झाबुआ: मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में जमीन अधिग्रहण के बदले मिलने वाले मुआवजे को लेकर किसानों का विरोध अब तेज होता दिखाई दे रहा है। बदनावर-टिमरवानी फोरलेन सड़क परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामले में किसान अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। गुरुवार से शुरू हुआ यह प्रदर्शन रातभर जारी रहा और किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर में ही खुले आसमान के नीचे रात गुजारी। किसानों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के बदले उन्हें उचित और न्यायसंगत मुआवजा मिलना चाहिए। अपनी मांग को लेकर उन्होंने प्रशासन के सामने साफ कर दिया है कि जब तक मुआवजे के मुद्दे पर कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। खास बात यह रही कि किसानों ने धरना स्थल को ही अपना अस्थायी पड़ाव बना लिया और रात के खाने से लेकर सुबह की चाय-नाश्ते तक की व्यवस्था वहीं की।
कलेक्ट्रेट परिसर में ही किसानों ने तैयार किया भोजन
आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसान धरना खत्म कर वापस घर लौटने के बजाय रातभर कलेक्ट्रेट परिसर में ही मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सामूहिक रूप से खाना तैयार किया। गुरुवार रात करीब 30 किलो आटे से बाटियां बनाई गईं, जबकि लगभग 7 किलो चावल भी पकाया गया। किसानों ने मिल-जुलकर भोजन तैयार किया और धरना स्थल पर ही बैठकर खाना खाया। शुक्रवार सुबह भी प्रदर्शन जारी रहा। सुबह किसानों के लिए करीब 10 लीटर दूध की चाय और पोहे तैयार किए गए। इस तरह भोजन की सामूहिक व्यवस्था करते हुए किसानों ने यह संकेत दिया कि वे अपनी मांगों को लेकर लंबे समय तक आंदोलन करने के लिए तैयार हैं। धरना स्थल पर इस तरह की व्यवस्था केवल भोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर में ही रात गुजारकर प्रशासन के सामने अपनी मांग की गंभीरता रखने की कोशिश की।
मुआवजे को लेकर किसानों की मुख्य मांग क्या है?
किसानों के आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा जमीन अधिग्रहण के बदले मिलने वाला मुआवजा है। किसानों की मांग है कि उनकी जमीन का मुआवजा बाजार मूल्य के मुकाबले चार गुना दिया जाए। उनका कहना है कि फोरलेन सड़क निर्माण के लिए जमीन जाने के बाद उनके सामने भविष्य से जुड़े कई आर्थिक और व्यावहारिक सवाल खड़े होंगे। बदनावर-टिमरवानी फोरलेन परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया से प्रभावित किसान चाहते हैं कि मुआवजा तय करते समय उनकी जमीन की वास्तविक कीमत और उससे जुड़े हितों को उचित महत्व दिया जाए। किसानों का कहना है कि केवल प्रक्रिया पूरी कर देने से उनकी समस्या खत्म नहीं होगी। उन्हें ऐसा मुआवजा चाहिए, जिसे वे अपनी जमीन के नुकसान के लिहाज से उचित मानते हों। इसी मांग को लेकर उन्होंने अनिश्चितकालीन धरने का रास्ता अपनाया है।
अधिकारियों ने किसानों से की बातचीत
किसानों के लगातार धरने की जानकारी प्रशासन और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने के बाद अधिकारियों ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर स्थिति को समझने की कोशिश की। मेघनगर एसडीएम अवनधती प्रधान और NHAI परियोजना के डायरेक्टर देवेंद्र चापडेकर भी किसानों के बीच पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत की और मुआवजे से संबंधित अपना पक्ष रखने के लिए आर्बिट्रेशन आवेदन का रास्ता अपनाने की सलाह दी। प्रशासन की ओर से किसानों को बताया गया कि वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन देकर अपनी आपत्ति और मांग दर्ज करा सकते हैं। हालांकि, किसानों का कहना है कि उनकी मांग केवल आवेदन करने तक सीमित नहीं है। वे मुआवजे के मामले में ठोस कार्रवाई और स्पष्ट आश्वासन चाहते हैं। यही वजह रही कि अधिकारियों के साथ बातचीत के बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ और किसान धरना स्थल पर डटे रहे।
रास्ते और ड्रेनेज जैसे मुद्दों पर बनी सहमति
