कोलकाता: 16 अगस्त 1946 को हुए डायरेक्ट एक्शन डे की बरसी के संदर्भ में आयोजित कार्यक्रम में आर.एन रवि ने भारत की सभ्यतागत विरासत, राष्ट्रीय एकता और आंतरिक चुनौतियों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी प्रेम, करुणा, मित्रता और अहिंसा की परंपरा में है, लेकिन इस सभ्यता की रक्षा के लिए देश का मजबूत होना भी जरूरी है। अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं को इतिहास से सीख लेने और देश की एकता को कमजोर करने वाली ताकतों के प्रति सतर्क रहने का संदेश दिया।
भारत की सभ्यता प्रेम और अहिंसा पर आधारित
आर.एन रवि ने कहा कि भारत की सभ्यता नफरत के आधार पर नहीं बनी है। भारत की पहचान प्रेम, करुणा, सार्वभौमिक भाईचारे और अहिंसा से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि अहिंसा केवल शब्दों और कार्यों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विचारों में भी इसका पालन होना चाहिए। उनके अनुसार, समाज में वर्ग संघर्ष और नफरत पैदा करने वाली विचारधाराएं भारत की मूल सभ्यतागत भावना के विपरीत हैं। उन्होंने माओवादी विचारधारा का उल्लेख करते हुए इसे राष्ट्र और भारत की सभ्यता के लिए चुनौती बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि देश की एकता को कमजोर करने वाली सोच से सावधान रहना जरूरी है।
‘सभ्यता को जीवित रखने के लिए भारत का मजबूत होना जरूरी’
आरएन रवि ने कहा कि सनातन दर्शन को शाश्वत और अविनाशी माना जाता है, लेकिन भारत उसका भौतिक और सभ्यतागत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि यह भौतिक स्वरूप कमजोर पड़ सकता है और इसलिए इसकी रक्षा आवश्यक है। अपने संबोधन में उन्होंने भारत के इतिहास में हुए विभिन्न आक्रमणों और विभाजनकारी घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इतिहास को केवल भूलने के बजाय उससे सीखना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी भी सभ्यता के अस्तित्व के लिए उसकी सुरक्षा और मजबूती जरूरी है। उन्होंने देश को इतना मजबूत बनाने पर जोर दिया कि कोई भी बाहरी ताकत भारत की ओर गलत नजर से देखने की हिम्मत न करे।
1946 के डायरेक्ट एक्शन डे को याद रखने की अपील
आरएन रवि ने 16 से 19 अगस्त 1946 के बीच हुई हिंसा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना को गंभीरता से समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस दौर की घटनाओं को केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। युवा पीढ़ी को यह समझना चाहिए कि अतीत में समाज और देश ने किस तरह की परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने इस घटना को सभ्यतागत चुनौती के रूप में देखते हुए इसके प्रभावों को याद रखने की बात कही। उनके अनुसार, इतिहास की पीड़ा को समझना भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने में मदद करता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अतीत को समझकर देश की एकता और मूल्यों की रक्षा के लिए आगे आएं।
‘भारत को अंदरूनी दुश्मनों से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत’
आरएन रवि ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को बाहरी दुश्मनों से ज्यादा अंदरूनी चुनौतियों को लेकर सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश के बाहर मौजूद खतरों से निपटने के लिए भारत की सैन्य क्षमता मजबूत है। उन्होंने परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की क्षमताओं का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, भारत की सैन्य और रणनीतिक क्षमता किसी भी गंभीर बाहरी हमले को रोकने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि असली चुनौती उन ताकतों से है जो देश के भीतर विभाजन और संघर्ष पैदा कर सकती हैं। ऐसे तत्वों को पहचानने और उनके प्रति सतर्क रहने की जरूरत है।
‘भारत की एकता को कमजोर करने वाली विचारधाराओं से सावधान रहें’
आरएन रवि ने कहा कि समाज में नफरत और असहिष्णुता फैलाने वाली विचारधाराओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने ऐसे बयानों और गतिविधियों का उल्लेख किया जो समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच दूरी पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता अलग-अलग समुदायों के बीच मेल-जोल और सह-अस्तित्व की भावना पर आधारित रही है। किसी भी तरह की नफरत को भारत की सभ्यतागत परंपरा में जगह नहीं दी जा सकती। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे समाज में विभाजन पैदा करने वाली सोच को पहचानें। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने पर जोर दिया।
चीन की ‘शताब्दी की अपमान’ की अवधारणा का दिया उदाहरण
अपने संबोधन में आरएन रवि ने चीन के इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विद्यार्थियों को ‘शताब्दी की अपमान’ की अवधारणा के बारे में पढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि चीन अपने इतिहास में हुए संघर्षों और विदेशी आक्रमणों को विस्तार से याद रखता है। उन्होंने नानकिंग में हुई हिंसा का भी संदर्भ दिया और कहा कि इतिहास के दर्दनाक अध्यायों को छिपाने के बजाय उनसे सीखना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने भारत में 1946 की घटनाओं को भी गंभीरता और संवेदनशीलता से समझने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इतिहास की घटनाओं को याद रखने का उद्देश्य बदले की भावना पैदा करना नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के प्रति समाज को जागरूक करना होना चाहिए। उन्होंने युवाओं को इतिहास से सबक लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संदेश दिया।
‘भारत सभ्यतागत जागरण के दौर से गुजर रहा है’
आरएन रवि ने कहा कि भारत आज केवल विज्ञान, तकनीक और आर्थिक समृद्धि के क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ रहा है, बल्कि एक व्यापक सभ्यतागत जागरण के दौर से भी गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि इस जागरण के साथ देश को अपनी सभ्यतागत विरासत और मूल्यों के प्रति भी जागरूक रहना होगा। उन्होंने कहा कि विकास के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक एकता भी जरूरी है। उनके मुताबिक, भारत की प्रगति को कमजोर करने वाली किसी भी चुनौती को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने युवाओं को इस परिवर्तन का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने भरोसा जताया कि युवा पीढ़ी देश की जिम्मेदारी को समझते हुए भारत को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
युवाओं से देश की जिम्मेदारी संभालने की अपील
आरएन रवि ने कहा कि आने वाले समय में देश की सुरक्षा और भविष्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर होगी। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अतीत की घटनाओं को समझें और उनसे सबक लें। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भविष्य की चुनौतियों को समय रहते नहीं समझा गया तो वे गंभीर रूप ले सकती हैं। उन्होंने कहा कि देश को मजबूत बनाने के लिए नागरिकों में जागरूकता, एकता और राष्ट्रीय भावना जरूरी है। उन्होंने युवाओं को भारत की सभ्यता और उसके मूल्यों की रक्षा के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि देश का भविष्य युवा पीढ़ी के सुरक्षित और जिम्मेदार हाथों में है।