कोलकाता: स्कूल हॉस्टल में रहने वाले बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। पहले 24 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जबकि आज 6 और बच्चों को अस्पताल ले जाया गया। बातचीत के दौरान स्कूल की प्रधानाध्यापिका अनन्या मजूमदार ने बताया कि डॉक्टरों ने बच्चों की जांच की है और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया है। पानी और भोजन समेत अलग-अलग नमूने जांच के लिए लिए गए हैं। बच्चों में बुखार, शरीर पर रैश, घबराहट और बेचैनी जैसी शिकायतों की बात सामने आई है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बच्चों की तबीयत खराब होने की वजह मिड-डे मील है, पानी है या फिर कोई अन्य कारण। स्कूल प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी की वास्तविक वजह सामने आएगी।
24 बच्चों के बाद 6 और भर्ती, हॉस्टल में मचा हड़कंप
स्कूल की प्रधानाध्यापिका के मुताबिक, बच्चों की तबीयत खराब होने के बाद पहले 24 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद आज 6 और बच्चों को अस्पताल लाया गया। बातचीत में स्कूल प्रशासन की ओर से कुल 33 बच्चों के अस्पताल में होने की जानकारी दी गई है। फिलहाल डॉक्टर इन बच्चों की जांच कर रहे हैं और उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि डॉक्टर खुद मौके पर पहुंचकर बच्चों की जांच कर चुके हैं। फिलहाल किसी नए बच्चे में गंभीर लक्षण सामने आने की जानकारी नहीं है।
बच्चों में बुखार और रैश की शिकायत, बीमारी की वजह साफ नहीं
बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद बुखार और शरीर पर रैश की शिकायतों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कुछ बच्चों में घबराहट और बेचैनी जैसी स्थिति भी बताई गई है। हालांकि, स्कूल की प्रधानाध्यापिका ने कहा कि डॉक्टरों की ओर से अभी तक बीमारी की निश्चित वजह स्कूल प्रशासन को नहीं बताई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मामला सामान्य फूड पॉइजनिंग का होता तो उल्टी, पेट दर्द, दस्त या दूसरी पाचन संबंधी समस्याएं दिखाई दे सकती थीं। लेकिन प्रभावित बच्चों में ऐसे लक्षण बड़े पैमाने पर सामने नहीं आए हैं।
मिड-डे मील पर भी उठे सवाल, 90 स्कूलों में जाता है खाना
बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद मिड-डे मील को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्कूल प्रशासन के मुताबिक, यहां से तैयार होने वाला भोजन करीब 90 स्कूलों तक पहुंचाया जाता है। प्रधानाध्यापिका ने सवाल उठाया कि अगर भोजन में किसी तरह की गड़बड़ी होती तो दूसरे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आ सकती थीं। फिलहाल दूसरे स्कूलों से ऐसी किसी बड़ी समस्या की जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, केवल इस आधार पर भोजन को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता, इसलिए खाद्य विभाग ने खाने के नमूने जांच के लिए लिए हैं।
पानी की टंकी की सफाई को लेकर अभिभावकों ने लगाए गंभीर आरोप
मामले के बाद बच्चों के अभिभावकों ने हॉस्टल की पानी की टंकी की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। अभिभावकों का आरोप है कि टंकी की ठीक तरीके से सफाई नहीं होती और वहां गंदगी रहती है। उनका यह भी कहना है कि बच्चों को पहले भी बुखार और शरीर पर रैश जैसी समस्याएं होती रही हैं। अभिभावकों के अनुसार, इन शिकायतों को पहले गंभीरता से नहीं लिया गया। अब जब एक साथ बड़ी संख्या में बच्चे बीमार पड़े हैं, तो पानी की गुणवत्ता को लेकर भी जांच की मांग तेज हो गई है।
साल में दो बार टंकी की सफाई का दावा, एक बार हो चुकी है सफाई
प्रधानाध्यापिका अनन्या मजूमदार ने पानी की टंकी की सफाई को लेकर स्कूल प्रशासन का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि नियम के अनुसार टंकी की सफाई साल में दो बार की जाती है। उनके मुताबिक, इस साल एक बार टंकी की सफाई की जा चुकी है, जबकि दूसरी बार की सफाई अभी बाकी है। उन्होंने माना कि निर्धारित दूसरी सफाई अभी नहीं हुई है। हालांकि, उन्होंने पानी को बच्चों की बीमारी का कारण मानने पर सवाल उठाते हुए कहा कि हॉस्टल के अलावा डे-स्कॉलर बच्चे और स्कूल के कर्मचारी भी इसी पानी का इस्तेमाल करते हैं।
स्कूल प्रशासन का तर्क- पानी से समस्या होती तो दूसरे लोग भी बीमार पड़ते
