कोलकाता: पश्चिम बंगाल में त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों और कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। खुदरा बाजार में चीनी के दाम बढ़कर 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। कारोबारियों के मुताबिक, पिछले करीब एक महीने में चीनी की कीमत में लगभग 20 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है। पिछले चार-पांच दिनों में ही कीमतों में करीब 10 प्रतिशत का अचानक उछाल देखने को मिला है। चीनी महंगी होने का सीधा असर इससे तैयार होने वाले उत्पादों पर भी पड़ रहा है। गुड़, बताशा और नकुलदाना जैसे सामान भी महंगे हो गए हैं। सितंबर से नवंबर के बीच आने वाले त्योहारों को देखते हुए कारोबारियों को आगे भी कीमतों में दबाव बने रहने की आशंका है।
एक महीने में 20 रुपये बढ़े चीनी के दाम
व्यापारियों के अनुसार, एक महीने पहले तक जिस चीनी की खुदरा कीमत करीब 50 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास थी, वह अब बढ़कर 70 रुपये तक पहुंच गई है। खास तौर पर पिछले कुछ दिनों में बाजार में कीमतों में तेजी देखी गई है। थोक बाजार में भी चीनी के दाम बढ़कर करीब 65 रुपये प्रति किलोग्राम हो चुके हैं। कारोबारियों का कहना है कि बढ़ती कीमतों के कारण मिठाई और पूजा सामग्री से जुड़े उत्पादों की लागत भी बढ़ रही है। त्योहारों के दौरान चीनी की मांग सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कीमतों में लगातार तेजी से आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। कारोबारियों ने सरकार से बाजार में हस्तक्षेप कर कीमतों को नियंत्रित करने की मांग की है।
करीब एक दशक बाद चीनी आयात की अनुमति
बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने गुरुवार शाम चीनी मिलों को 10 लाख टन कच्ची चीनी आयात करने की अनुमति दी है। कारोबारियों के मुताबिक, करीब एक दशक बाद केंद्र की ओर से इस तरह का बड़ा आयात निर्णय लिया गया है। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों पर नियंत्रण करना बताया जा रहा है। हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि आयात की अनुमति मिलने के बावजूद इसका असर अभी खुदरा बाजार में दिखाई नहीं दिया है। बाजार में उपलब्ध चीनी की कीमतें पहले ही काफी बढ़ चुकी हैं। कारोबारियों के मुताबिक, 10 लाख टन चीनी देश की लगभग दो सप्ताह की मांग के बराबर ही है। इसलिए उनका मानना है कि कीमतों पर प्रभाव डालने के लिए आगे भी अतिरिक्त कदम उठाने की जरूरत पड़ सकती है।
15 दिन से ज्यादा का स्टॉक रखने पर सीमा
सरकार ने उन थोक खरीदारों के लिए भी भंडारण सीमा तय की है, जो हर महीने 10 टन से अधिक चीनी की खपत करते हैं। ऐसे खरीदार अब अपनी 15 दिन की खपत के बराबर ही चीनी का भंडार रख सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य बाजार में अनावश्यक रूप से बड़ी मात्रा में चीनी जमा किए जाने की संभावना को रोकना है। कारोबारियों का कहना है कि त्योहारी सीजन में चीनी की मांग बढ़ने के कारण भंडारण सीमा का बाजार पर असर पड़ सकता है। यदि मांग के मुकाबले आपूर्ति कम रही तो कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका बनी रहेगी। दूसरी ओर, सरकार की ओर से आयात की अनुमति मिलने के बाद बाजार में नई खेप आने की उम्मीद है। कारोबारियों की नजर अब इस बात पर है कि आयातित चीनी बाजार में कब तक पहुंचती है।
थोक कीमत 65 रुपये, खुदरा में 70 रुपये तक पहुंची
कन्फेडरेशन ऑफ वेस्ट बंगाल ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील पोद्दार ने कहा कि चीनी मिलों पर कीमतों को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त नियंत्रण नहीं है। उनके मुताबिक, थोक बाजार में चीनी की कीमत पहले ही 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि त्योहारों से ठीक पहले कीमतों में इतनी तेजी चिंता का विषय है। एक स्थानीय किराना दुकानदार ने बताया कि उसने कुछ दिन पहले तक चीनी 65 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बेची थी। अब उसे वही चीनी 70 रुपये प्रति किलोग्राम से कम में बेचना मुश्किल हो रहा है। कारोबारियों के अनुसार, यदि थोक कीमतों में और बढ़ोतरी हुई तो खुदरा बाजार में भी इसका सीधा असर दिखाई देगा। इससे मिठाई, प्रसाद और अन्य चीनी आधारित उत्पादों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
एथनॉल मिश्रण को बताया जा रहा कीमत बढ़ने की वजह
सीडब्ल्यूबीटीए अध्यक्ष सुशील पोद्दार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के पीछे एथनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल को भी एक प्रमुख वजह बताया है। उनका कहना है कि एथनॉल के लिए चीनी की मांग बढ़ने से घरेलू बाजार में उपलब्धता प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण बढ़ने के कारण चीनी का इस्तेमाल इस दिशा में अधिक हो रहा है। हालांकि, इस दावे को लेकर अलग-अलग पक्षों की अलग-अलग राय सामने आई है। पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने चीनी की कीमत बढ़ने के लिए एथनॉल मिश्रण के बजाय जमाखोरी को प्रमुख वजह बताया है। ऐसे में चीनी की कीमतों को लेकर कारोबारी संगठनों और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में बाजार में आपूर्ति और सरकारी कदमों पर सभी की नजर रहेगी।
मंत्री दिलीप घोष ने जमाखोरी को बताया जिम्मेदार
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने चीनी की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी के लिए जमाखोरी को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध होने के बावजूद यदि कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं तो इसके पीछे भंडारण और जमाखोरी की भूमिका की जांच जरूरी है। वहीं, एक प्रमुख चीनी मिल कंपनी के अधिकारी ने बताया कि चीनी की पेराई का काम अप्रैल में ही समाप्त हो चुका है। फिलहाल मिलें अपने पास मौजूद भंडार से ही बाजार में चीनी की आपूर्ति कर रही हैं। अधिकारी के मुताबिक, इस समय चीनी मिलें उत्पादन के स्तर पर इससे अधिक कुछ नहीं कर सकतीं। ऐसे में बाजार में उपलब्ध स्टॉक, मांग और आने वाली आयातित खेप कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
त्योहारों में बढ़ सकती है आम लोगों की परेशानी
सितंबर से नवंबर के बीच त्योहारों का सिलसिला शुरू होने वाला है। इस दौरान मिठाई, प्रसाद, बताशा और नकुलदाना जैसे चीनी से जुड़े उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में चीनी की मौजूदा कीमतों का असर सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है। कारोबारियों का कहना है कि केवल 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात से कीमतों पर तत्काल नियंत्रण संभव नहीं है। उनका मानना है कि सरकार को बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के साथ-साथ जमाखोरी पर भी सख्त निगरानी रखनी चाहिए। यदि समय रहते कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ तो त्योहारों के दौरान मिठाई और अन्य जरूरी सामान और महंगे हो सकते हैं। फिलहाल बाजार में चीनी की कीमतों में आई इस तेजी ने त्योहारी खरीदारी से पहले चिंता जरूर बढ़ा दी है।