देश में बिना डॉक्टर की सलाह के प्रोटीन पाउडर और ओवर-द-काउंटर (OTC) दर्द निवारक दवाओं का बढ़ता सेवन अब एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप लेता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत धीरे-धीरे किडनी और लिवर को नुकसान पहुंचा रही है, जिसका पता अक्सर तब चलता है जब स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है।
सब हेडिंग: किडनी पर छुपा हुआ खतरा
इबुप्रोफेन, नेप्रोक्सन और डाइक्लोफेनाक जैसे NSAIDs का अधिक उपयोग किडनी तक रक्त प्रवाह को कम कर देता है। इससे सूजन और फिल्ट्रेशन क्षमता प्रभावित होती है। यह नुकसान धीरे-धीरे बढ़ता है और अक्सर तब सामने आता है जब किडनी लगभग फेल होने की स्थिति में पहुंच जाती है, इसलिए इसे “साइलेंट किलर” कहा जा रहा है।
सब हेडिंग: लिवर डैमेज का बढ़ता जोखिम
पेनकिलर, खासकर पैरासिटामोल (एसिटामिनोफेन) का लंबे समय तक या अधिक मात्रा में सेवन ड्रग-इंड्यूस्ड लिवर इंजरी का कारण बन सकता है। डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति तीव्र लिवर फेलियर के प्रमुख कारणों में से एक बनती जा रही है, जो समय पर पहचान न होने पर जानलेवा साबित हो सकती है।
सब हेडिंग: प्रोटीन पाउडर का अनियंत्रित सेवन
जिम और फिटनेस ट्रेंड के चलते प्रोटीन पाउडर का उपयोग तेजी से बढ़ा है, लेकिन बिना निगरानी और अत्यधिक सेवन किडनी पर भारी दबाव डालता है। कम पानी पीने के साथ इसका उपयोग प्रोटीन लीकेज (proteinuria) का कारण बन सकता है, जिससे लंबे समय में किडनी डैमेज का खतरा बढ़ जाता है।
सब हेडिंग: मिलावट और जहरीले तत्वों का खतरा
2025 की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि कई प्रोटीन सप्लीमेंट्स में भारी धातुएं जैसे लेड, आर्सेनिक और मरकरी के साथ BPA जैसे केमिकल पाए गए हैं। ये तत्व न केवल किडनी और लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं, बल्कि न्यूरोलॉजिकल समस्याओं और कैंसर के खतरे को भी बढ़ा सकते हैं।
सब हेडिंग: सोशल मीडिया और गलत जानकारी बनी बड़ी वजह
फिटनेस से जुड़ी सोशल मीडिया ट्रेंड्स और अधूरी जानकारी लोगों को बिना विशेषज्ञ सलाह के सप्लीमेंट्स और दवाओं के सेवन के लिए प्रेरित कर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि पेनकिलर को लगातार 3 दिन से ज्यादा बुखार और 10 दिन से ज्यादा दर्द में बिना सलाह के नहीं लेना चाहिए।
शरीर के संकेतों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि किडनी और लिवर की समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है। पैरों या चेहरे में सूजन, झागदार पेशाब, लगातार थकान, उल्टी जैसा महसूस होना या पीलिया जैसे लक्षण गंभीर संकेत हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक है।
बचाव के लिए क्या करें
डॉक्टरों की सलाह है कि प्रोटीन की जरूरत को प्राकृतिक स्रोतों जैसे अंडा, मछली और डेयरी से पूरा किया जाए। साथ ही सप्लीमेंट्स या पेनकिलर का नियमित उपयोग करने वालों को समय-समय पर किडनी फंक्शन टेस्ट (क्रिएटिनिन, eGFR) और लिवर प्रोफाइल जांच करवानी चाहिए, ताकि समय रहते खतरे को रोका जा सके।