढ़कर 19 शहरों तक पहुंचा अभियान
सरकार ने आरक्षित भंडार की आपूर्ति को शुरुआती चरण के बाद और व्यापक किया है। 1 सितंबर को जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आरक्षित प्याज की आपूर्ति 19 शहरों तक बढ़ाई जा चुकी थी और कांदा एक्सप्रेस के साथ 30 से अधिक ट्रकों को भी इस अभियान में लगाया गया था। इससे साफ है कि सरकार केवल एक-दो महानगरों में आपूर्ति बढ़ाने के बजाय अलग-अलग बड़े उपभोग केंद्रों में उपलब्धता सुधारने की रणनीति पर काम कर रही है। आपूर्ति का दायरा बाजार की स्थिति और कीमतों के अनुसार आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
कीमतों पर दबाव कम करने की कोशिश, लेकिन राहत अभी सीमित
सरकार के हस्तक्षेप का उद्देश्य प्याज की कीमतों में अचानक होने वाली तेजी को रोकना है, लेकिन शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि इसका असर अभी सीमित रहा है। 10 दिनों में करीब 4,000 टन प्याज बाजार में उतारे जाने के बावजूद देश की औसत खुदरा कीमत में वृद्धि दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हस्तक्षेप शुरू होने के समय राष्ट्रीय औसत खुदरा कीमत करीब 48.50 रुपये प्रति किलो थी, जो बाद में बढ़कर 50.79 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकारी आपूर्ति की मात्रा और उसके भौगोलिक विस्तार पर यह तय करने में खास नजर रहेगी कि कीमतों पर वास्तविक असर कितना पड़ता है।
उत्पादन पर्याप्त, फिर भी मौसमी तेजी पर नजर
सरकार के मुताबिक 2025-26 में प्याज का अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख टन रहने की संभावना है, जो पिछले वर्ष के 307.67 लाख टन उत्पादन के लगभग बराबर है। इसके बावजूद अगस्त-सितंबर के दौरान आपूर्ति व्यवस्था, मांग में बदलाव और त्योहारी मौसम जैसे कारणों से कीमतों में अस्थायी तेजी आ सकती है। इसी को देखते हुए सरकार कीमतों और आवक पर लगातार नजर रख रही है। उपभोक्ता मामलों का विभाग देशभर के 579 केंद्रों पर 41 आवश्यक वस्तुओं की कीमतों की दैनिक निगरानी करता है, जिसमें प्याज भी शामिल है।
सरकार की अगली चुनौती बाजार में स्थायी राहत
आरक्षित भंडार से प्याज की बिक्री तत्काल राहत देने का महत्वपूर्ण उपाय है, लेकिन इसका स्थायी असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकारी आपूर्ति कितनी तेजी से उन क्षेत्रों तक पहुंचती है जहां कीमतें अधिक हैं। सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि बाजार की स्थिति के अनुसार आरक्षित भंडार की मात्रा, आपूर्ति केंद्र और वितरण माध्यम बढ़ाए जा सकते हैं। फिलहाल उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि 35 रुपये प्रति किलो की सरकारी बिक्री का असर खुले बाजार की कीमतों पर कब और कितनी तेजी से दिखाई देता है। यदि सरकारी आपूर्ति लगातार बनी रहती है और बाजार में आवक सुधरती है, तो आने वाले दिनों में प्याज की कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद की जा सकती है।