कोलकाता: के दुर्गा पूजा मानचित्र पर पिछले कुछ वर्षों से आकर्षण का केंद्र बनी रही 'नाला प्रत्यय' दुर्गा पूजा को लेकर बने असमंजस के बादल आखिरकार छट गए हैं। राज्य में सत्ता परिवर्तन और मैदान पर कब्जे को लेकर चले लंबे विवाद के बाद गुरुवार को प्रेस क्लब में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में पूजा के 101वें वर्ष के आयोजन की आधिकारिक घोषणा की गई। इस बार कम समय और सीमित दायरे के बावजूद प्रसिद्ध कलाकार सुशांत शिवानी पाल अपनी नई सोच ‘डिटैचमेंट’ यानी ‘वियोजन’ (Biyojon) थीम के साथ वापसी कर रहे हैं।
नए नेतृत्व और समिति के साथ प्रेस क्लब में घोषणा
गुरुवार को कोलकाता प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बीजेपी विधायक और पूजा समिति के चेयरमैन र बीतेश तिवारी मौजूद रहे। उनके साथ क्लब के नए अध्यक्ष लक्षण जसवाल, उपाध्यक्ष देबल बसु, संयुक्त सचिव विश्वेश्वर पांडे और कलाकार सुशांत शिवानी पाल भी उपस्थित थे। नई समिति ने स्पष्ट किया कि 101वें वर्ष में पूजा के पारंपरिक गौरव और बंगाली संस्कृति को संजोते हुए इसे एक नए स्वरूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
मैदान के विवाद के बाद अब ताराशंकर सरणी की सड़क पर बनेगा मंडप
गौरतलब है कि पिछले कई वर्षों से टाला पार्क के बड़े मैदान में साल भर इस पूजा की तैयारियां चलती थीं, जहां जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप लगे थे। स्थानीय विधायक र बीतेश तिवारी की पहल पर मैदान को मुक्त कराए जाने के बाद पूजा के आयोजन स्थल को बदला गया है। इस वर्ष टाला प्रत्यय का मंडप किसी मैदान में नहीं, बल्कि ताराशंकर सरणी (सड़क) पर तैयार किया जा रहा है। आयोजकों ने आश्वासन दिया है कि मंडप निर्माण के दौरान आम जनता और वाहनों की आवाजाही के लिए पर्याप्त रास्ता खुला रखा जाएगा।
कलाकार सुशांत पाल की थीम 'वियोजन' की मूल भावना
साल 2024 के बाद फिर से टाला प्रत्यय से जुड़े कलाकार सुशांत शिवानी पाल ने अपनी थीम 'वियोजन' (Detachment) के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि पुरानी संरचना, परिचित सीमाओं और बने-बनाये ढर्रे से अलग हटकर खुद को नए सिरे से तलाशने की अवधारणा ही इस बार की पूजा का मुख्य संदेश है। सीमित समय और कम जगह में भी इस कलात्मक सोच को पूर्ण रूप से धरातल पर उतारा जा रहा है।
गंगा घाट पर होगा मूर्ति विसर्जन, विवादों पर आयोजकों का रुख
इस बार टाला प्रत्यय ने एक बड़ा बदलाव अपनी विसर्जन परंपरा में भी किया है। अब तक मंडप के भीतर ही होने वाले विसर्जन के विपरीत, इस वर्ष मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन पारंपरिक तरीके से गंगा नदी में किया जाएगा। वहीं, पूर्व में टिकट बिक्री और यूनेस्को टैग के कथित इस्तेमाल से जुड़े विवादों के सवालों पर आयोजकों ने कहा कि उनका पूरा ध्यान अब पूजा के सफल आयोजन पर है। कलाकार सुशांत पाल के अनुसार, यदि पर्यटकों और आगंतुकों की भारी मांग के लिए कोई विशेष व्यवस्था की जाती है, तो वह पूजा का व्यवसायीकरण नहीं बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने का माध्यम है।