राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की जांच में एक बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि अमेरिका में बना GoPro कैमरा, जिसे आधिकारिक तौर पर चीन भेजा गया था, आखिरकार लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों तक कैसे पहुंचा। सूत्रों के मुताबिक यह हाई-टेक कैमरा उन आतंकियों के पास से बरामद हुआ था, जिन्हें पिछले साल जुलाई में डाचीगाम जंगल में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में मार गिराया था। जांच एजेंसियों का दावा है कि यही आतंकी 22 अप्रैल 2025 को बैसरन मैदान में हुए हमले में शामिल थे, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी।
हमले की रिकॉर्डिंग के लिए इस्तेमाल हो रहा था कैमरा
जांच में सामने आया है कि आतंकी हमलों को रिकॉर्ड करने और बाद में प्रोपेगेंडा सामग्री तैयार करने के लिए GoPro कैमरे का इस्तेमाल कर रहे थे। NIA की तकनीकी जांच में पता चला कि यह कैमरा अमेरिका की GoPro Inc कंपनी से चीन स्थित एक अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर को भेजा गया था। इसके बाद एजेंसी ने कैमरे की सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच शुरू कर दी।
चीन से पाकिस्तान और फिर आतंकियों तक पहुंचा डिवाइस
जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि कैमरा संभवतः चीन से पाकिस्तान पहुंचा और वहां से आतंकी नेटवर्क के जरिए कश्मीर में सक्रिय आतंकियों तक पहुंचाया गया। एजेंसियां इस एंगल की भी जांच कर रही हैं कि कहीं यह उपकरण पाकिस्तान की सेना या उससे जुड़े नेटवर्क के जरिए तो उपलब्ध नहीं कराया गया था। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, “चार्जशीट में फिलहाल हमले की ऑपरेशनल डिटेल्स शामिल हैं, लेकिन कैमरे के जरिए जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच अभी जारी है।”
चीन से जानकारी जुटाना बड़ी चुनौती
अधिकारियों के अनुसार भारत और चीन के बीच Mutual Legal Assistance Treaty (MLAT) नहीं होने के कारण इस मामले में कानूनी सहायता हासिल करना आसान नहीं है। इसी वजह से NIA अब विदेश मंत्रालय और अन्य एजेंसियों के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानकारी जुटाने में लगी हुई है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सामने आए सुराग
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन मैदान में आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला किया था। इस हमले के बाद भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया, जिसके तहत पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। बाद में सुरक्षाबलों ने डाचीगाम जंगलों में मुठभेड़ के दौरान तीन आतंकियों को मार गिराया। उनकी पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी के रूप में हुई।
चीनी मूल की AK-47 भी बरामद
जांच एजेंसियों के मुताबिक हमले की जगह और मुठभेड़ स्थल से बरामद AK-47 राइफलें भी चीनी मूल की पाई गई हैं। इससे विदेशी हथियारों और लॉजिस्टिक सपोर्ट के नेटवर्क को लेकर जांच और तेज हो गई है। NIA ने इस मामले में दो स्थानीय लोगों बशीर अहमद जोठात और परवेज अहमद को भी आरोपी बनाया है। आरोप है कि इन दोनों ने आतंकियों को खाना, कंबल, तिरपाल और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया था।
CCTV खराब होने से बढ़ी मुश्किलें
प्रारंभिक जांच में एक संदिग्ध वाहन पहलगाम से बाहर जाता दिखाई दिया था, लेकिन इलाके के कई CCTV कैमरे खराब होने के कारण आतंकियों की मूवमेंट को ट्रैक करने में दिक्कतें आईं। NIA ने लश्कर-ए-तैयबा के कथित कमांडर साजिद जट्ट उर्फ साजिद जुत्त के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी अब इस पूरे मॉड्यूल के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट की जांच कर रही है।