पश्चिम बंगाल: विधानसभा का सत्र विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और शिक्षकों के तबादले से जुड़े संशोधन विधेयक को लेकर पूरी तरह से सियासी संग्राम के मैदान में बदल गया। विधेयक के समर्थन में बोलते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विपक्षी सदस्यों के हमलों का करारा जवाब दिया और वामपंथी विचारधारा से जुड़े प्राध्यापकों तथा कर्मचारियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने राज्य में राष्ट्रीयता, एक शिक्षा नीति और प्रशासनिक अनुशासन लागू करने पर जोर देते हुए साफ चेतावनी दी कि राष्ट्र विरोधी गतिविधियों या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले किसी भी कृत्य के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कमजोर विश्वविद्यालयों को मजबूत करने के लिए तबादला नीति
मुख्यमंत्री ने पुराने स्थापित विश्वविद्यालयों के शिक्षकों की मेधा का लाभ नए और उभरते शिक्षण संस्थानों को देने की वकालत की। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जादवपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (JUTA) के नेताओं और वामपंथी सोच वाले प्राध्यापकों का इतिहास सब जानते हैं। जब वे अंतर्राष्ट्रीय विचारों, समाजवाद और समानता की बात करते हैं, तो फिर उन्हें राज्य के नए और कमजोर विश्वविद्यालयों में जाकर वहां के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में आपत्ति क्यों होनी चाहिए? उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से नए विश्वविद्यालयों का तेजी से विकास होगा।
संवैधानिक शक्तियों और अन्य राज्यों का दिया उदाहरण
विधेयक की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि शिक्षा भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची (Concurrent List) के क्रम संख्या 25 के अंतर्गत आती है। अतः राज्य विधानसभा को इस विषय पर कानून बनाने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी केंद्रीय कानून या पुरानी नियमावली से टकराव होता है, तो राज्य विधायिका द्वारा पारित नया कानून ही प्रभावी माना जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने उल्लेख किया कि कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात और बिहार जैसे राज्यों में भी कुलपतियों और राज्य सरकार के पास तबादले का अधिकार मौजूद है।
जादवपुर विश्वविद्यालय और 'कश्मीर मांगे आजादी' पर कड़ी चेतावनी
मुख्यमंत्री ने जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में पूर्व में लगी 'कश्मीर मांगे आजादी' और 'फ्री पैलेस्टाइन' जैसी पोस्टरों व नारेबाजी की घटनाओं पर अत्यंत कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ऋषी अरविंद के नाम पर बने संस्थान में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण जुलूस निकालने के लिए पुलिस की अनुमति और राष्ट्रीय ध्वज अनिवार्य होगा। देश की संप्रभुता के खिलाफ बोलने वालों को गांधीवादी तरीके से नहीं, बल्कि कानून की सख्त भाषा में जवाब दिया जाएगा।
माओवादी विचारधारा और तुष्टिकरण के खिलाफ आक्रामक रुख
सदन में बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाल की धरती पर माओवादी नेताओं या हिंसा का समर्थन करने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि पाहलगाम हमले जैसी घटनाओं पर मौन रहने वाले और 'युद्ध नहीं, शांति चाहिए' का छद्म नारा देने वाले तत्वों को चिन्हित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि तुष्टिकरण की राजनीति के कारण ही विपक्ष का जनाधार घटा है, जबकि उनकी सरकार की नीतियां और कड़े फैसले जनता के समर्थन से मजबूत हो रहे हैं।