मुआवजे के विवाद के बीच किसानों की ओर से सड़क निर्माण से जुड़े कुछ अन्य मुद्दे भी प्रशासन के सामने रखे गए। किसान संघ के जिला मंत्री वरदीचंद पाटीदार के नेतृत्व में किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट से मुलाकात की। बैठक के दौरान खेतों तक पहुंचने वाले रास्तों, ड्रेनेज व्यवस्था और सड़क की ऊंचाई से संबंधित समस्याओं पर चर्चा हुई। किसानों की चिंता है कि फोरलेन निर्माण के बाद यदि खेतों तक पहुंचने के रास्ते प्रभावित होते हैं या जल निकासी की व्यवस्था ठीक नहीं रहती, तो खेती से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं। इन मुद्दों पर बातचीत के बाद सहमति बनने की बात सामने आई है। हालांकि, किसानों की सबसे बड़ी मांग यानी जमीन के मुआवजे को लेकर अभी अंतिम सहमति नहीं बन सकी है। इसी कारण आंदोलन जारी है।
लिखित आश्वासन के बिना पीछे हटने को तैयार नहीं किसान
किसानों ने प्रशासन के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उनका कहना है कि केवल बातचीत या मौखिक भरोसे के आधार पर वे अपना धरना समाप्त नहीं करेंगे। किसान मुआवजे के मामले में लिखित आश्वासन चाहते हैं। प्रदर्शन कर रहे किसानों के मुताबिक, जब तक उनकी मुख्य मांग पर प्रशासन की ओर से स्पष्ट और लिखित रूप में भरोसा नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। किसानों के इस रुख से साफ है कि फिलहाल उनका ध्यान केवल बातचीत से आगे बढ़कर ठोस निर्णय हासिल करने पर है। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। महिला किसानों की मौजूदगी ने भी प्रदर्शन को व्यापक रूप दिया है। किसान लगातार कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद रहकर प्रशासन से समाधान की मांग कर रहे हैं।
सामूहिक भोजन बना आंदोलन का संदेश
झाबुआ में चल रहे इस प्रदर्शन की एक खास तस्वीर यह भी सामने आई कि किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर में ही सामूहिक भोजन तैयार किया। सामान्य तौर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान किसान कुछ घंटों के लिए धरना देते हैं, लेकिन यहां किसानों ने रातभर परिसर में रुकने की तैयारी की। बाटी, चावल, सुबह की चाय और पोहे तैयार करने की सामूहिक व्यवस्था ने यह दिखाया कि किसान आंदोलन को लंबा खींचने के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं। इसे किसानों की एकजुटता और अपनी मांग पर कायम रहने के संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
प्रशासन के सामने अब मुआवजे का समाधान बड़ी चुनौती
बातचीत के दौरान रास्ते, ड्रेनेज और सड़क की ऊंचाई जैसे कुछ विषयों पर सहमति बनने के बाद अब पूरा ध्यान मुआवजे के विवाद पर केंद्रित है। प्रशासन की ओर से किसानों को आर्बिट्रेशन आवेदन का विकल्प बताया गया है, जबकि किसान लिखित आश्वासन की मांग पर कायम हैं। ऐसे में आगे की बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि प्रशासन और किसानों के बीच मुआवजे को लेकर कोई सहमति बनती है तो आंदोलन समाप्त होने का रास्ता खुल सकता है। वहीं, यदि दोनों पक्षों के बीच समाधान नहीं निकलता है, तो कलेक्ट्रेट में किसानों का धरना आगे भी जारी रहने की संभावना है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, बदनावर-टिमरवानी फोरलेन सड़क परियोजना के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण से जुड़ा विवाद सामने आया है। जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे की राशि को लेकर किसान संतुष्ट नहीं हैं और वे बाजार मूल्य के मुकाबले चार गुना मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर किसानों ने झाबुआ कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। किसान चाहते हैं कि उनकी जमीन के अधिग्रहण से पहले मुआवजे को लेकर स्थिति स्पष्ट की जाए और उन्हें लिखित आश्वासन दिया जाए। फिलहाल प्रशासन और किसानों के बीच बातचीत का दौर चल रहा है। कुछ स्थानीय समस्याओं पर सहमति बनने के बावजूद मुआवजे का मुख्य मुद्दा अभी सुलझा नहीं है।
आगे क्या होगा?
झाबुआ में किसानों के आंदोलन का अगला रुख अब प्रशासन की कार्रवाई पर निर्भर करेगा। किसानों ने फिलहाल धरना खत्म करने से इनकार किया है। उनकी मांग है कि मुआवजे के संबंध में स्पष्ट और लिखित समाधान सामने आए। अगर आने वाले समय में प्रशासन किसानों की मांग पर कोई ठोस प्रस्ताव देता है, तो बातचीत के जरिए विवाद खत्म होने की उम्मीद बन सकती है। दूसरी ओर, समाधान में देरी होने पर किसानों का आंदोलन और लंबा चल सकता है।