मध्यप्रदेश सरकार श्रमिक परिवारों के मेधावी बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में आर्थिक मदद देने के लिए ‘श्री मेधा योजना’ शुरू करने जा रही है। इस योजना का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर देना है, जो पढ़ाई में अच्छे हैं, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण महंगी कोचिंग का खर्च उठाने में परेशानी का सामना करते हैं। योजना के तहत NEET, JEE और CLAT जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार ने शुरुआती चरण में 600 मेधावी विद्यार्थियों को योजना में शामिल करने का लक्ष्य रखा है।
80 फीसदी से ज्यादा अंक वाले छात्रों को मिलेगा मौका
‘श्री मेधा योजना’ के तहत विद्यार्थियों के चयन में उनकी शैक्षणिक योग्यता को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। 80 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले छात्रों को योजना के लिए चयनित किया जाएगा। इससे उन श्रमिक परिवारों के बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बेहतर अवसर मिल सकेगा, जो अच्छे अंक हासिल करने के बावजूद आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों में दाखिला नहीं ले पाते।
पहले चरण में 600 बच्चों को किया जाएगा शामिल
योजना की शुरुआत सीमित संख्या में विद्यार्थियों के साथ की जाएगी। पहले चरण में कुल 600 बच्चों को इसका लाभ देने की योजना है।
इनमें:
500 बच्चे निर्माण श्रमिक बोर्ड से चुने जाएंगे।
100 बच्चे श्रमिक कल्याण बोर्ड से चयनित होंगे।
इस तरह सरकार श्रमिक परिवारों के मेधावी विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए लक्षित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने जा रही है।
हर महीने ₹7,500 की आर्थिक मदद
योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि चयनित विद्यार्थियों को हर महीने 7,500 रुपये की सहायता दी जाएगी। इस राशि का इस्तेमाल विद्यार्थी अपनी कोचिंग फीस और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी से जुड़ी अन्य जरूरतों के लिए कर सकेंगे। NEET और JEE जैसी परीक्षाओं में कोचिंग, अध्ययन सामग्री और दूसरी शैक्षणिक जरूरतों पर होने वाला खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होता है। ऐसे में नियमित आर्थिक सहायता विद्यार्थियों को अपनी तैयारी जारी रखने में मदद कर सकती है।
NEET, JEE और CLAT की तैयारी करने वाले छात्रों को फायदा
‘श्री मेधा योजना’ का दायरा प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों तक रखा गया है। इसमें NEET, JEE और CLAT जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। NEET के जरिए विद्यार्थी मेडिकल क्षेत्र में प्रवेश का लक्ष्य रखते हैं, जबकि JEE के माध्यम से इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिले का रास्ता खुलता है। वहीं CLAT कानून की पढ़ाई के लिए प्रमुख प्रवेश परीक्षा है। ऐसे में योजना के जरिए अलग-अलग करियर विकल्प चुनने वाले मेधावी छात्रों को आर्थिक सहारा मिलेगा।
आर्थिक परेशानी प्रतिभा के रास्ते में नहीं बनेगी बाधा
सरकार की इस पहल का फोकस श्रमिक परिवारों के उन बच्चों पर है, जिनमें पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ने की क्षमता है। आर्थिक सहायता मिलने से ऐसे विद्यार्थियों को अपनी तैयारी के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। पहले चरण में 600 छात्रों को शामिल किए जाने के बाद योजना का दायरा आगे बढ़ता है या नहीं, यह सरकार के आगामी निर्णयों पर निर्भर करेगा।