हावड़ा: हावड़ा स्टेशन और उसके आसपास के इलाकों में हाल ही में प्रशासन द्वारा चलाए गए बड़े पैमाने पर अतिक्रमण विरोधी अभियान (Eviction Drive) का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। हालांकि, कोर्ट ने इस बेदखली प्रक्रिया पर स्थगन आदेश (Stay Order) जारी कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद हॉकर दोबारा अपनी दुकानें लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। नतीजतन, हावड़ा स्टेशन से रोज़ाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों को लंबे समय बाद भीड़ और ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिली है।
पहले हावड़ा स्टेशन के न्यू कॉम्प्लेक्स, पुराने टैक्सी स्टैंड से सटे इलाके, बस स्टैंड के सामने के फुटपाथ और सब-वे के पास सैकड़ों अस्थायी दुकानें सजती थीं। आरोप था कि इन दुकानों की वजह से पैदल चलने वालों के लिए रास्ता ही नहीं बचता था। खासकर ऑफिस के समय यात्रियों की भारी भीड़ के दौरान फुटपाथ पूरी तरह ब्लॉक हो जाते थे। रेल यात्रियों की शिकायत थी कि उन्हें स्टेशन के अंदर जाने और बाहर निकलने के लिए भी भारी मशक्कत करनी पड़ती थी।
माहौल अभी भी खाली, यात्रियों ने ली राहत की सांस
कुछ हफ्ते पहले जब प्रशासन का बुलडोजर और डामोलिशन दस्ता यहाँ पहुंचा, तो देखते ही देखते पूरे स्टेशन परिसर को खाली करा दिया गया। इसके बाद यह मामला अदालत पहुंचा, जहां से हॉकरों को फौरी राहत देते हुए कार्रवाई पर रोक लगा दी गई। कोर्ट के इस आदेश के बावजूद शनिवार सुबह हावड़ा स्टेशन का नजारा पूरी तरह बदला हुआ था। जहाँ कभी दुकानों की लंबी कतारें होती थीं, वे जगहें आज भी खाली पड़ी हैं।
बर्धमान जाने वाले एक दैनिक यात्री सौमेन मुखोपाध्याय ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा: "पहले स्टेशन में घुसना एक जंग जैसा था। पूरा फुटपाथ हॉकरों के कब्जे में रहता था। अब कम से कम पैदल चलने की जगह मिल रही है, जिससे हम जैसे यात्रियों को बहुत सुविधा हुई है।"वहीं, एक अन्य महिला यात्री मधुमिता दास ने कहा कि शाम के समय इतनी भीड़ हो जाती थी कि छोटे बच्चों को लेकर यहाँ से गुजरना नामुमकिन था, लेकिन अब स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में है।
हॉकर क्यों डर रहे हैं दोबारा दुकान लगाने से?
अदालत से राहत मिलने के बाद भी हॉकर दोबारा अपनी चौकियां लगाने से कतरा रहे हैं। हॉकरों का कहना है कि कोर्ट का स्टे तो है, लेकिन प्रशासन का अगला कदम क्या होगा, यह साफ नहीं है।
एक हॉकर ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा: "कोर्ट ने स्टे ऑर्डर दिया है यह सच है, लेकिन पुलिस और प्रशासन हमें दोबारा कब हटा देगा, कोई नहीं जानता। कोई भी हमें खुलकर कुछ नहीं बता रहा है, इसलिए हम अभी दोबारा दुकान सजाकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहते।"
एक अन्य हॉकर ने बताया कि रोज़ी-रोटी के लिए दुकान लगाना जरूरी है, लेकिन अगर हर दिन दुकान टूटने का डर रहेगा, तो माल कहाँ रखेंगे? हॉकर यूनियन के एक सदस्य ने जानकारी दी कि कोर्ट के आदेश की प्रमाणित कॉपी (Certified Copy) मिलने के बाद ही वे अगला कदम तय करेंगे और इस विषय पर प्रशासन से बातचीत करने की कोशिश भी की जा रही है।
स्थायी समाधान: आजीविका और सुविधा के बीच संतुलन जरूरी
हावड़ा स्टेशन देश के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक है, जहाँ हर दिन लाखों लोगों की आवाजाही होती है। स्थानीय निवासियों और यात्रियों का मानना है कि स्टेशन परिसर को अतिक्रमण मुक्त रखना सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से बेहद जरूरी है।
हालांकि, यात्रियों के एक बड़े वर्ग का यह भी कहना है कि हॉकरों के पुनर्वास (Rehabilitation) की व्यवस्था करके ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए, क्योंकि हज़ारों परिवारों की जीविका इसी पर निर्भर है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट के इस आदेश के बाद आने वाले दिनों में प्रशासन क्या रुख अपनाता है।