प्रधानाध्यापिका ने कहा कि हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के अलावा डे-स्कॉलर विद्यार्थी और स्कूल का स्टाफ भी उसी पानी का इस्तेमाल करता है। उनके मुताबिक, अगर पानी ही बीमारी की वजह होता तो सिर्फ हॉस्टल के बच्चों तक समस्या सीमित नहीं रहती और दूसरे लोगों में भी इसी तरह के लक्षण दिखाई देते। हालांकि, स्कूल प्रशासन का यह तर्क जांच का अंतिम निष्कर्ष नहीं है। पानी के नमूनों की प्रयोगशाला जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पानी पीने योग्य था या उसमें किसी तरह का संक्रमण मौजूद था।
स्वास्थ्य विभाग और जल परीक्षण विभाग ने लिए नमूने
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्कूल पहुंचकर बच्चों की जांच की। इसके साथ ही सरकारी जल परीक्षण विभाग की टीम ने पानी के नमूने एकत्र किए हैं। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने भी स्कूल में तैयार होने वाले भोजन के नमूने जांच के लिए लिए। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि अलग-अलग सरकारी विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं और जरूरी नमूने एकत्र किए। अब इन नमूनों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट सामने आने के बाद बीमारी के कारण को लेकर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट होने की उम्मीद है।
डॉक्टरों ने बच्चों की जांच की, नए मामलों की जानकारी नहीं
प्रधानाध्यापिका के मुताबिक, डॉक्टर खुद बच्चों की जांच कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल 33 बच्चों के बाद किसी नए बच्चे में इस तरह के लक्षण सामने आने की जानकारी नहीं है। बच्चों को आवश्यक चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। स्कूल प्रशासन का कहना है कि किसी बच्चे की तबीयत खराब होने पर उसे इलाज से वंचित नहीं रखा जाता और जरूरत पड़ने पर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जाता है। फिलहाल प्रशासन बच्चों की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।
हॉस्टल में 79 विद्यार्थी, 33 अस्पताल में
स्कूल की प्रधानाध्यापिका ने बताया कि हॉस्टल में कुल 79 विद्यार्थी रह रहे थे। इनमें से 33 बच्चों के अस्पताल में होने की जानकारी दी गई है, जबकि बाकी बच्चे हॉस्टल में मौजूद हैं। फिलहाल बाकी विद्यार्थियों की भी निगरानी की जा रही है, ताकि किसी अन्य बच्चे में लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके। स्कूल प्रशासन का कहना है कि डॉक्टरों की जांच के बाद फिलहाल किसी नए गंभीर मामले की जानकारी नहीं मिली है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की निगरानी भी जारी है।
हॉस्टल का संचालन ‘समुद्र शिक्षा मिशन’ कर रहा
प्रधानाध्यापिका ने बताया कि हॉस्टल का संचालन फिलहाल ‘समुद्र शिक्षा मिशन’ नामक संस्था द्वारा किया जा रहा है। इससे पहले हॉस्टल का संचालन किसी अन्य गैर-सरकारी संगठन के पास था, जिसे बाद में बदल दिया गया। प्रधानाध्यापिका के अनुसार, हॉस्टल से जुड़ी कई व्यवस्थाओं की देखरेख संबंधित संस्था करती है। हालांकि, हॉस्टल स्कूल से जुड़ा होने के कारण स्कूल प्रशासन भी बच्चों की स्थिति पर नजर रखता है। बच्चों के स्वास्थ्य और साफ-सफाई को लेकर उठे सवालों के बीच अब संस्था की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
घर से संक्रमण आने की संभावना से भी इनकार नहीं
रैश और बुखार की शिकायतों को लेकर प्रधानाध्यापिका ने एक और संभावना की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि हॉस्टल में रहने वाले बच्चे समय-समय पर अपने घर भी जाते हैं और वहां से किसी तरह का संक्रमण साथ आने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, यह केवल एक संभावित कारण है और इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है। डॉक्टरों की जांच और नमूनों की रिपोर्ट के बाद ही यह पता चल पाएगा कि बच्चों में लक्षण किस वजह से आए। स्कूल प्रशासन ने इस संभावना को जांच के एक हिस्से के तौर पर रखा है।
असली वजह जानने के लिए जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल बच्चों की तबीयत बिगड़ने की असली वजह सामने नहीं आई है। पानी की गुणवत्ता, मिड-डे मील, हॉस्टल की स्वच्छता और संभावित संक्रमण- सभी पहलुओं पर सवाल उठ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग, जल परीक्षण विभाग और खाद्य विभाग की ओर से नमूने लिए जा चुके हैं। स्कूल प्रशासन का कहना है कि डॉक्टरों ने बच्चों की जांच की है और फिलहाल किसी नए गंभीर मामले की जानकारी नहीं है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिसके आधार पर यह साफ होगा कि आखिर बच्चों की तबीयत एक साथ क्यों बिगड़ी।