कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को इस्कॉन के संस्थापक-आचार्य श्रील अभय चरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की 130वीं जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए श्रील प्रभुपाद के आध्यात्मिक योगदान और कृष्ण भक्ति के प्रचार में उनकी भूमिका को याद किया।
महामंत्र का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अपने संदेश में “हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे” महामंत्र का उल्लेख किया। उन्होंने श्रील प्रभुपाद को ऐसे महान संत के रूप में स्मरण किया, जिन्होंने कृष्ण भक्ति और हरे कृष्ण महामंत्र को विश्वभर में पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
कोलकाता में हुआ था श्रील प्रभुपाद का जन्म
श्रील प्रभुपाद का जन्म 1 सितंबर 1896 को कोलकाता में हुआ था। वर्ष 1922 में उनकी मुलाकात आध्यात्मिक गुरु श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर से हुई। गुरु के मार्गदर्शन के बाद उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के संदेश और वैदिक ज्ञान के प्रचार को अपने जीवन का प्रमुख उद्देश्य बनाया।
अमेरिका जाकर शुरू किया कृष्ण भक्ति का वैश्विक प्रचार
वर्ष 1965 में श्रील प्रभुपाद अमेरिका पहुंचे और इसके अगले वर्ष 1966 में न्यूयॉर्क में इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्ण कॉन्शसनेस (ISKCON) की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने दुनिया के विभिन्न देशों में कृष्ण भक्ति का प्रचार किया और बड़ी संख्या में लोगों को वैदिक आध्यात्मिक परंपरा से जोड़ा।
धार्मिक ग्रंथों के जरिए पहुंचाया कृष्ण भक्ति का संदेश
श्रील प्रभुपाद ने भगवद्गीता और श्रीमद्भागवत समेत कई महत्वपूर्ण ग्रंथों के माध्यम से कृष्ण भक्ति और वैदिक ज्ञान का संदेश जन-जन तक पहुंचाया। 14 नवंबर 1977 को वृंदावन में उनका निधन हुआ। उनकी आध्यात्मिक विरासत आज भी दुनिया भर में इस्कॉन और कृष्ण भक्तों के माध्यम से आगे बढ़ रही है।