अभनपुर में कांग्रेस नेता का अधिकारी से कथित गाली-गलौज का वीडियो वायरल होने के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत गरमा गई है। मामला सामने आने के बाद अब सवाल सिर्फ अभनपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश में नेताओं और अधिकारियों के बीच बढ़ते टकराव को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस और भाजपा, दोनों खेमों के नेताओं पर अधिकारियों से बदसलूकी, धमकी, गाली-गलौज और मारपीट के आरोप सामने आते रहे हैं।
अभनपुर का वायरल वीडियो बना चर्चा का केंद्र
अभनपुर का वायरल वीडियो एक बार फिर नेता और अफसर के बीच टकराव की सीमा को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। जनप्रतिनिधियों को जनता की आवाज उठाने और अधिकारियों से सवाल करने का अधिकार है, लेकिन अधिकारियों के साथ संवाद की मर्यादा भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल होने की स्थिति में शिकायत, जांच और कानूनी कार्रवाई का रास्ता मौजूद है। ऐसे में गाली-गलौज, धमकी या मारपीट को उचित तरीका नहीं माना जा सकता।
नगर पालिका अध्यक्ष पर अधिकारियों से बदसलूकी का आरोप
दरअसल, अभनपुर नगर पालिका अध्यक्ष उत्रसेन गहिरवारे पर CMO निलेश केरकेट्टा और सब इंजीनियर दुशांत चौहान से गाली-गलौज करने और मारपीट की धमकी देने के आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि बिना काम किए फंड से भुगतान कराने को लेकर अध्यक्ष और अधिकारियों के बीच विवाद हुआ था।
भुगतान को लेकर विवाद, 20 मिनट तक गाली-गलौज का दावा
मामले में आरोप है कि भुगतान के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाया गया। इसके बाद करीब 20 मिनट तक अधिकारियों से गाली-गलौज की गई। इस दौरान अध्यक्ष द्वारा अधिकारियों को करीब 55 बार गाली दिए जाने का दावा भी सामने आया है। हालांकि, मामले से जुड़े सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
छत्तीसगढ़ में पहले भी सामने आते रहे हैं ऐसे मामले
अभनपुर का मामला छत्तीसगढ़ में नेताओं और अधिकारियों के बीच विवाद का कोई पहला उदाहरण नहीं है। प्रदेश में इससे पहले भी कई मौकों पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच विवाद सामने आए हैं। कहीं गाली-गलौज के आरोप लगे, कहीं धमकी देने के वीडियो और ऑडियो वायरल हुए, तो कहीं जनप्रतिनिधि और अधिकारी सीधे आमने-सामने आ गए।
बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
अभनपुर मामले को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोला है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस शासन का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और मामले में कार्रवाई की बात कही। बीजेपी की ओर से इस घटना को लेकर कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों के आचरण पर सवाल उठाए गए हैं।
दीपक बैज का पलटवार, बोले- संयम बरतना होगा
वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों को संयम बरतना चाहिए। हालांकि, उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा के नेता इससे ज्यादा गाली-गलौज करते हैं, लेकिन उनके खिलाफ FIR नहीं होती। इस बयान के बाद मामला एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप की सियासत में बदल गया है।
सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, मर्यादा जरूरी
अभनपुर विवाद के बाद एक बार फिर नेताओं और अधिकारियों के बीच बढ़ते टकराव पर सवाल खड़ा हो गया है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, दोनों ही तरफ से समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। जनप्रतिनिधियों का जनता से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन गाली-गलौज और धमकी किसी भी पक्ष के लिए उचित नहीं मानी जा सकती।
राजनीतिक मतभेद और प्रशासनिक कार्रवाई की अपनी सीमा
लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं और प्रशासनिक कार्रवाई अपनी जगह। जरूरत इस बात की है कि दोनों के बीच संवाद और संस्थागत मर्यादा बनी रहे। अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के लिए शिकायत, जांच और कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि व्यक्तिगत विवाद या दबाव का।
अभनपुर विवाद ने फिर छेड़ी बड़ी बहस
अभनपुर का विवाद अब सिर्फ एक स्थानीय घटना नहीं रह गया है। इसने प्रदेश की राजनीति में नेता-अफसर संबंधों और जनप्रतिनिधियों के आचरण को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। सवाल यही है कि जनता के मुद्दे उठाने और प्रशासन पर दबाव बनाने के बीच आखिर वह रेखा कहां खींची जाए, जिसे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं को पार नहीं करना चाहिए।