कोलकाता : फालता विधानसभा पुनर्निर्वाचन के नतीजों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है। भाजपा की इस प्रचंड जीत को केवल एक चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के कथित “डायमंड हार्बर मॉडल” की अस्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से यह इलाका तृणमूल कांग्रेस सांसद Abhishek Banerjee का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।
भाजपा ने हिंसा और डर की राजनीति को मुद्दा बनाया
भाजपा नेताओं ने दावा किया कि फालता में वर्षों तक विपक्षी कार्यकर्ताओं को खुलकर राजनीति करने की अनुमति नहीं थी। पार्टी के अनुसार, भाजपा समर्थकों पर हमले, राजनीतिक हिंसा और भय का माहौल यहां आम बात बन चुकी थी। भाजपा ने अपनी जीत को “लोकतंत्र की वापसी” बताया है।
पार्टी का कहना है कि इस बार लोगों ने बिना डर के मतदान किया और जनता ने हिंसा तथा राजनीतिक दबाव की राजनीति को नकार दिया।
2024 लोकसभा चुनाव का भी हुआ जिक्र
भाजपा नेताओं ने 2024 लोकसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कई बूथों पर ईवीएम में भाजपा के चुनाव चिन्ह को ढकने की शिकायतें सामने आई थीं। उसी चुनाव में डायमंड हार्बर लोकसभा सीट पर Abhishek Banerjee को भारी बढ़त मिली थी।
हालांकि इस बार फालता विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की भारी जीत ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। भाजपा का दावा है कि जनता ने पिछले चुनावों की घटनाओं का जवाब वोट के जरिए दिया है।
चुनाव प्रचार में पहली बार दिखी खुली राजनीतिक गतिविधि
इस चुनाव की एक बड़ी खासियत यह रही कि विपक्षी दलों ने भी खुलकर प्रचार किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, वामपंथी उम्मीदवारों ने भी माना कि वर्षों बाद उन्हें बिना भय के प्रचार करने का अवसर मिला। भाजपा ने इसे लोकतांत्रिक माहौल की वापसी बताया।
TMC उम्मीदवारों पर भी उठे सवाल
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने इस चुनाव में आक्रामक प्रचार से दूरी बनाए रखी। वहीं चुनाव प्रक्रिया के दौरान विवादों में रहे जहांगीर खान के मतदान से 48 घंटे पहले नाम वापस लेने को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बंगाल की राजनीति में बदलाव का संकेत?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फालता का परिणाम आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए बड़ा संकेत हो सकता है। भाजपा ने दावा किया कि यह जीत केवल एक सीट की जीत नहीं, बल्कि राज्य में “परिवर्तन की शुरुआत” है।
भाजपा समर्थकों के बीच इस जीत को लेकर भारी उत्साह देखा गया और कार्यकर्ताओं ने इसे “लोकतंत्र की जीत” करार दिया।