Jaipur Ward 111: जयपुर में नगर निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। वार्ड नंबर 111 से पार्टी के उम्मीदवार ज्वाला प्रसाद का नामांकन जिला निर्वाचन अधिकारी ने जांच के बाद खारिज कर दिया है। नामांकन निरस्त होने के बाद अब इस वार्ड में कांग्रेस के चुनावी समीकरण बदल गए हैं। जानकारी के मुताबिक, ज्वाला प्रसाद के खिलाफ चल रहे एक आपराधिक मामले को नामांकन खारिज होने की मुख्य वजह बताया गया है। संबंधित प्रकरण में ऐसी धारा के तहत आरोप तय होने की बात सामने आई है, जिसमें पांच साल से अधिक की सजा का प्रावधान है।
आपराधिक मामले के चलते निरस्त हुआ नामांकन
ज्वाला प्रसाद के खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरण फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। बताया गया है कि मामले में सक्षम अदालत पहले ही अपराध का संज्ञान ले चुकी है और आरोप भी तय किए जा चुके हैं। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान इसी आपराधिक प्रकरण और उसमें तय आरोपों को आधार बनाकर उनकी उम्मीदवारी पर निर्णय लिया गया। इसके बाद जिला निर्वाचन अधिकारी ने वार्ड 111 से दाखिल उनका नामांकन निरस्त कर दिया। इस फैसले के साथ ही ज्वाला प्रसाद अब वार्ड 111 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर आगे नहीं बढ़ सकेंगे।
5 साल से ज्यादा सजा वाली धारा में तय हुए हैं आरोप
सामने आई जानकारी के अनुसार, ज्वाला प्रसाद के खिलाफ जिस मामले में कार्रवाई हुई है, उसमें पांच वर्ष से अधिक सजा वाली धारा के तहत आरोप तय हैं। यही बिंदु नामांकन की जांच के दौरान महत्वपूर्ण माना गया। हालांकि, आपराधिक मामला अभी अदालत में लंबित है और अंतिम न्यायिक फैसला आना बाकी है। ऐसे में नामांकन खारिज होने की कार्रवाई को चुनावी पात्रता से जुड़े नियमों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
कांग्रेस की प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद आया फैसला
जयपुर नगर निगम चुनाव के लिए कांग्रेस ने सोमवार को अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की थी। पार्टी ने जयपुर के 150 वार्डों के लिए प्रत्याशियों के नाम घोषित किए थे। सूची जारी होने के बाद वार्ड 111 से ज्वाला प्रसाद को उम्मीदवार बनाए जाने की तस्वीर साफ हुई थी। लेकिन नामांकन पत्रों की जांच के बाद उनका पर्चा निरस्त होने से अब इस वार्ड में कांग्रेस के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
वार्ड 111 में अब बदलेंगे चुनावी समीकरण
किसी प्रमुख राजनीतिक दल के प्रत्याशी का नामांकन खारिज होने से संबंधित वार्ड में चुनावी मुकाबले की तस्वीर बदलना स्वाभाविक है। वार्ड 111 में कांग्रेस के उम्मीदवार के चुनावी मैदान से बाहर होने के बाद पार्टी की रणनीति पर भी नजर रहेगी। वहीं अन्य प्रत्याशियों के लिए मुकाबले में नए अवसर बन सकते हैं।अब देखना होगा कि कांग्रेस इस स्थिति से कैसे निपटती है और वार्ड में पार्टी के राजनीतिक प्रभाव को बनाए रखने के लिए आगे क्या रणनीति अपनाती है।
टिकट वितरण को लेकर पहले भी सामने आया था विरोध
जयपुर नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस की मुश्किलें केवल नामांकन खारिज होने तक सीमित नहीं रही हैं। प्रत्याशियों की सूची जारी होने से पहले ही पार्टी के अंदर टिकट वितरण को लेकर विरोध के स्वर सामने आए थे। पार्टी कार्यकर्ताओं ने जयपुर जिलाध्यक्ष सुनील शर्मा के आवास का घेराव कर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया था कि टिकट वितरण में बाहरी लोगों और पार्टी से जुड़े कुछ करीबी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। यह प्रदर्शन महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष मंजूलता मीणा के नेतृत्व में किया गया था।
नेताओं के परिवारों को भी टिकट देने पर चर्चा
कांग्रेस की घोषित सूची में पार्टी से जुड़े नेताओं के परिवारों को भी कई जगह टिकट दिए जाने की बात सामने आई है। कुछ वार्डों में पुराने राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए पति की जगह पत्नी को चुनाव मैदान में उतारा गया है। वहीं सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र में पार्टी ने कुछ नए चेहरों पर भी भरोसा जताया है। इस तरह टिकट वितरण के बाद कांग्रेस के भीतर जहां कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली, वहीं अब वार्ड 111 में प्रत्याशी का नामांकन खारिज होने से पार्टी के सामने एक और चुनौती आ गई है।
अब कांग्रेस के सामने क्या चुनौती?
ज्वाला प्रसाद का नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती वार्ड 111 में अपने राजनीतिक समीकरण को संभालने की होगी। चुनावी प्रक्रिया में नामांकन जांच के बाद उम्मीदवारों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होने लगती है। ऐसे में इस वार्ड में कांग्रेस की आगे की रणनीति और पार्टी की ओर से किसी वैकल्पिक राजनीतिक कदम पर सबकी नजर रहेगी।