रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में किसानों को खरीफ और रबी सीजन में उर्वरकों की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मंत्री-मंडलीय उप समिति के गठन को मंजूरी दी गई है। सरकार का कहना है कि यह समिति खाद की आपूर्ति, वितरण और प्रबंधन की लगातार निगरानी करेगी। वहीं, कांग्रेस ने समिति के गठन की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा है।
उर्वरक आपूर्ति की निगरानी करेगी समिति
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, उर्वरकों की आपूर्ति, वितरण और प्रबंधन पर निगरानी रखने के लिए मंत्री-मंडलीय उप समिति गठित की जाएगी। समिति के अध्यक्ष उपमुख्यमंत्री होंगे। इसके अलावा कृषि, सहकारिता और वित्त विभाग के मंत्री समिति के सदस्य होंगे, जबकि कृषि उत्पादन आयुक्त को संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है।
जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से भी लिया जाएगा सुझाव
सरकार के अनुसार, यह उप समिति किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। जरूरत पड़ने पर समिति विशेषज्ञों और संबंधित विभागों के अधिकारियों से सुझाव भी ले सकेगी। इसका मुख्य उद्देश्य खरीफ और रबी फसलों के सीजन में उर्वरकों की उपलब्धता को बेहतर तरीके से सुनिश्चित करना है।
कांग्रेस ने उठाए कमेटी बनाने की टाइमिंग पर सवाल
कैबिनेट के इस फैसले पर कांग्रेस ने सरकार की मंशा और समय को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता अमरजीत भगत ने कहा कि खेती की प्रक्रिया अप्रैल-मई से ही शुरू हो जाती है। ऐसे समय में जब रोपाई का काम अंतिम चरण में है, तब खाद की उपलब्धता को लेकर समिति का गठन करना सरकार की देरी को दर्शाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पर किसी तरह का दबाव दिखाई दे रहा है और इसी वजह से अब समिति का गठन किया गया है।
अरुण साव बोले- अभी पर्याप्त व्यवस्था, जरूरत पर समिति लेगी फैसला
वहीं, उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि मौसम और आगामी फसल सीजन को ध्यान में रखते हुए पहले से खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि फिलहाल खाद की पर्याप्त व्यवस्था है। अगर भविष्य में किसी तरह की कमी की आशंका होती है, तो मंत्री-मंडलीय उप समिति बैठक कर आवश्यक निर्णय लेगी।
खाद की उपलब्धता पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने
उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर सरकार ने समिति का गठन कर अपनी सक्रियता दिखाने की कोशिश की है, लेकिन कांग्रेस इसे देर से उठाया गया कदम बता रही है। अब देखने वाली बात होगी कि यह मंत्री-मंडलीय उप समिति किसानों को खरीफ और रबी सीजन में खाद की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने में कितनी प्रभावी साबित होती है।